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अमेरिका, पाक, चीन नज़र बनाए हुए हैं, इसलिए रक्षा रिपोर्ट वेबसाइट पर अपलोड नहीं की: निवर्तमान कैग

हाल ही में रिटायर हुए पूर्व कैग राजीव महर्षि ने कहा कि संसद को हम रक्षा रिपोर्ट दे रहे हैं, लोक लेखा समिति को दे रहे हैं. वास्तव में यह गोपनीय नहीं है. कम से कम हम ऐसा कर रहे हैं कि इसे एक क्लिक पर प्राप्त नहीं किया जा सकेगा.

राजीव महर्षि. (फोटो: पीटीआई)

राजीव महर्षि. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: बीते शुक्रवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले राजीव महर्षि ने कहा है कि उन्होंने रक्षा ऑडिट रिपोर्ट इसलिए ऑनलाइन अपलोड नहीं की क्योंकि अमेरिका, पाकिस्तान और चीन इस पर नजर बनाए हुए हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसा करने के पीछे का उद्देश्य ये है कि लोग इसे आसानी से प्राप्त न कर सकें. महर्षि ने यह भी कहा कि ये उनका खुद का निर्णय है, न कि सरकार का.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘संसद को हम ये रिपोर्ट दे रहे हैं. पीएसी (लोक लेखा समिति) को हम ये दे रहे हैं. वास्तव में यह गोपनीय नहीं है. कम से कम हम ऐसा कर रहे हैं कि इसे एक क्लिक पर प्राप्त नहीं किया जा सकेगा. कोई वॉशिंगटन में भी देख रहा है, बीजिंग में भी देख रहा है और इस्लामाबाद में भी देख रहा है, इसलिए हमने ऐसा निर्णय लिया.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमारी रिपोर्ट आएगी तो उसमें हम कमियां बताएंगे ही, लेकिन डिफेंस की रिपोर्ट को वेबसाइट पर डालने का कोई सेंस नहीं है. क्यों यह दुनिया में हर किसी के लिए आसानी से सुलभ होनी चाहिए?’

राजीव महर्षि ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘जब मैं गृह मंत्रालय में था तो उस समय पाकिस्तान के साथ विवाद चल रहा था. तब कैग की एक रिपोर्ट आई थी ये बताते हुए कि हथियारों की कितनी कमी है. मान लीजिए कमी है भी, लेकिन कम से कम दुश्मनों को मालूम नहीं होना चाहिए.’

मालूम हो कि पूर्व गृह सचिव महर्षि को सितंबर 2017 में कैग नियुक्त किया गया था. वेबसाइट पर अपलोड की गई आखिरी रक्षा ऑडिट रिपोर्ट उनके कैग बनने से पहले की गई है, जो कि 28 जुलाई 2017 में संसद में पेश की गई थी.

राजीव महर्षि ने संसद में विवादित रफाल डील पर अपनी रिपोर्ट पेश कर दावा किया था कि रफाल सौदा यूपीए की डील के मुकाबले 2.86 प्रतिशत सस्ता है. हालांकि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट की काफी आलोचना की थी.

महर्षि ने अपने कार्यकाल में कुल आठ डिफेंस ऑडिट रिपोर्ट संसद में पेश की थी, लेकिन इसमें से कोई भी कैग की वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई है.