भारत

यूपी कांग्रेस के निष्कासित नेताओं ने सोनिया गांधी को लिखा- परिवार के मोह से निकलकर संगठन चलाएं

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के निष्काषित नेताओं के पत्र लिखने वाले दिन ही पार्टी ने प्रदेश के लिए सात महत्वपूर्ण समितियों का गठन किया है. इनमें उन नेताओं को जगह नहीं मिली है, जो कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल थे.

प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी. (फोटो: पीटीआई)

प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊ/नई दिल्ली: अनुशासनहीनता के आरोप में पिछले साल कांग्रेस से निष्कासित नेताओं के एक वर्ग ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर उनसे ‘परिवार के मोह’ से ऊपर उठकर दल के संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों को बहाल करते हुए उसे चलाने का आग्रह किया है.

निष्कासित नेताओं में से पूर्व सांसद संतोष सिंह और पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी समेत नौ नेताओं ने दो सितम्बर को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने लोकतांत्रिक मूल्यों और विचारधारा के साथ कांग्रेस और देश को बनाया है, लेकिन विडंबना यह है कि पिछले कुछ समय से पार्टी जिस तरह से चल रही है उससे पार्टी कार्यकर्ताओं में असमंजस और अवसाद की स्थिति बन गई है.

यह पत्र कांग्रेस के 23 नेताओं द्वारा लिखी गई उस चिट्ठी के बाद आई है, जिसमें पार्टी में व्यापक परिवर्तन की मांग की गई थी. गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, शशि थरूर समेत कई पूर्व मुख्यमंत्रियों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और प्रदेशाध्यक्षों द्वारा लिखे पत्र में पार्टी में व्यापक सुधार लाने, सत्ता का विकेंद्रीकरण करने, राज्य इकाइयों को सशक्त करने और एक केंद्रीय संसदीय बोर्ड के तत्काल गठन की मांग की गई थी.

इसके बाद हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन पार्टी नेताओं के कहने पर वे अस्थायी रूप से इसे संभालने  राज़ी हुईं. बैठक के बाद कहा गया कि अगले छह महीनों में पार्टी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा.

अब इस पत्र में नेताओं ने  इसी तरह के बदलावों की मांग के बारे में बात की है. उन्होंने कहा कि ऐसे में जब देश लोकतांत्रिक मूल्य और सामाजिक सद्भाव के ताने-बाने के बिखराव के संकट से गुजर रहा है, कांग्रेस का जीवंत, गतिशील और मजबूत बने रहना देश के लिए आवश्यक है.


यह भी पढ़ें: क्या कांग्रेस में वे बदलाव मुमकिन हैं, जिनकी मांग पार्टी के 23 नेताओं ने की है


पत्र में नेताओं ने अपने निष्कासन की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘संवाद के अभाव में पार्टी हित का चिंतन करना और सुझाव देना अनुशासनहीनता नहीं होती. ऐसे हालात को संज्ञान में लेकर उनका निदान करने के बजाए उन्हें भाजपा का आवरण पहनाना खुद को धोखा देने के बराबर है.’

उसमें सोनिया गांधी से कहा गया है, ‘आप परिवार के मोह से ऊपर उठकर परंपराओं के अनुसार विचारों की अभिव्यक्ति के साथ-साथ पार्टी के संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली और परस्पर विश्वास तथा संवाद कायम कर संगठन को चलाएं. अगर आप अपने दायित्व से विमुख होती हैं तो कांग्रेस इतिहास की बात बन जाएगी.’

इन नेताओं ने कहा है कि आज देश में कांग्रेस संवादहीनता, अनिर्णय, अनिश्चय और आंतरिक लोकतंत्र तथा विचारों की अभिव्यक्ति के अभाव में अपने अस्तित्व के संकट के कठिन दौर से गुजर रही है.

