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भ्रष्ट या अक्षम कर्मचारियों को हटाने के लिए केंद्र ने विभागों से समीक्षा करने को कहा

कार्मिक मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों के प्रदर्शन की समय-समय पर समीक्षा के लिए निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें सेवा में बनाए रखा जाना चाहिए या समय से पहले सेवानिवृत्त कर देना चाहिए.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने अपने सभी विभागों से नौकरी में 30 साल पूरे कर चुके कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा कर अक्षम या भ्रष्ट कर्मचारियों को चिह्नित करने और उन्हें जनहित में समय से पहले सेवानिवृत्त करने को कहा है. कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में यह कहा गया है.

केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के मौलिक नियम (एफआर) 56 (जे) और 56 (आई) तथा नियम 48 (1)(बी) के तहत कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन की समीक्षा की जाती है जो उचित प्राधिकार को किसी सरकारी सेवक को जनहित में आवश्यक लगने पर सेवानिवृत्त करने का ‘संपूर्ण अधिकार’ देता है.

बीते 28 अगस्त को जारी आदेश में कहा गया है, ‘स्पष्ट है कि इन नियमों के तहत सरकारी सेवकों को समय पूर्व सेवानिवृत्ति देना सजा नहीं है. यह ‘अनिवार्य सेवानिवृत्ति’ से अलग है जो केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के तहत निर्दिष्ट शास्तियों या सजाओं में से एक है.’

आदेश के अनुसार, सरकार किसी सरकारी कर्मचारी की आयु 50/55 वर्ष होने या 30 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद किसी भी समय जनहित में उसे समय पूर्व सेवानिवृत्त कर सकती है.

मंत्रालय ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के प्रदर्शन की समय-समय पर समीक्षा के लिए निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें सेवा में बनाए रखा जाना चाहिए या समय से पहले सेवानिवृत्त कर देना चाहिए.

मौजूदा आदेशों में बेहतर स्पष्टता लाने और एकसमान कार्यान्वयन को सक्षम करने के लिए नवीनतम आदेश जारी किया गया है.

मंत्रालय ने केंद्र सरकार के सभी विभागों के सचिवों को जारी आदेश में कहा, ‘इस विषय पर अब तक जारी दिशानिर्देशों की समीक्षा, समेकन और पुनरावृत्ति करने का प्रयास किया गया है.’

 

कार्मिक मंत्रालय ने सभी विभागों से कर्मचारियों की समीक्षा करने के लिए एक रजिस्टर बनाए रखने के लिए भी कहा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)