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दिल्ली: तीसरे रिंग रोड के लिए 17,000 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव

दिल्ली की तीसरी रिंग रोड और हरियाणा को जोड़ने वाली दो सड़कों को बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा शहरी विस्तार सड़क-दो विकसित की जा रही है. परियोजना सलाहकार द्वारा तैयार पर्यावरण प्रभाव आकलन मसौदे के मुताबिक यह सड़क 9.28 हेक्टेयर के संरक्षित वन क्षेत्र से होकर गुज़रेगी.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली की तीसरी रिंग रोड और हरियाणा को जोड़ने वाली दो सड़कों के लिए रास्ता बनाने के लिए संरक्षित वन क्षेत्र में मौजूद पेड़ों सहित करीब 17,000 पेड़ों को काटने की आवश्यकता होगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को सौंपे गए पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) के मसौदे की रिपोर्ट में यह बात कही गई है.

शहरी विस्तार सड़क-दो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा विकसित की जा रही है. परियोजना सलाहकार द्वारा तैयार की गई ईआईए मसौदे के मुताबिक यह सड़क 9.28 हेक्टेयर के संरक्षित वन क्षेत्र से होकर भी गुजर रही है.

38 किलोमीटर के इस खंड को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 344-एम के रूप में वर्गीकृत किया गया है और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा शहर में ट्रैफिक को कम करने के लिए दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के हिस्से के रूप में प्रस्तावित किया गया था.

ईआईए मसौदे में कहा गया, ‘राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते दिल्ली न केवल दिल्ली के भीतर बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी मात्रा में यातायात का सामना करती है. इस क्षेत्रीय यातायात को पूरा करने के लिए 1962 में इनर और आउटर रिंग सड़कों की योजना बनाई गई थी, जिनमें से केवल आंतरिक रिंग रोड को पूरा किया जा सका, जबकि बाहरी रिंग रोड अभी भी पूर्ण रिंग नहीं है.’

मसौदे में आगे कहा गया, ‘उत्तर-भारतीय राज्यों से गैर-दिल्ली यातायात के लिए वैकल्पिक नेटवर्क न होने के कारण दिल्ली से गुजरना पड़ता है. इससे मौजूदा रिंग सड़कों पर भारी भीड़ हो जाती है. इस समस्या को दूर करने और दिल्ली को और अधिक मजबूत बनाने के लिए डीडीए ने मास्टर प्लान 2021 के तहत शहरी विस्तार रोड -2 प्रस्तावित किया.’

दस्तावेज में कहा गया है कि राजमार्ग उत्तर में बांकोली गांव से शुरू होकर नरेला, बवाना, नांगलोई, नजफगढ़ और कापसहेड़ा से होकर गुजरते हुए दक्षिण पश्चिम में शहर के द्वारका सेक्टर-24 के पास खत्म होगा.

इसमें दोहरी थ्री-लेन कैरिजवे और थ्री-लेन चौड़ी सर्विस रोड के साथ-साथ पैदल चलने वालों के लिए रास्ता और साइकिल ट्रैक का प्रावधान शामिल होगा.

हरियाणा के सोनीपत जिले में बड़वासनी बाईपास और हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में राजमार्ग को जोड़ने वाली दो सड़कें भी प्रस्तावित हैं.

दस्तावेज में कहा गया है कि संरक्षित वन भूमि के 9.28 हेक्टेयर क्षेत्र को परियोजना के लिए डायवर्ट करना होगा और वन विभाग द्वारा वन भूमि घोषित किए जाने के बाद परियोजना के तहत प्रभावित वन क्षेत्र में वृद्धि हो सकती है. परियोजना के लिए वन क्षेत्र सहित लगभग 17,000 पेड़ों को काटने की आवश्यकता होगी.

दस्तावेज में आगे कहा गया कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 और स्थानीय वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत अनुमति प्राप्त करने के बाद ही पेड़ों को गिराया जाएगा.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शनिवार तक परियोजना के लिए पेड़ों को काटने के संबंध में दिल्ली वन विभाग के मुख्यालय में कोई आवेदन नहीं आया था.

पेड़ों को काटने के लिए मंजूरी मांगे जाने के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी उदीप सिंघल ने कहा कि ये समानांतर गतिवधियां होती हैं.

ईआईए के मसौदे में उल्लेख किया गया है कि इन 17,000 पड़ों में से कुछ प्रमुख प्रजातियों में पीपल, नीम, खजूर, सेमल और जामुन शामिल हैं. प्रत्येक पेड़ काटने के बदल में 10 पेड़ लगाए जाएंगे और इस तरह लगभग 1,70,000 पेड़ों का रोपण प्रस्तावित है.

इसमें कहा गया है कि 224 निजी संपत्तियां परियोजना से प्रभावित होंगी जिसके तहत 794 व्यक्ति प्रभावित होंगे. इसके समाधान के लिए 1,272 करोड़ रुपये की पुनर्वास योजना तैयार की गई है.