राजनीति

कांग्रेस अगले 50 साल तक विपक्ष में रहना चाहती है तो पार्टी के भीतर चुनाव की ज़रूरत नहीं: आज़ाद

कांग्रेस में व्यापक बदलाव और पूर्णकालिक पार्टी अध्यक्ष चुनने की मांग को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वालों में से एक जितिन प्रसाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर लखीमपुर खीरी ज़िला इकाई ने प्रस्ताव पारित किया है. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा है कि कांग्रेस को अपने लोगों पर नहीं, बल्कि भाजपा पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की ज़रूरत है.

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, जितिन प्रसाद और गुलाम नबी आजाद. (फोटो: पीटीआई/फेसबुक)

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, जितिन प्रसाद और गुलाम नबी आजाद. (फोटो: पीटीआई/फेसबुक)

नई दिल्ली/लखनऊ: कांग्रेस में व्यापक बदलाव और पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग को लेकर सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र से पैदा विवाद अभी थमता नहीं दिख रहा है.

पार्टी में उस वक्त सियासी तूफान आ गया था, जब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग को लेकर सोनिया गांधी को 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई थी.

इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की पार्टी इकाई ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के विशेष आमंत्रित सदस्य जितिन प्रसाद के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित कर दिया, जिस पर पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

कपिल सिब्बल ने उत्तर प्रदेश की लखीमपुर खीरी की जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से जितिन प्रसाद के खिलाफ कार्रवाई की मांग से जुड़ी खबर की पृष्ठभूमि में बीते गुरुवार को कहा कि पार्टी को अपने लोगों पर नहीं, बल्कि भाजपा पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने की जरूरत है.

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रसाद को ‘आधिकारिक तौर पर निशाना बनाया जाना’ दुर्भाग्यपूर्ण है.

सिब्बल के अलावा पार्टी के भीतर बदलाव और पूर्णकालिक अध्यक्ष चुनने को लेकर पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने यहां तक कह दिया है कि अगर मेरी पार्टी अगले 50 साल तक विपक्ष में रहना चाहती है, तो पार्टी के भीतर चुनाव की कोई जरूरत नहीं है.

कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, ‘दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश में जितिन प्रसाद को आधिकारिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है. कांग्रेस को अपने लोगों पर नहीं, बल्कि भाजपा को सर्जिकल स्ट्राइक से निशाना बनाने की जरूरत है.’

उनके इस ट्वीट से परोक्ष रूप से सहमति जताते हुए कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट किया, ‘भविष्यदर्शी.’

खबरों के मुताबिक, लखीमपुरी खीरी कांग्रेस कमेटी ने पांच प्रस्ताव पारित किए हैं, जिनमें से एक में मांग की गई है कि जितिन प्रसाद के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

गौरतलब है कि कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी और जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने कांग्रेस के संगठन में व्यापक बदलाव, सामूहिक नेतृत्व और पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग को लेकर हाल ही में सोनिया गांधी को पत्र लिखा था, जिसे लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था.

कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में इस पत्र को लेकर हंगामा होने के दो दिन बाद बुधवार को पार्टी की लखीमपुर खीरी इकाई ने बुधवार को एक आपात बैठक बुलाकर प्रसाद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया.

पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रह्लाद पटेल ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं की इस प्रस्ताव में आलोचना की गई है, लेकिन इसमें प्रसाद को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है. दरअसल, पत्र को कांग्रेस में कई लोग सोनिया के नेतृत्व को चुनौती के रूप में देख रहे हैं.

पटेल के अनुसार प्रस्ताव में कहा गया है, ‘उत्तर प्रदेश से पत्र पर केवल पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने हस्ताक्षर किए हैं. उनका पारिवारिक इतिहास गांधी परिवार के खिलाफ रहा है और उनके पिता जितेंद्र प्रसाद भी सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़े थे. उसके बावजूद सोनिया गांधी ने जितिन प्रसाद को टिकट दिया, उन्हें सांसद और मंत्री बनाया.’

प्रस्ताव के अनुसार, जितिन प्रसाद द्वारा किया गया कृत्य घोर अनुशासनहीनता है तथा जिला एवं शहर कांग्रेस इकाइयों का मानना है कि उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए.

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘सोनिया गांधी पार्टी की एकमात्र सर्वमान्य नेता हैं. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर हम पूर्ण विश्वास रखते हैं. यदि परिवर्तन होता है तो राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए.’

जिला इकाई ने इस पत्र को पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ करार देते हुए कहा कि यह संकेत देता है कि इस पर हस्ताक्षर करने वालों का सोनिया गांधी और कांग्रेस में विश्वास नहीं है. जिला इकाई ने उन पर भाजपा की तरफ से काम करने का आरोप लगाया.

जिला कांग्रेस कमेटी ने सोनिया गांधी को एक पत्र भेज कर इस प्रस्ताव के बारे में अवगत कराया है.

इस बीच प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर सहित कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाने संबंधी एक कथित ऑडियो भी सामने आया है, जिसके बारे में पूछने पर जिलाध्यक्ष प्रह्लाद पटेल ने कहा, ‘आईटी सेल वाले लड़के सब तोड़ मरोड़कर बना लेते हैं. जब एक निंदा प्रस्ताव हुआ है तो हुआ है.’

