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इस्तीफ़े के पहले राज्यसभा में मायावती ने क्या कहा?

बसपा प्रमुख मायावती ने यह कहते हुए राज्यसभा से इस्तीफ़ा दे दिया है कि उन्हें दलितों से जुड़े मुद्दे उठाने का समय नहीं दिया जा रहा है. पढ़िए सदन में उनका पूरा भाषण…

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फोटो: पीटीआई

माननीय उपसभापित जी, चूंकि यह इम्पॉर्टेन्ट मामला है, इसलिए तीन मिनट से काम नहीं चलेगा. मुझे कम-से-कम 5 से 10 मिनट बोलने का मौका दिया जाए. (व्यवधान…) माननीय उपसभापित जी, जब से केंद्र में बीजेपी व इनकी एनडीए की सरकार बनी है…(व्यवधान…) चूंकि यह इम्पॉर्टेन्ट मामला है, इसलिए तीन मिनट से काम नहीं चलेगा. मुझे कम-से-कम 5 से 10 मिनट बोलने का मौका दिया जाए. (व्यवधान…)

माननीय उपसभापित जी, जब से केंद्र में बीजेपी व एनडीए की सरकार बनी है…(व्यवधान…) तब से पूरे देश में, और खास कर बीजेपी शासित राज्यों में तो इन्होंने अपनी जातिवादी (व्यवधान…) कृपया आप लोग मुझे अपनी बात रखने दीजिए.

मान्यवर, जब से केंद्र में बीजेपी व एनडीए की सरकार बनी है…(व्यवधान…) तब से पूरे देश में, और खास कर बीजेपी शासित राज्यों में तो इन्होंने अपनी जातिवादी, संप्रदायी व पूंजीवादी मानसिकता के तहत चल कर, अपने राजनीतिक स्वार्थ में व अपने नफे-नुकसान को भी सामने रख कर (व्यवधान…) जहां विशेषकर गरीबों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, मजदूरों, किसानों एवं मध्यम वर्ग के लोगों के साथ जो बड़े पैमाने पर उत्पीड़न व शोषण किया है…(व्यवधान…)

इन लोगों के साथ जो बड़े पैमाने पर उत्पीड़न व शोषण आदि किया है, जो अभी भी लगातार जारी है, वह किसी से छिपा हुआ नहीं है और इस संदर्भ में मैं पूरे सदन का ध्यान, उत्तर प्रदेश में बीजेपी व इनकी सरकार द्वारा एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश व स्वार्थ के तहत वहां जिला सहारनपुर के सब्बीरपुर ग्राम में कराए गए दलित उत्पीड़न कांड की तरफ दिलाना चाहती
हूं…(व्यवधान…)

जिस पर पर्दा डालने के लिए बाद में फिर इन्होंने एक दलित संगठन को भी इस्तेमाल करके इसे जातीय हिंसा का रंग दिया है…(व्यवधान…) जबकि इस कांड की सच्चाई यह है कि इस वर्ष 14 अप्रैल को परम पूज्य बाबा साहेब डा. आंबेडकर की जयंती थी और जयंती के मौके पर सब्बीरपुर ग्राम के दलित वर्ग के जो लोग थे, उन्होंने जुलूस निकालने का फैसला लिया और वहां पर
एक संत रविदास मंदिर है, इस मौके पर उस मंदिर के चबूतरे में बाबा साहेब की प्रतिमा लगाने का भी फैसला लिया था.(व्यवधान…)

लेकिन वहां के जो संबंधित अधिकारी थे, उन्होंने न तो उनको जुलूस निकालने की परमिशन दी और न प्रतिमा रखने की परमिशन दी. (व्यवधान…) लेकिन वहां के दलित वर्ग के लोग ने तो…(समय की घंटी)… सर, मुझे अपनी पूरी बात तो रखने
दीजिए…(व्यवधान…)

(उपसभापित ने कहा, आपके तीन मिनट पूरे हो गए… व्यवधान…)

(उपसभापति ने कहा कि आपको तीन मिनट में बोलना था और तीन मिनट पूरे हो गए… व्यवधान…)

सवाल 3 मिनट का नहीं है, मामला गंभीर है. (व्यवधान…) माननीय उपसभापित जी, वहां दलित वर्ग के थे, सब्बीरपुर गांव के, तो उन्होंने अधिकारियों की बात मानकर न तो जुलूस निकाला और न ही प्रतिमा रखी. उन्होंने अधिकारियों की बात मान ली. 14 अप्रैल के बाद अगले महीने फिर 5 मई को महाराणा प्रताप की जयंती के मौके पर उनके अनुयायी लोग वहां पर जुलूस निकाल रहे थे. वहां के दिलत वर्ग के लोगों ने जो अनुयायी लोग थे, उनको… (व्यवधान…)

(उपसभापित: मैंने कहा है कि तीन मिनट बोलना है… बैठिए… व्यवधान…)

जब मेरी बात पूरी नहीं होगी तो मैं करूंगी क्या? यह ठीक नहीं है. मुझे पूरी बात तो कहने दो. (व्यवधान…)

आप तीन मिनट की बात कैसे कह सकते हैं, यह ज़ीरो ऑवर नहीं है. (व्यवधान…)

नहीं नहीं, यह जीरो हॉवर नहीं है. मेरी बात पूरी होने दो… यह ऐसे कैसे हो जाएगा? (व्यवधान…) अगर आप मुझे
बोलने नहीं देंगे तो मैं आज ही सदन से इस्तीफा देती हूं. (व्यवधान…)

जब मैं सदन में अपनी बात नहीं रख सकती तो मैं आज ही इस्तीफा देना चाहती हूं. (व्यवधान…)

मुझे मेरी बात नहीं रखने दे रहे हैं… क्या फायदा है यहां राज्यसभा में रहने का, मैं आज ही इस्तीफा देती हूं..(व्यवधान…) मुझे इस हाउस में रहने का कोई अधिकार नहीं है. (व्यवधान…)
जिस समाज से मैं ताल्लुक रखती हूं, यदि मैं अपने समाज के हित की बात हाउस में नहीं रख सकती तो मुझे हाउस में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. (व्यवधान…)

(इसके बाद मायावती समेत कुछ और सदस्य सदन से वॉक आउट कर गए)