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मुंबईः हिरासत में युवक की मौत, चार पुलिसकर्मी निलंबित, परिवार ने कहा- निलंबन न्याय नहीं

लॉकडाउन के दौरान 29 मार्च को राजू वेलु नामक युवक अपने रिश्तेदार के यहां जाने के लिए घर से निकले थे. आरोप है कि लॉकडाउन नियम तोड़ने को लेकर पुलिस ने बेरहमी से उनकी पिटाई की, जिससे उनकी मौत हो गई.

(फोटोः ट्विटर)

(फोटोः ट्विटर)

मुंबईः महाराष्ट्र की राजधानी मुबई में लॉकडाउन के दौरान एक युवक की पीट-पीटकर हत्या के आरोप में चार आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. मृतक युवक के परिवार का कहना है कि पुलिसकर्मियों को निलंबित करना न्याय नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 29 मार्च को 22 साल के राजू वेलु अपने एक रिश्तेदार के यहां जाने के लिए घर से बाहर निकले थे, कुछ दूर जाने पर पुलिस ने पीछा कर उन्हें पकड़ कर अपने साथ थाने ले गई थी.

थाने में राजू की लॉकडाउन नियम तोड़ने को लेकर बेरहमी से पिटाई की गई. जेल में ही हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

हालांकि, मुंबई पुलिस ने राजू के परिवार को बताया था कि चोरी का प्रयास करने पर भीड़ ने राजू की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद उनके भाई ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज हासिल करने की कोशिश की, लेकिन तब तक पुलिस ने 29-30 मार्च की रात की नेहरू नगर झुग्गी इलाके के सीसीटीवी कैमरे की उस फुटेज को कब्जे में ले लिया था.

चाय के स्टॉल पर काम करके राजू की मां सायरा देवेंद्र ने अपने चार बेटों को पाला पोसा था.उनका कहना है कि उन्हें पहले से ही शक था, क्योंकि राजू के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे.

यह स्वीकार करने के एक महीने बाद कि सीसीटीवी फुटेज में कोई भीड़ नहीं दिखाई दे रही है, मुंबई पुलिस ने बीते 17 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट बताया था कि इस मामले में चार कॉन्स्टेबल को निलंबित किया गया है.

अदालत में कहा गया है कि राजू की मौत पुलिस की पिटाई से हुई या नहीं, यह जांच का विषय है.

रिपोर्ट के अनुसार, कॉन्स्टेबल संतोष देसाई, दिगंबर चौहान, अंकुश पाल्वे और आनंद गायकवाड़ ने राजू के परिवार को गुमराह किया.

पुलिस ने 31 मार्च को दर्ज शिकायत में राजू की मौत के लिए आठ अज्ञात लोगों को जिम्मेदार ठहराया था और बाद में यह भी दावा किया था कि दो लोगों ने अपराध कुबूल कर लिया है. आठ दिन की हिरासत के बाद उन्हें जमानत दे दी गई थी.

सरकारी याचिकाकर्ता ने 17 अगस्त को हाईकोर्ट को बताया कि शुरुआती जांच शुरू कर दी गई है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 30 मार्च को सुबह लगभग नौ बजे चार पुलिसकर्मी नेहरू नगर स्लम क्षेत्र स्थित राजू के घर गए थे. परिवारवाले स्थानीय पुलिस अधिकारियों को जानते थे, क्योंकि राजू कभी कभार चोरी किया करता था.

राजू की 51 वर्षीय मां सायरा सायरा का कहना है, ‘उन्होंने (पुलिस) मुझे बताया कि राजू पास के एक फुटपाथ पर नशे की हालत में पड़ा हुआ है.’

जब सायरा अपने अन्य बेटे के साथ वहां पहुंची तो उन्हें राजू बेहोशी की हालत में मिला.

सायरा का कहना है कि वह राजू को अस्पताल ले जाना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा नहीं करने को कहा. राजू को घर ले जाने पर उन्हें उनके शरीर पर चोट के निशान मिले. पांच घंटे बाद भी जब राजू को होश नहीं आया तो परिवार ने उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया. कूपर अस्पताल ने राजू को मृत घोषित कर दिया गया.

परिवार का कहना है कि चारों आरोपी कॉन्स्टेबलों ने उन्हें बताया था कि राजू चोरी के इरादे से एक घर में घुसने की कोशिश कर रहा था और लोगों ने उसे पकड़ लिया और बेरहमी से उसकी पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई.

रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद परिवार द्वारा राजू का शव लेने से इनकार करने के बाद ही अगले दिन मामला दर्ज किया गया.

परिवार द्वारा पुलिस के व्यवहार और राजू की मौत की परिस्थितियों को लेकर संदेह जताने पर पुलिस ने आठ लोगों को हिरासत में लिया था, जिनकी गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद पुलिस ने कहा था कि इनमें से दो लोगों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है.

सांता क्रूज के एक वकील ने प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) और मुंबई के पुलिस कमिश्नर तक इस संबंध में पत्र पहुंचाने में मदद की.

वकील बहरेज ईरानी का कहना है, ‘शुरुआत में हमने बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था, जिसमें उनसे पूरे राज्य में हो रही पुलिस की बर्बरताओं को लेकर संज्ञान लेने को कहा गया था, लेकिन हमसे याचिका दायर करने को कहा गया था क्योंकि सिर्फ पत्र पर्याप्त नहीं था.’

उन्होंने कहा, ‘इसके बाद हमने जनहित याचिका दायर की. हमने सीएचआरआई की रिपोर्ट पर भरोसा किया, जिसमें राजू के मामले को उजागर किया गया था.’

परिवार के आरोपों से इनकार करते हुए सांताक्रूज डिवीजन के सहायक पुलिस आयुक्त सुहास रायकर ने कहा, ‘वे लगातार अपने बयान बदल रहे हैं. राजू एक हिस्ट्रीशीटर था, जिसे फरवरी में रिहा किया गया था. उस रात उसने चोरी की थी और स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया था. चार पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे थे.’

उन्होंने कहा कि हमारे पास जो सीसीटीवी फुटेज है, उसमें देखा जा सकता है कि चारों पुलिसकर्मियों ने राजू की पिटाई की थी, जिस वजह से उन्हें सस्पेंड किया गया है. हम मामले की जांच कर रहे हैं कि पुलिसकर्मियों द्वारा राजू की बेरहमी से पिटाई करने से पहले स्थानीय लोगों ने भी उसकी पिटाई की थी या नहीं.

राजू की मौत के पांच महीने बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं होने पर सायरा कहती हैं कि पुलिसकर्मियों को निलंबित करना न्याय नहीं है.

वह कहती हैं, ‘उसने (राजू) ऐसा क्या कर दिया था कि उन्होंने इतनी बेरहमी से उसे पीटा कि उसकी मौत हो गई?’