राजनीति

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने सभी सदस्यों को वेतन का 30 फ़ीसदी कोविड फंड में देना अनिवार्य किया

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तराखंड राज्य विधानसभा (सदस्य भत्ता और पेंशन) संशोधन अध्यादेश, 2020 को मंज़री दी गई. इसके तहत एक अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक मुख्यमंत्री समेत सभी विधायकों के वेतन भत्तों से 30 फ़ीसदी राशि काटी जाएगी.

उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक (फोटो: @tsrawatbjp ट्विटर)

उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक (फोटो: @tsrawatbjp ट्विटर)

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा के सभी सदस्यों को अपने वेतन और भत्तों का 30 फीसदी हिस्सा कोविड फंड में दिए जाने को अनिवार्य करने के लिए राज्य सरकार एक अध्यादेश लाई है.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को देहरादून में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई.

प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि इस अध्यादेश के लागू होने के बाद एक साल की अवधि के लिए यानी एक अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक सभी विधायकों के वेतन और निर्वाचन तथा सचिव भत्तों से 30 फीसदी राशि काटी जा सकेगी.

यह राशि कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए बनाए गए कोष में जमा की जाएगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ भाजपा के कई विधायक अपने वेतन का 30 प्रतिशत से कम योगदान दे रहे हैं. उसके बाद सरकार ने उत्तराखंड राज्य विधानसभा (सदस्य भत्ता और पेंशन) संशोधन अध्यादेश, 2020 पारित किया है.

बीते आठ अप्रैल को राज्य मंत्रिमंडल ने फैसला किया था कि मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक के वेतन से 30 प्रतिशत की कटौती की जाएगी और यह रकम महामारी के प्रबंधन में लगाई जाएगी.

गुरुवार को कैबिनेट की बैठक के बाद मदन कौशिक ने कहा कि भ्रम की स्थिति थी क्योंकि सभी विधायक अलग-अलग मात्रा में फंड दे रहे थे.

मंत्री ने कहा, ‘इस अध्यादेश के बाद सभी विधानसभा सदस्य 31 मार्च, 2021 तक अपने वेतन और भत्ते के बराबर 30 प्रतिशत देंगे.’

मालूम हो कि प्रत्येक विधायक को 2.04 लाख रुपये मासिक वेतन मिलता है, जिसमें 30,000 रुपये का मूल वेतन, 1.5 लाख रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 12,000 रुपये का सचिवीय भत्ता और ड्राइवर भत्ता की बराबर राशि शामिल है.

अब सभी विधायकों को अपने मूल वेतन, निर्वाचन क्षेत्र और सचिवीय भत्ते की कुल राशि से 30 प्रतिशत यानी लगभग 57,600 रुपये का भुगतान करना होगा.

साथ ही मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के नौकर और मंत्री भत्ते को बढ़ाने के एक प्रस्ताव को भी मंजूरी दी.

इसके अलावा कैबिनेट ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा तैयार महिला उत्पीड़न/यौन उत्पीड़न/अन्य अपराध, 2018 से बचे लोगों के लिए मुआवजा योजना को लागू करने का भी निर्णय लिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)