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त्रिपुरा: मुख्यमंत्री के मीडिया को कथित तौर पर धमकाने से नाराज़ पत्रकार, कहा- वापस लें बयान

मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने शुक्रवार को कहा था कि ‘कुछ अति उत्साहित अख़बार’ राज्य में कोविड-19 की स्थिति के बारे में जनता में भ्रम फैला रहे हैं, जिन्हें मैं कभी माफ़ नहीं करूंगा. मीडिया संगठनों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि राज्य सरकार मीडिया को अपना ग़ुलाम बनाने की कोशिश कर रही है.

मुख्यमंत्री बिप्लब देब. (फोटो: पीटीआई)

मुख्यमंत्री बिप्लब देब. (फोटो: पीटीआई)

अगरतला: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देव द्वारा राज्य में कोविड-19 की स्थिति के बारे में जनता में भ्रम पैदा करने वाले ‘कुछ अति उत्साहित अख़बार’ वाली टिप्पणी पर राज्य के पत्रकारों ने रोष जताया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को उनका बयान वापस लेने के लिए तीन दिन दिए हैं.

रविवार को राजधानी में मीडिया अधिकारों के लिए काम करने वाले त्रिपुरा असेंबली ऑफ जर्नलिस्ट्स के बैनर तले इकट्ठे हुए अलग-अलग मीडिया संगठनों ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे ‘अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक’ बताया.

बता दें कि मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने शुक्रवार को दक्षिण त्रिपुरा जिले के सबरूम में पहले विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़) की आधारशिला रखने के बाद कहा था कि कुछ अख़बार कोविड-19 स्थिति के बारे में लोगों के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं और वह उन्हें ‘माफ नहीं’ करेंगे.

देब ने कहा था, ‘कुछ अख़बार लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, वे उत्तेजित हो रहे हैं… इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा, त्रिपुरा के लोग उन्हें माफ नहीं करेंगे और मैं, बिप्लब देब उन्हें माफ नहीं करूंगा. मैं जो भी कहता हूं वह करता हूं, इतिहास इस बात का गवाह है.’

पत्रकारों का कहना है कि राज्य सरकार मीडिया को अपना गुलाम बनाने की कोशिश कर रही है.

देब के बयान पर त्रिपुरा के मीडिया अधिकार संगठन ‘फोरम फॉर प्रोटेक्शन ऑफ मीडिया एंड जर्नलिस्ट’ ने शनिवार को कहा कि मुख्यमंत्री की टिप्पणियों के बाद पत्रकार खुद को असुरक्षित और भयभीत महसूस कर रहे हैं.

फोरम के अध्यक्ष सुबल कुमार डे ने कहा कि सरकार और पत्रकारों के बीच मतभेद असामान्य नहीं हैं और अतीत में ऐसी कई समस्याओं को बातचीत के जरिए हल किया गया था. ‘लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे हाथ से निकल रही है.’

देब की टिप्पणी पर अगरतला प्रेस क्लब के अध्यक्ष डे ने कहा, ‘त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक सभा में मीडिया संगठनों को धमकी दी है जो चिंता का विषय है.’

उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार मीडिया को अपना गुलाम बनाने की कोशिश कर रही है. पत्रकारों की आवाज को दबाने के लिए सरकारी आदेश जारी किए जाते हैं. उन्हें आधिकारिक तौर पर सोशल मीडिया पर बदनाम किया जाता है और मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) इसमें शामिल होता है.’

डे ने रविवार को बताया कि देब की टिप्पणी के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से पत्रकारों को धमकियों और हमले का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि बीते 24 घंटे में दो मीडियकर्मियों पर हमला हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘हम इन घटनाओं को लेकर बेहद चिंतित हैं. हमने फैसला किया है कि हम मुख्यमंत्री की धमकियों और असहिष्णुता के खिलाफ त्रिपुरा के राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, इंटनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव और एडिटर्स गिल्ड आदि से मदद मांगेंगे.’

