दुनिया

सैन्य विद्रोहियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद माली के राष्ट्रपति ने इस्तीफ़ा दिया

पश्चिम अफ्रीकी देश माली में कई महीनों से राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता के इस्तीफ़े की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए विद्रोही सैनिकों ने अप्रत्याशित घटनाक्रम में उनके साथ प्रधानमंत्री बौबोऊ सिस्से को बंधक बना लिया था. इसके बाद कीता ने इस्तीफ़ा देने के साथ संसद को भंग कर दिया.

माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता. (फोटो: रॉयटर्स)

माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता. (फोटो: रॉयटर्स)

बमाको: पश्चिम अफ्रीकी देश माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता ने मंगलवार देर रात आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया. साथ ही उन्होंने संसद को भी भंग कर दिया.

देश में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में विद्रोही सैनिकों ने मंगलवार को उनके आवास का घेराव किया और हवा में गोलीबारी करते हुए उन्हें और प्रधानमंत्री बौबोऊ सिस्से को बंधक बना लिया था.

कीता ने सरकारी टेलीविजन ‘ओआरटीएम’ पर कहा कि उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू होगा.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, 75 वर्षीय कीता ने कहा, ‘यदि आज हमारे सशस्त्र बलों के कुछ तत्व चाहते हैं कि यह उनके हस्तक्षेप के माध्यम से समाप्त हो जाए, तो क्या मेरे पास वास्तव में कोई विकल्प है?’

माली के राष्ट्रपति को लोकतांत्रिक रूप से चुना गया था और उन्हें पूर्व उपनिवेशवादी फ्रांस और अन्य पश्चिमी सहयोगियों से व्यापक समर्थन प्राप्त है. सैनिकों के शस्त्रागार से हथियारों को जब्त कर बमाको का रुख करने के बाद राष्ट्रपति के बाद कोई विकल्प नहीं रह गया था.

सैनिक बमाको की सड़कों पर घूमते नजर आए, जिससे यह और स्पष्ट हो गया कि राजधानी पर अब उनका नियंत्रण है. हालांकि सैनिकों की ओर से तत्काल कोई बयान नहीं आया है.

इससे पहले सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सैनिकों की कार्रवाई का समर्थन किया. कुछ ने एक इमारत में आग लगा दी जो माली के न्याय मंत्री से संबंधित है.

सशस्त्र लोगों ने देश के वित्त मंत्री अब्दुलाय दफे समेत कुछ अधिकारियों को भी कुछ दिन पहले हिरासत में ले लिया था.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका कि विद्रोह का नेतृत्व कौन कर रहा था, कीता की अनुपस्थिति में कौन शासन करेगा या विद्रोही क्या चाहते थे.

बता दें कि माली में पिछले कई महीनों से कथित भ्रष्टाचार और इस्लामी आतंकियों के कारण खराब होती सुरक्षा स्थिति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और कीता के इस्तीफे की मांग की जा रही थी.

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एम5-आरएपी गठबंधन ने विद्रोही सैनिकों की कार्रवाई का समर्थन किया. उनके प्रवक्ता नोहम टोगो ने रॉयटर्स को बताया कि यह सैन्य तख्तापलट नहीं बल्कि एक लोकप्रिय विद्रोह था.

सैन्य विद्रोहियों के लिए जश्म मनाने के लिए सैंकड़ों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी बमाको के सेंट्रल स्कवॉयर पर इकट्ठे हो गए और इस दौरान सैन्य विद्रोहियों ने सैन्य वाहनों से गुजरते हुए हवा में गोलीबारी की.

बता दें कि साल 2012 में इसी तरह एक और सैन्य विद्रोह हुआ था, जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति अमादौ तौमानी टॉरे की सरकार गिर गई थी और माली का उत्तरी हिस्सा जिहादी आतंकियों के कब्जे में चला गया था.

इसके बाद के सालों में फ्रांसीसी सरकारों ने उन्हें पीछे धकेलने की लड़ाई लड़ी, लेकिन तब से उग्रवादियों ने सैनिकों, नागरिकों और पश्चिमी पर्यटकों पर हमला करते हुए पड़ोसी बुर्किना फासो और नाइजर में अपना प्रभाव फिर से जमा लिया है.

फ्रांस और अन्य अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के साथ-साथ अफ्रीकी संघ ने विद्रोह की निंदा की. उन्हें चिंता जताई कि कीता के पतन ने पूर्व फ्रांसीसी उपनिवेश और पश्चिम अफ्रीका के पूरे साहेल क्षेत्र को अस्थिर कर दिया.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने कीता और अन्य बंदियों की तत्काल रिहाई का आह्वान किया.

अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष मौसा फाकी महामत ने ट्विटर पर कहा, ‘मैं राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता, प्रधानमंत्री और मालियान सरकार के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी की निंदा करता हूं.’

फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-यवेस ले ड्रियन ने कहा कि फ्रांस ‘इस गंभीर घटना की कड़ी शब्दों में निंदा करता है.’

माली में अमेरिकी दूत जे. पीटर फाम ने ट्वीट कर कहा कि अमेरिकी सरकार के सभीगैर संवैधानिक परिवर्तनों के विरोध में है.

पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय ने ‘लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार के विद्रोही सैनिकों द्वारा उखाड़ फेंकने’ की निंदा की.

एक बयान में इसने माली के साथ क्षेत्रीय सीमाओं को बंद करने के साथ माली और इसके 15 सदस्यों के राज्यों के बीच सभी वित्तीय प्रवाह को निलंबित करने का आदेश दिया.

बता दें कि जुलाई में कीता के राजनीतिक विरोधियों, धार्मिक नेताओं और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं के गठबंधन द्वारा बुलाए गए प्रदर्शनों में कम से कम 14 लोग मारे गए थे.

इसके बाद कीता ने विरोधियों को सरकार में शामिल करने सहित कई समझौते की पेशकश थी जिसे विरोधियों ने खारिज कर दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)