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2013 दरभा हत्याकांड: राज्य की एफ़आईआर ट्रांसफर करने की एनआईए की याचिका ख़ारिज

दरभा हत्याकांड को लेकर छत्तीसगढ़ की एजेंसियों और एनआईए के बीच केस फाइलों और रिकॉर्ड को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. साल 2013 में सुकमा की दरभा घाटी में माओवादियों के हमले में छत्तीसगढ़ में लगभग पूरे कांग्रेस नेतृत्व का सफाया हो गया था. इस हमले में महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल और विद्या चरण शुक्ल की मौत हो गई थी.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

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नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में बस्तर के जगदलपुर में एनआईए अदालत ने साल 2013 के दरभा हत्याकांड मामले में राज्य पुलिस की एफआईआर ट्रांसफर करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के आवेदन को खारिज कर दिया है.

अदालत ने राज्य पुलिस को उनके केस की फाइलें और रिकॉर्ड एनआईए को सौंपने का आदेश देने से भी इनकार कर दिया.

साल 2013 में सुकमा की दरभा घाटी में माओवादियों के हमले में छत्तीसगढ़ में लगभग पूरे कांग्रेस नेतृत्व का सफाया हो गया था. इस हमले में महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल और विद्या चरण शुक्ल की मौत हो गई थी. तत्कालीन भाजपा सरकार ने मामले को एनआईए को ट्रांसफर कर दिया था.

बीते 10 अगस्त को विशेष एनआईए कोर्ट के जज डीएन भगत ने मई महीने में दर्ज राज्य पुलिस की एफआईआर को एनआईए के पास ट्रांसफर करने के आवेदन को खारिज कर दिया.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जज ने कहा कि जबकि एनआईए पहले ही मामले की जांच कर रही है, लेकिन एनआईए अधिनियम में धारा 10 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि राज्य भी अपनी स्वतंत्र जांच करा सकती है.

राज्य की एजेंसियों और एनआईए के बीच केस फाइलों और रिकॉर्ड को लेकर लंबे समय से चल रहे झगड़े में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए अदालत ने कहा, ‘कोई भी जांच एजेंसी किसी अन्य जांच एजेंसी द्वारा एकत्रित किए गए संसाधनों के आधार पर अपनी जांच पूरी नहीं कर सकती है.’

पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी. ने संवाददाताओं से कहा, ‘बस्तर पुलिस ने एनआईए अदालत को बताया कि यह मामला 2013 से अलग है. नया मामला मुख्य रूप से साजिश के एंगल के बारे में है.’

2013 के नरसंहार में मारे गए कांग्रेसी नेता उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार की शिकायत पर इस साल 25 मई को छत्तीसगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी.

जून में एनआईए ने एफआईआर के खिलाफ जगदलपुर अदालत का रुख किया. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के गृह सचिव को एक पत्र भी भेजा जिसमें कहा गया है कि राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर उसी घटना से संबंधित है जिसे एनआईए ने साल 2013 में दर्ज की थी.

यह कहते हुए कि राज्य सरकार ने एनआईए अधिनियम का उल्लंघन किया है, पत्र में कहा गया था, ‘एनआईए अधिनियम की धारा 6(6) में विशेष रूप से कहा गया है कि यदि एक्ट की धारा 6(4) के तहत एनआईए को जांच का कार्य सौंपा जाता है तो राज्य सरकार अपनी ओर से नई जांच नहीं कर सकती है. इसके अलावा एनआईए एक्ट की धारा 8 के तहत एनआईए को संबंधित मामले से जुड़े अन्य अपराधों की भी जांच करने का अधिकार मिला हुआ है.’

मालूम हो कि दिसंबर 2018 में सत्ता में आने पर कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहली घोषणाओं में से एक दरभा हत्याकांड की एसआईटी जांच का आदेश देना था.

साल 2013 में 25 मई को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की दरभा घाटी में कांग्रेस नेताओं के एक दल पर माओवादियों के हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी. इसमें राज्य के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र कर्मा, छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रमुख नंद कुमार पटेल शामिल थे. हमले में गंभीर रूप से घायल वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्या चरण शुक्ल ने 11 जून 2013 को अस्पताल में दम तोड़ दिया था.