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सुशांत सिंह राजपूत: हाईकोर्ट ने पूछा- न्यूज़ चैनलों पर सरकार का नियमन क्यों नहीं होना चाहिए

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और आठ सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया है कि कई समाचार चैनल अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में समानांतर जांच (मीडिया ट्रायल) चला रहे हैं और ख़बरों के ज़रिये मुंबई पुलिस के ख़िलाफ़ द्वेषपूर्ण अभियान चला रहे हैं.

28 अगस्त को डीआरडीओ गेस्ट हाउस के बाहर रिया चक्रवर्ती की गाड़ी को घेरे मीडियाकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

28 अगस्त को डीआरडीओ गेस्ट हाउस के बाहर रिया चक्रवर्ती की गाड़ी को घेरे मीडियाकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि उसे यह जानकर हैरानी हुई है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है और यह भी पूछा कि सरकार द्वारा टीवी न्यूज चैनलों का नियमन क्यों नहीं होना चाहिए?

इसके साथ ही अदालत ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले पर रिपोर्टिंग के दौरान समाचार चैनलों से संयम बनाए रखने के अपने पिछले आदेश का पालन करने को कहा है.

बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ ने कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. इन याचिकाओं में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की कवरेज में प्रेस को संयम बरतने के लिए निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है.

पीठ ने मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी एक पक्ष बनाया है.

पीठ ने मंत्रालय को जवाब दाखिल कर यह बताने को कहा है कि खबर प्रसारित करने के मामले में किस हद तक सरकार का नियंत्रण होता है, खास कर ऐसी खबरों के बारे में जिसका व्यापक असर होता है.

पीठ ने मामले में जांच कर रही केंद्रीय एजेंसियों- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी पक्ष बनाया है.

यह कदम तब उठाया गया जब एक याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एजेंसियां जांच संबंधी सूचनाएं प्रेस और जनता को ‘लीक’ कर रही हैं.

हालांकि पीठ ने मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को प्रतिवादी बनाने से इनकार कर दिया.

पीठ ने कहा, ‘हम प्रस्तावित प्रतिवादी नंबर 12 (रिया चक्रवर्ती) को पक्षकार के तौर पर शामिल करने का कोई कारण नहीं देखते हैं, जो कि अभी न्यायिक हिरासत में है.’

कार्यकर्ताओं और आठ सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दायर याचिकाओं में आरोप लगाया है कि कई टीवी चैनल मामले में समानांतर जांच (मीडिया ट्रायल) चला रहे हैं और वे मामले में खबरों के जरिये मुंबई पुलिस के खिलाफ द्वेषपूर्ण अभियान चला रहे हैं.

एक अन्य पीठ ने तीन सितंबर को इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई की थी और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में घटनाक्रम के कवरेज के दौरान प्रेस से संयम बरतने के अनुरोध वाला एक आदेश जारी किया था.

पूर्व पुलिस अधिकारियों की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मिलिंद साठे ने बृहस्पतिवार को पीठ से कहा कि आदेश के बावजूद टीवी चैनलों का मुंबई पुलिस के खिलाफ द्वेषपूर्ण अभियान जारी है.

साठे ने न्यूज चैनलों के प्रसारण की कुछ विषयवस्तु भी पेश की जिसमें परोक्ष रूप से इशारा किया गया है कि मुंबई पुलिस आरोपियों और ‘नशीले पदार्थों के माफिया’ को बचा रही है.

मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने अधिवक्ता साठे से कहा कि कोई एंकर क्या कह रहा है इससे उन्हें परेशान नहीं होना चाहिए.

हालांकि, उन्होंने कहा कि अदालत यह अपेक्षा करती है और उसे विश्वास है कि टीवी न्यूज चैनलों को तीन सितंबर की तारीख वाले आदेश की भावना को ध्यान में रखना चाहिए.’

बहरहाल, केंद्र सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायतों के संबंध में प्रिंट मीडिया का नियमन करने वाले वैधानिक निकाय भारतीय प्रेस परिषद और टीवी न्यूज चैनलों के खिलाफ अपनी शिकायत पर न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (एनबीएसए) का रुख करना चाहिए.

इस पर पीठ ने कहा कि एनबीएसए वैधानिक निकाय नहीं है.

पीठ ने कहा, ‘हमें हैरानी है कि सरकार का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर नियंत्रण नहीं है. इसका (टीवी न्यूज चैनलों) ऐसे मामलों में नियमन क्यों नहीं होना चाहिए, जहां इसका व्यापक असर होता है.’

पीठ ने सभी पक्षों को अपने जवाब दो हफ्ते में दाखिल करने को कहा है. साथ ही कहा कि याचिकाएं लंबित रहने तक एनबीएसए ऐसी खबरों के खिलाफ कोई भी शिकायत मिलने पर कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है.

बीते 28 अगस्त को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले और इससे जुड़ी जांच की कई मीडिया संस्थानों द्वारा की जा रही कवरेज को लेकर आपत्ति जताई थी.

प्रेस काउंसिल ने कहा था कि जांच के बारे में सुनी-सुनाई बातों पर ख़बरें प्रसारित करना ठीक नहीं है. पीड़ित, गवाहों, संदिग्धों को अत्यधिक प्रचार देने से बचें, क्योंकि ऐसा करना उनकी निजता के अधिकार में अतिक्रमण होगा.

काउंसिल ने इस मामले में मीडिया संस्थानों को अपना स्वयं का समानांतर मुकदमा न चलाने और फैसले की पहले ही भविष्यवाणी करने से बचने को कहा था.

मालूम हो कि 34 वर्षीय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत बीते 14 जून को मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे.

सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना के राजीव नगर थाना में अभिनेता की प्रेमिका और लिव इन पार्टनर रहीं अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ अभिनेता को खुदकुशी के लिए उकसाने और अन्य आरोपों में शिकायत दर्ज कराई थी.

सुशांत की मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच बिहार सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने मामले की जांच बीते पांच अगस्त को सीबीआई को सौंप दी थी.

इसके बाद बीते 19 अगस्त को बिहार सरकार की अनुशंसा को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वे अभिनेता की मौत के मामले की जांच करें. अदालत ने महाराष्ट्र पुलिस से मामले में सहयोग करने को कहा था.

इस मामले की जांच के दौरान ड्रग्स खरीदने और उसके इस्तेमाल का भी खुलासा होने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने पिछले कुछ दिनों में मामले की जांच के दौरान अभिनेत्री रिया के छोटे भाई शौविक चक्रवर्ती (24), सुशांत सिंह राजपूत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा (33) और अभिनेता के निजी स्टाफ सदस्य दीपेश सावंत को भी गिरफ्तार किया था.

बीते आठ सितंबर को कई दिनों की पूछताछ के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को भी अभिनेता की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में गिरफ्तार कर लिया था.

रिया ने कई समाचार चैनलों को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने खुद कभी मादक पदार्थ का सेवन नहीं किया है. उन्होंने हालांकि दावा किया था कि सुशांत सिंह राजपूत इसका सेवन करते थे.

बीते 10 सितंबर को रिया चक्रवर्ती ने मुंबई की अदालत में दायर अपनी जमानत याचिका में आरोप लगाया है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा पूछताछ के दौरान उन्हें ‘दोष स्वीकारोक्ति वाले बयान’ देने को मजबूर किया गया. अदालत में दायर याचिका में रिया ने यह दावा भी किया कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है.

रिया फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और उन्हें भायखला जेल में रखा गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)