हालांकि इससे पहले सीएमओ की ओर से ‘मीडिया को धमकाने’ के आरोपों का खंडन करते हुए कहा गया कि मुख्यमंत्री की टिप्पणियों को गलत संदर्भ में लिया गया और उनकी बात और कहने के मकसद को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया.

देब के मीडिया सलाहकार संजॉय कुमार मिश्रा ने कहा, ‘हमारी सरकार प्रेस की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है. हमने हमेशा मीडिया की मदद करने की कोशिश की है, लेकिन कुछ स्थानीय समाचार पत्र कुछ ऐसे एजेंडा पर काम करने की कोशिश कर रहे हैं जो सही नहीं है.’

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करने के बाद पत्रकार पर हमला

इस बीच एक स्थानीय बंगाली अख़बार से जुड़े पत्रकार पराशर बिस्वास ने यह दावा किया रविवार को आधी रात के करीब हेलमेट और मास्क पहने 6-7 लोगों ने उनके घर आकर उन पर हमला किया.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, बिस्वास पिछले दिनों अपने काम के दौरान कोरोना संक्रमित हो गए थे और कोविड केयर सेंटर में थे.

शुक्रवार को मुख्यमंत्री के पत्रकारों को कथित तौर पर धमकाने वाले बयान के बाद उन्होंने उसी रात सेंटर में ही एक वीडियो रिकॉर्ड कर उनकी आलोचना की थी.

उन्होंने इसे सोशल  मीडिया पर साझा किया था. इस पोस्ट में उनके नाराजगी भरी टोन में मुख्यमंत्री को संबोधित करने के ढंग को लेकर एक व्यक्ति ने आपत्ति भी की थी.

सूत्रों के अनुसार, शनिवार को बिस्वास पर उनके धलाई जिले के अम्बासा में उनके घर में हमला किया गया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए अगरतला ले जाया गया.

बिस्वास ने बताया कि स्थानीय अस्पताल में इलाज करवाने के बाद उन्होंने सात अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी.

इस बारे में धलाई जिले के एक पुलिस अधिकारी ने बताया है कि इस मामले की जांच जारी है लेकिन अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है.

बिस्वास ‘स्यंदन पत्रिका’ अख़बार में काम करते हैं. अख़बार के संपादक सुबल डे ने कहा, ‘उन पर मुख्यमंत्री के मीडिया को धमकाने के एक दिन के अंदर और उनके सोशल मीडिया पोस्ट करने के 12 घंटों के भीतर हमला हुआ है. हमें शक है कि यह हमला भाजपा के लोगों ने करवाया है.’

वहीं भाजपा ने इन आरोपों से इनकार किया है. त्रिपुरा भाजपा प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्जी ने कहा, ‘हम पत्रकार पर हुए हमले की निंदा करते हैं. हमारी पार्टी का कोई व्यक्ति इसमें शामिल नहीं है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. अगर किसी भी राजनीतिक दल का कोई व्यक्ति इसमें शामिल हुआ तो कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी.’

अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बिस्वास कहते दिखते हैं, ‘मैं मुख्यमंत्री को चेताना चाहता हूं कि उन्हें इस तरह से मीडिया को धमकाना नहीं चाहिए. आज मैं यह पोस्ट कर रहा हूं, आने वाले समय में कई और ऐसा करेंगे.’

बता दें कि त्रिपुरा में यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे पूर्वोत्तर में राज्य में कोरोना मृत्यु दर सर्वाधिक है और केंद्र की ओर से बढ़ते कोविड-19 मामलों से निपटने के लिए राज्य सरकार की मदद के लिए विशेषज्ञों की टीम भेजी गई है.

मीडिया द्वारा कोविड संकट को लेकर फैली कथित अव्यवस्थाओं को लेकर हुई खबरों के बाद ही मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने विवादित बयान दिया था.

इससे पहले बीते दिनों ही त्रिपुरा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से उनके द्वारा कोरोना वायरस से निपटने के लिए अपनाए जा रहे तरीकों और इंफ्रास्टक्टर के बारे में 18 सितंबर से पहले रिपोर्ट सौंपने को कहा था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)