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मध्य प्रदेश में पिछले 13 साल में 15,129 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने की आत्महत्या

राज्य के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर मानसून सत्र के दौरान सदन में दी जानकारी.

Farmers Draught India Reuters

(फोटो: रॉयटर्स)

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सरकार ने सदन में बताया कि राज्य में पिछले 13 साल में 15,129 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने आत्महत्या की है.

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मध्य प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बुधवार को बताया कि वर्ष 2004 से वर्ष 2016 के दौरान प्रदेश में 15,129 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने आत्महत्या की है.

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने ये आंकडे़ दिए हैं.

गौरतलब है कि दिसंबर 2003 में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार सत्ता में आई और तब से लेकर अब तक प्रदेश में भाजपा नीत सरकार है.

Farmers Suicide

(नोट: आत्महत्या करने वालों में किसान के साथ खेतिहर मज़दूर भी शामिल हैं.)

आंकडों के अनुसार, वर्ष 2004 में 1638 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने ख़ुदकुशी की, जबकि वर्ष 2005 में 1248, वर्ष 2006 में 1375, वर्ष 2007 में 1263, वर्ष 2008 में 1379, वर्ष 2009 में 1395 और वर्ष 2010 में 1237 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की.

इसी तरह वर्ष 2011 में 1326 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने ख़ुदकुशी की, जबकि वर्ष 2012 में 1172, वर्ष 2013 में 1090, वर्ष 2014 में 826, वर्ष 2015 में 581 और वर्ष 2016 में 599 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने आत्महत्या की.

बता दें कि बीते जून महीने में मध्य प्रदेश किसान आंदोलन का गढ़ बना हुआ था. किसान क़र्ज़माफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे तमाम मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे थे.

इस आंदोलन का केंद्र राज्य का मंदसौर ज़िला बना हुआ था. छह जून को आंदोलन के दौरान ज़िले में पुलिस फायरिंग हुई जिसमें छह किसानों की जान चली गई थी.

इस घटना के बाद किसानों का आंदोलन हिंसक हो उठा था. इस आंदोलन के दौरान किसानों की आत्महत्या लगातार जारी रही.

मध्य प्रदेश में जून से अब तक 60 से ज़्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. आत्महत्या के पीछे प्रमुख कारण क़र्ज़, फसल खराब होना और खेती में नुकसान उठाना आदि रहे हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से सहयोग के साथ)