राजनीति

नेतृत्व परिवर्तन की मंशा से नहीं लिखा पत्र, ग़लत अर्थ निकाला गया: जितिन प्रसाद

कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इसे लिखने का मक़सद नेतृत्व को कमतर दिखाना नहीं था. इसे बस यह सुझाव देने के इरादे से लिखा गया था कि कैसे पार्टी को फिर से खड़ा किया जाए और मज़बूती दी जाए.

कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद. (फोटो साभार: फेसबुक/@/jitinprasada1)

कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद. (फोटो साभार: फेसबुक/@/jitinprasada1)

नई दिल्ली: कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव और पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने शनिवार को कहा कि इस पत्र का गलत मतलब निकाला गया और उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में पूरा विश्वास है.

प्रसाद ने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में यह भी कहा कि यह पत्र कभी भी नेतृत्व परिवर्तन की मंशा से नहीं लिखा गया.

पत्र पर हस्ताक्षर करने के कारण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पत्र यह सुझाव देने के मकसद से लिखा गया कि कैसे पार्टी को फिर से खड़ा किया जाए और मजबूती दी जाए तथा संगठन को प्रेरित करने के लिए आत्ममंथन किया जाए.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘इस पत्र का मकसद नेतृत्व को कमतर दिखाना नहीं था. मैंने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में भी यह कहा था. इस पत्र का गलत मतलब निकाला गया.’

पत्र के माध्यम से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को चुनौती देने से जुड़े आरोपों पर प्रसाद ने कहा, ‘मुझे सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व पर पूरा विश्वास है और उन्हें मुझमें पूरा विश्वास है.’


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उन्होंने यह टिप्पणी उस वक्त की है जब पत्र से जुड़े विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की कांग्रेस कमेटी पिछले दिनों प्रस्ताव पारित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

गौरतलब है कि नेताओं के पत्र को लेकर हंगामा होने के दो दिन बाद बुधवार को कांग्रेस की लखीमपुर खीरी इकाई ने एक आपात बैठक बुलाकर प्रसाद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया.

पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रह्लाद पटेल ने के अनुसार प्रस्ताव में कहा गया था कि जितिन प्रसाद द्वारा किया गया कृत्य घोर अनुशासनहीनता है तथा जिला एवं शहर कांग्रेस इकाइयों का मानना है कि उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए.

जिला इकाई ने उन पर भाजपा की तरफ से काम करने का आरोप भी लगाया था.

प्रसाद ने इस बारे में कहा कि स्थानीय स्तर के प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा उकसाने पर इस तरह का प्रस्ताव पारित किया गया होगा.

उनके अनुसार, ‘हर लोकतांत्रिक पार्टी में इस तरह के छोटे-मोटे मामले होते हैं और यह स्थानीय स्तर के प्रतिद्वंद्वी गुटों के उकसावे का नतीजा भी हो सकता है. मुझे किसी से कोई गिला नहीं है क्योंकि हर कोई कांग्रेस परिवार का हिस्सा है.’

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि मामला खत्म हो गया है अैर हमें सत्तापक्ष से लड़ाई पर ध्यान केंद्रित करना है.’

इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि पार्टी को अपने लोगों पर नहीं, बल्कि भाजपा पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने की जरूरत है.

उन्होंने यह भी कहा था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रसाद को ‘आधिकारिक तौर पर निशाना बनाया जाना’ दुर्भाग्यपूर्ण है.


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अब प्रसाद ने लखीमपुरी खीरी के जिला कांग्रेस अध्यक्ष के उस कथित ऑडियो पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि उनके खिलाफ प्रस्ताव अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार पारित किया गया.

उन्होंने कहा, ‘मैं अपुष्ट खबरों पर टिप्पणी नहीं करता.’ प्रसाद ने इस बात पर जोर दिया कि अब बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के चुनाव आने वाले हैं तथा ‘हमें पूरी ऊर्जा सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने पर लगानी है.’

पिछले दिनों गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और प्रसाद समेत कांग्रेस के 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव और पूर्णकालिक एवं सक्रिय अध्यक्ष की मांग की थी.

उनके इस पत्र को पार्टी के भीतर कई लोगों ने कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती देने के तौर पर लिया.

इस पत्र से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि में ही 24 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति की लंबी बैठक हुई थी, जिसमें फैसला लिया गया कि सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी और अगले छह महीने में पार्टी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा.

हालांकि इसके बाद पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि ‘सीडब्ल्यूसी ने संज्ञान लिया कि पार्टी के अंदरूनी मामलों पर विचार-विमर्श मीडिया या सार्वजनिक पटल पर नहीं किया जा सकता. सीडब्लूसी ने सबको राय दी कि पार्टी से संबंधित मुद्दे पार्टी के मंच पर ही रखे जाएं, ताकि उपयुक्त अनुशासन भी रहे और संगठन की गरिमा भी.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)