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महाराष्ट्र: कोरोना संक्रमित पत्रकार की मौत, परिवार का आरोप- इलाज में देरी से हुई मौत

महाराष्ट्र के पुणे में एक निजी समाचार चैनल में काम करने वाले पत्रकार के परिवार का आरोप है कि अहमदनगर के निजी अस्पताल ने 40,000 रुपये एडवांस जमा कराने तक उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया था. अगर उन्हें समय पर इलाज मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी. महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

पत्रकार पांडुरंग रायकर. (फोटो साभारः फेसबुक)

पत्रकार पांडुरंग रायकर. (फोटो साभारः फेसबुक)

पुणेः महाराष्ट्र के पुणे में एक टीवी पत्रकार की बुधवार को कोरोना वायरस से मौत हो गई. टीवी9 समाचार चैनल में काम करने वाले पत्रकार पांडुरंग रायकर एक निजी अस्पताल में भर्ती थे और आरोप है कि एडवांस रुपये जमा कराने को लेकर इलाज में देरी से उनकी मौत हो गई.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार ने पत्रकार की मौत की जांच के आदेश दे दिए हैं.

42 वर्षीय पत्रकार पांडुरंग रायकर को मंगलवार शाम अहमदनगर के एक निजी अस्पताल से पुणे के जंबो अस्पताल लाया गया था. उनकी बुधवार सुबह मौत हो गई.

बीते 14 सालों से पत्रकारिता कर रहे पांडुरंग रायकर के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं.

उनके परिवार का आरोप है कि अहमदनगर के एक निजी अस्पताल ने 40,000 रुपये एडवांस जमा कराने तक उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं किया.

मृतक के करीबी संबंधी कुणाल जयकर का कहना है कि 22 अगस्त को पुणे में उनका स्वैब टेस्ट हुआ था. टेस्ट निगेटिव आया था. इसके बाद पांडुरंग ने आराम करने की सोची और अहमदनगर अपने घर आ गए.

कुणाल कहते हैं, ‘29-30 अगस्त को उनकी तबियत बिगड़ी. 31 अगस्त को उन्हें अहमदनगर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें कोरोना टेस्ट कराने को कहा गया. अस्पताल ने कहा कि वह कोरोना टेस्ट नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास कोरोना किट खत्म हो गई है.’

कुणाल कहते हैं, ‘इसके बाद पत्रकार को कोपारगांव से कुछ किलोमीटर की दूरी पर कोविड केयर सेंटर ले जाया गया, जहां उनका रैपिड एंटीजन टेस्ट हुआ, जिसमें उनके कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई.’

इसके बाद पत्रकार और उनकी पत्नी वापस अहमदनगर स्थित निजी अस्पताल पहुंचे.

वह कहते हैं, ‘इस दौरान पांडुरंग को बेचैनी और सांस लेने में दिक्कत होने लगी, इसलिए उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी था, लेकिन निजी अस्पताल ने उन्हें 40,000 रुपये एडवांस जमा करने तक भर्ती करने से मना कर दिया.’

कुणाल का कहना है कि जिला कलेक्टर और तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद पांडुरंग को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया.

उन्होंने कहा, ‘हालांकि इसमें दो घंटे लग गए. इस दौरान उनकी तबियत और बिगड़ गई. इस बीच अस्पताल द्वारा उन्हें कोई इलाज या दवाई नहीं दी गई.’

वह कहते हैं कि अगर उन्हें समय पर इलाज मिल जाता तो वह बच जाते.

कुणाल ने कहा कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद पांडुरंग की तबियत बिगड़ी. इसके बाद उनके परिवार ने उन्हें मंगलवार दोपहर को पुणे में शिफ्ट कराने पर विचार किया.

उन्होंने कहा, ‘उन्हें उसी दिन रात लगभग 8:30 बजे एंबुलेंस से पुणे के जंबो अस्पताल लाया गया और बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई.’

अहमदनगर के जिला कलेक्टर राहुल द्विवेदी का कहना है, ‘जहां तक मुझे जानकारी है कि मैंने अस्पताल को मरीज को तुरंत भर्ती करने के निर्देश दिए थे. परिवार के अस्पताल द्वारा एडवांस भुगतान की मांग के आरोपों की हम जांच कर रहे हैं.’