इस ऑडियो के बारे में पूछे जाने पर गुर्जर ने कहा, ‘इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद हमें इसकी जानकारी मिली. इससे पहले इस संदर्भ में लखीमपुर खीरी के जिला कांग्रेस अध्यक्ष से मेरी कोई बात नहीं हुई.’

प्रस्ताव के बारे में जितिन प्रसाद का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया.

दिल्ली में कार्य समिति की बैठक होने से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और प्रदेश कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने एक बयान जारी कर कहा था कि इस पत्र के पीछे जो भी लोग हैं, वे पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.

कांग्रेस राज्य में उसे अध्यक्ष नियुक्त कर रही है, जो दिल्ली आता-जाता रहता है: आज़ाद 

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बगावती पत्र लिखने वाले नेताओं में से एक गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस कार्य समिति और पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों जैसे प्रमुख पदों के लिए चुनाव कराने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा हो सकता है कि नियुक्त किए जाने वाले कांग्रेस अध्यक्ष को पार्टी में एक फीसदी का भी समर्थन न मिले. उन्होंने ये भी कहा कि जो इस बात का विरोध कर रहे हैं, उन्हें अपना पद गंवाने का डर है.

आजाद ने कहा है कि यदि पार्टी के भीतर चुनाव नहीं होते हैं तो कांग्रेस को 50 सालों तक विपक्ष में बैठना होगा.

गुलाम नबी आजाद ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘जब आप चुनाव लड़ते हैं तो कम से कम 51 प्रतिशत आपके साथ होते हैं, और आप पार्टी के भीतर केवल 2 से 3 लोगों के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं. 51 प्रतिशत वोट पाने वाले व्यक्ति का चुनाव किया जाएगा. अन्य को 10 या 15 फीसदी वोट मिलेंगे. जो व्यक्ति जीतता है और अध्यक्ष पद का प्रभार प्राप्त करता है, इसका मतलब है कि 51 प्रतिशत लोग उसके साथ हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘चुनाव का यही लाभ है कि जब आप चुनाव लड़ते हैं तो कम से कम आपकी पार्टी के 51 फीसदी सदस्य आपके साथ होते हैं. अभी के समय में जो व्यक्ति अध्यक्ष बनता है, उसके पास शायद एक प्रतिशत भी समर्थन नहीं होता है. यदि कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य चुने जाते हैं तो उन्हें हटाया नहीं जा सकता. तो समस्या क्या है?’

इस बात पर जोर देते हुए कि चुनाव से पार्टी की नींव मजबूत होती है आजाद ने कहा, ‘बाकी के लोग जो दूसरे, तीसरे या चौथे पर आएंगे वे अपने कार्य से पार्टी को मजबूत करेंगे और अगले मौके पर जीत हासिल कर सकेंगे, लेकिन इस समय जो अध्यक्ष चुने जाते हैं, उन्हें पार्टी के 1 प्रतिशत कार्यकर्ताओं का भी समर्थन प्राप्त नहीं होता है.’

पार्टी के भीतर चुनाव नहीं कराने के परिणामों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ‘राज्य में उसे पार्टी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त’ कर रही है जो दिल्ली आता-जाता रहता है और जिसकी पार्टी के बड़े नेताओं द्वारा सिफारिश की जाती है.

आजाद का बयान ऐसे समय पर आया है जब बीते 24 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में फैसला लिया गया कि सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी और अगले छह महीने में पार्टी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘हमें यह भी नहीं पता कि ऐसे व्यक्तियों को 1 प्रतिशत या 100 प्रतिशत समर्थन प्राप्त है. कई ऐसे हैं जिनके पास 1 प्रतिशत समर्थन भी नहीं है. यह पार्टी नेतृत्व के लिए राज्य, जिले, सीडब्ल्यूसी चुनावों में होता है. एक नियुक्त व्यक्ति को हटाया जा सकता है लेकिन एक निर्वाचित व्यक्ति को हटाया नहीं जा सकता है. इसमें गलत क्या है.’

आजाद ने चुनाव का विरोध करने वाले नेताओं की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग वफादार होने का दावा कर रहे हैं, दरअसल वे ओछी राजनीति कर रहे हैं और पार्टी तथा राष्ट्र के हितों के लिए हानिकारक हैं.

चुनाव का विरोध करने वालों पर हमला बोलते हुए राज्यसभा सदस्य गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘जो पदाधिकारी या राज्य इकाई के अध्यक्ष या ब्लॉक या जिला अध्यक्ष हमारे प्रस्ताव के खिलाफ हैं, वे जानते हैं कि चुनाव में वे कहीं के नहीं रहेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘जो भी वास्तव में कांग्रेस के प्रति ईमानदार है, वह इस पत्र का स्वागत करेगा. मैंने कहा है कि राज्य, जिला और ब्लॉक में पार्टी का अध्यक्ष पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा चुना जाना चाहिए.’

वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने आगे कहा, ‘अगर मेरी पार्टी अगले 50 साल तक विपक्ष में रहना चाहती है, तो पार्टी के भीतर चुनाव की कोई जरूरत नहीं है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)