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कोविड-19 वैक्सीन का न्यायसंगत और समान वितरण एक बड़ी चुनौती: सौम्या स्वामीनाथन

डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने एक सम्मेलन में कहा कि कोविड-19 वैक्सीन को दुनियाभर में न्यायसंगत तरीके से बांटना चुनौतीपूर्ण होगा. यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी देशों में समान वितरण हो, न कि किसी अमीर देश के पास ही अधिकाधिक वैक्सीन पहुंच जाएं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या विश्वनाथन. (फोटो: यूट्यूब)

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन. (फोटो: यूट्यूब)

बेंगलुरू: विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने बुधवार को कहा कि कोविड-19 के टीके का दुनियाभर में न्यायसंगत तरीके से वितरण बड़ी चुनौती साबित होगा.

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना होगा कि टीके के अधिक से अधिक डोज अमीर देशों के पास न चले जाएं और इनका पूरी दुनिया में समान वितरण हो.

नोवेल कोरोना वायरस के लिए टीके के विकास के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘हमें 2021 की शुरुआत तक कुछ अच्छी खबर मिल जानी चाहिए.’

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की पूर्व महानिदेशक स्वामीनाथन ने कहा कि इसके बाद बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि अमीर देश सीमित मात्रा में उपलब्ध टीकों के अधिकाधिक डोज न ले लें तथा इन टीकों का पूरी दुनिया में मापन, वितरण तथा आवंटन न्यायसंगत तरीके से हो.

उन्होंने भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), बेंगलुरू में सार्वजनिक नीति केंद्र द्वारा ‘सार्वजनिक नीति एवं प्रबंधन’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही. आईआईएम बेंगलुरू ने एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी.

स्वामीनाथन ने कहा कि टीके के मामले में भारत अच्छी स्थिति में है क्योंकि यहां इस दिशा में कई कंपनियां काम कर रही हैं जिनमें कुछ अपने स्तर से तो कुछ साझेदारी में काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत टीकों के उत्पादन का केंद्र है.

उन्होंने कहा कि महामारी ने असमानताओं को बढ़ाया है और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने तथा लचीलापन बढ़ाने के लिहाज से सीखने का अवसर साबित हुआ है.

स्वामीनाथन के हवाले से आईआईएम, बेंगलूर के वक्तव्य में बताया गया कि वायरस का निदान, उपचार, व्यवहार तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, संक्रमण, टीका विकास और स्कूल बंद रहने के बीच बच्चों पर महामारी के प्रभाव से निपटने में वैश्विक साझेदारी की जरूरत पर ध्यान देना होगा.

साथ ही उन्होंने कहा, ‘महामारी के दूसरे दौर में मृत्यु दर नहीं बढ़ रही है.’