उन्होंने सोनिया से कहा, ‘संवादहीनता का आलम यह है कि दूसरे प्रदेशों को छोड़िए आपके गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश में ही संगठन की घटनाएं पार्टी अध्यक्ष के संज्ञान में नहीं लाई जा रही हैं या फिर आपने सब जानते हुए भी आंखें बंद कर ली हैं.’

इन नेताओं ने अपने निष्कासन का जिक्र करते हुए पत्र में कहा कि एक वर्ष बीतने को है मगर अनुरोध के बावजूद उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया. पार्टी की केंद्रीय अनुशासन समिति भी कुछ नहीं सुन रही है. ऐसा लगता है कि कांग्रेस कार्यालय में ताला बंद है.

गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, रामकृष्ण द्विवेदी, पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्र, विनोद चौधरी, नेक चंद्र पाण्डेय, पूर्व विधान परिषद सदस्य सिराज मेंहदी, युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश गोस्वामी और वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह सोलंकी तथा संजीव सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.

इन नेताओं की दलील है कि वे अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य हैं लिहाजा उत्तर प्रदेश में पार्टी की अनुशासन समिति उन्हें निष्कासित नहीं कर सकती है.

प्रदेश के लिए सात समितियों का गठन, बड़े नामों को जगह नहीं

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से दो साल पहले उत्तर प्रदेश के लिए घोषणापत्र समिति समेत कुल सात समितियों का गठन किया है, जिनमें राज्य से जुड़े पार्टी के कई नेताओं को शामिल किया गया है.

हालांकि इन समितियों वे वे नेता शामिल नहीं हैं, जिन्होंने बीते महीने बड़े बदलावों की मांग करते हुए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी.

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से रविवार को जारी बयान के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यूपी के लिए घोषणापत्र समिति, संपर्क समिति (आउटरीच कमेटी), सदस्यता समिति, कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति, प्रशिक्षण एवं कैडर विकास समिति, पंचायती राज चुनाव समिति और मीडिया एवं संचार परामर्श समिति के गठन को स्वीकृति प्रदान की.

उल्लेखनीय है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राज बब्बर और झारखंड कांग्रेस के इंचार्ज आरपीएन सिंह इनमें से किसी भी समिति में शामिल नहीं हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, समितियों में न लिए गए नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला और श्रीप्रकाश जायसवाल भी शामिल हैं.

ज्ञात हो कि प्रसाद और बब्बर कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल थे. वहीं, जून में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की एक बैठक में आरपीएन सिंह और राहुल गांधी के बीच तना-तानी की बात सामने आई थी.

सिंह का कहना था कि पार्टी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमले करने की बजाय ‘उनकी नीतियों और गलत फैसलों’ पर बात करनी चाहिए.

इसके बाद राहुल, जो मोदी की तीखी आलोचना करते रहते हैं, ने कहा था कि वे प्रधानमंत्री मोदी से डरते नहीं हैं लेकिन अगर कांग्रेस कार्यसमिति उन्हें कहेगी तो वे ऐसा नहीं करेंगे.

दूसरी तरफ, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री और पूर्व एमएलसी नसीब पठान जैसे उन नेताओं को इन समितियों में जगह मिली हैं जिन्होंने गुलाम नबी आजाद समेत पत्र लिखने वाले 23 नेताओं पर निशाना साधा था.

खत्री को प्रशिक्षण एवं कैडर विकास समिति तथा नसीब पठान को कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति में स्थान मिला है.

पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पीएल पुनिया को घोषणापत्र समिति में जगह दी गई है. इसके अलावा प्रमोद तिवारी को संपर्क समिति, अनुग्रह नारायण सिंह को सदस्यता समिति, बेगम नूरबानो को कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति, राजेश मिश्रा को पंचायती राज समिति और राशिद अलवी को मीडिया एवं संचार परामर्श समिति में शामिल किया गया है.

प्रदेश से संबंधित कांग्रेस के कई अन्य नेताओं को भी इन सात समितियों में शामिल किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)