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साल 2019 में 42,480 किसानों और दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की: एनसीआरबी

साल 2018 के मुकाबले किसानों की आत्महत्या में मामूली गिरावट आई है, जबकि दिहाड़ी कामगारों की आत्महत्या में आठ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: साल 2019 में 42,480 किसानों और दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नई रिपोर्ट से ये जानकारी सामने आई है.

इससे पिछले साल 2018 के मुकाबले किसानों की आत्महत्या में मामूली गिरावट आई है, जबकि दिहाड़ी कामगारों की आत्महत्या में आठ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में 10,281 किसानों ने आत्महत्या की, जो कि साल 2018 में 10,357 किसान आत्महत्या के मुकाबले बहुत थोड़ा ही कम है.

वहीं 2019 में 32,559 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की, जो कि 2018 में आत्महत्या किए 30,132 कामगारों के मुकाबले आठ फीसदी अधिक है.

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में कुल आत्महत्या मामलों में 7.4 फीसदी हिस्सेदारी कृषि क्षेत्र की है, जहां 5,957 किसानों और 4,324 कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की है.

साल 2019 में कुल 5,563 पुरुष किसानों और 394 महिला किसानों ने आत्महत्या की. वहीं 3,749 पुरुष कृषि मजदूरों और 574 महिला कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की.

पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड, मणिपुर, चंडीगढ़, दमन और दीव, दिल्ली, लक्षद्वीप और पुदुचेरी जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किसानों और कृषि श्रमिकों के आत्महत्या करने के शून्य मामले दर्ज किए गए.

इसी तरह आत्महत्या करने वाले दिहाड़ी मजदूरों में 29,092 पुरुष और 3,467 महिलाए थीं.

एनसीआरबी के अनुसार, साल 2018 की तुलना में 2019 में आत्महत्या में वृद्धि की रिपोर्ट करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिहार (44.7%), पंजाब (37.5%), दमन और दीव (31.4%), झारखंड (25.0%), उत्तराखंड (22.6%) और आंध्र प्रदेश (21.5%) शामिल हैं.

भारत में साल 2019 में हर दिन औसतन 381 लोगों ने आत्महत्या की है.

आंकड़ों के अनुसार, 2018 के मुकाबले 2019 में कुल आत्महत्या के मामलों में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई. पिछले साल जहां कुल 1,39,123 लोगों ने आत्महत्या की, वहीं 2018 में 1,34,516 और 2017 में 1,29,887 लोगों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2019 में शहरों में आत्महत्या की दर (13.9 प्रतिशत) पूरे भारत में आत्महत्या की दर (10.4 प्रतिशत) से अधिक थी.

आंकड़ों के अनुसार 2019 में आत्महत्या के मामलों में 53.6 प्रतिशत लोगों ने फांसी लगाकर जान दी, वहीं जहर खाकर 25.8 प्रतिशत लोगों ने अपना जीवन समाप्त किया. 5.2 प्रतिशत लोगों ने पानी में डूबकर आत्महत्या की तो 3.8 प्रतिशत लोगों ने आत्मदाह किया.