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भीमा कोरेगांव: सुधा भारद्वाज की बेटी ने कहा, जेल में हुए तनाव से मां को हुई दिल की बीमारी

भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ़्तार सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक सुधा भारद्वाज की बेटी ने बताया है कि जेल से मिली उनकी मां की मेडिकल रिपोर्ट में उन्हें हृदय संबंधी बीमारी से ग्रस्त बताया गया है, जो जेल जाने से पहले उन्हें नहीं थी. सुधा भारद्वाज के परिवार और सहयोगियों ने उनकी रिहाई पर जल्द सुनवाई की मांग की है.

वकील और सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज. (फोटो: द वायर)

वकील और सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज. (फोटो: द वायर)

नई दिल्ली: भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार की गईं वकील-कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज की बेटी ने बीते मंगलवार को एक प्रेस नोट जारी कर दावा किया कि जेल में हुए ‘तनाव के कारण’ उनकी मां को दिल की बीमारी हो गई है.

स्क्रॉल के मुताबिक, कार्यकर्ता की बेटी मायशा भारद्वाज ने 23 जुलाई की जेल के एक मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि उनकी मां ‘इस्केमिक हार्ट डिजीज’ से पीड़ित हैं, जो दिल की धमनियों के संकुचित होने के कारण होता है. इसके चलते हृदय में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है और दिल का दौरा पड़ सकता है.

बेटी ने कहा कि जेल जाने से पहले उनकी मां को कभी भी इस तरह हृदय रोग से जुड़ी कोई शिकायत नहीं थी.

भारद्वाज ने कहा, ‘जेल से प्राप्त मेडिकल रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं होता है कि इस बीमारी का कब पता चला और किस आधार पर इसका पता लगाया गया है. इस अनिश्चितता और उनके स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जानकारी नहीं दिए जाने के कारण पूरा परिवार बहुत चिंतित है.’

बेटी ने बताया कि सुधा भारद्वाज पहले से ही डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और टीबी से पीड़ित रही हैं. उन्होंने कहा, ‘ऐसी स्वास्थ्य स्थिति के कारण उनमें कोविड-19 संक्रमण होने का खतरा बहुत अधिक है. इस महामारी के समय एक-एक दिन बिताना असुरक्षित है. न्यायिक प्रक्रिया में इस तरह की देरी अविवेकपूर्ण है.’

मायशा भारद्वाज के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों, दोस्तों और सहयोगियों ने सुधा भारद्वाज की रिहाई के लिए जल्द से जल्द निर्णायक सुनवाई की मांग की है.

प्रेस रिलीज में कहा गया है, ‘जमानत देने से इनकार करते हुए दो साल से जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में रखना और मुकदमा शुरू करने की कोशिश के बजाय उन्हें गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में रखना कैदियों के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है. जेलों में भीड़ की स्थिति को देखते हुए महामारी के समय यह और चिंताजनक है’

मालूम हो कि बीते मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया था कि वे भारद्वाज, आनंद तेलतुम्बड़े और वर्नोन गोन्साल्विस की हालिया रिपोर्ट को उनके परिवार, वकील और राष्ट्रीय जांच एजेंसी को दिया जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को है.

मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाली वकील सुधा भारद्वाज ने करीब तीन दशकों तक छत्तीसगढ़ में काम किया है. सुधा पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की राष्ट्रीय सचिव भी हैं.

उन्हें अगस्त 2018 में पुणे पुलिस द्वारा जनवरी 2018 में भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा और माओवादियों से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

उन पर हिंसा भड़काने और प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के लिए फंड और मानव संसाधन इकठ्ठा करने का आरोप है, जिसे उन्होंने बेबुनियाद बताते हुए राजनीति से प्रेरित कहा था.

पिछले साल मार्च महीने में सुधा भारद्वाज को हार्वर्ड लॉ स्कूल की ओर से सम्मानित किया गया था. उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कॉलेज के पोर्ट्रेट एक्ज़िबिट (फोटो प्रदर्शनी) में जगह दी गयी थी.

हार्वर्ड द्वारा इस प्रदर्शनी में दुनिया भर से कानून के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाली महिलाओं को शामिल किया जाता है.