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असमः 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से नेहरू, मंडल आयोग, अयोध्या, गुजरात दंगे से जुड़े पाठ हटाए गए

असम बोर्ड के सचिव ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से हमारे राज्य के छात्र पहले ही अहम अकादमिक समय गंवा चुके हैं. इस कवायद का मुख्य उद्देश्य 2020-2021 सत्र में छात्र-छात्राओं के सिर से परीक्षा का तनाव कम करना है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटीः असम राज्य बोर्ड की 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से जवाहरलाल नेहरू, मंडल आयोग की रिपोर्ट, 2002 के गुजरात दंगे, अयोध्या और जाति से जुड़े लेखन को हटा दिया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी के चलते 12वीं कक्षा के बोर्ड पाठ्यक्रम से 30 फीसदी की कटौती किए जाने के चलते इन चुनिंदा पाठों को हटाया गया है.

असम उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (एएचएसईसी) की वेबसाइट पर हाल ही में पाठ्यक्रम से हटाए गए विषयों की सूची अपलोड की गई है.

अधिकारियों का कहना है कि राज्य के शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद इन पाठों को पाठ्यक्रम से हटाया गया है.

राजनीति विज्ञान में पॉलिटिक्स इन इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस शीर्षक के तहत जिन उपखंडों को पाठ्यक्रम से हटाया गया है, उनमें पहले तीन आम चुनाव, राष्ट्रनिर्माण में जवाहरलाल नेहरू की सोच, भुखमरी और पंचवर्षीय योजनाओं का हटाया जाना, नेहरू की विदेश नीति, नेहरू के बाद राजनीतिक उत्तराधिकार शामिल हैं.

इसके अलावा गरीबी हटाओ की राजनीति, गुजरात में नवनिर्माण आंदोलन, पंजाब संकट और 1984 के सिख विरोधी दंगे, मंडल कमीशन रिपोर्ट का लागू होना, यूनाइटेड फ्रंट और एनडीए सरकारें, 2004 के लोकसभा चुनाव और यूपीए सरकार, अयोध्या विवाद और 2002 के गुजरात दंगे को भी पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है.

कांग्रेस पार्टी और उसका इतिहास, कश्मीर मुद्दा, चीन और पाकिस्तान से 1962, 1965 और 1971 का युद्ध, आपातकाल और जनता दल और भाजपा का उदय आदि वे विषय हैं, जो अभी भी पाठ्यक्रम में हैं.

कक्षा 12वीं के इतिहास विषय के पाठ्यक्रम में समानता, जाति और वर्ग सेक्शन हटा दिया गया है.

वहीं, अंग्रेजी में ‘मेमोरीज ऑफ चाइल्डहुड’ शीर्षक का पाठ भी हटा दिया गया है.

इस पाठ में छात्र दो महिला लेखकों अमेरिका की लेखक और सुधारक जिटकला सा और भारत की दलित तमिल लेखक और शिक्षक बामा की जीवनी पढ़ते थे.

असम बोर्ड के सचिव मनोरंजन ककाती ने पाठ्यक्रम कम करने के मुद्दे पर कहा, ‘कोरोना वायरस की वजह से हमारे राज्य के छात्र पहले ही अहम अकादमिक समय गंवा चुके हैं. जब सीबीएसई ने कक्षा 11वीं और 12वीं का पाठ्यक्रम कम करने का फैसला किया था, तभी से असम बोर्ड इसे गंभीरता से लेने पर विचार कर रहा था.’

उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य 2020-2021 सत्र में छात्रों के सिर से परीक्षा का तनाव कम करना है.

ककाती का कहना है, ‘शिक्षकों और विशेषज्ञों ने यह फैसला लिया है. सिर्फ एक शिक्षक या विशेषज्ञ ने नहीं बल्कि राज्य के विभिन्न संस्थानों से जुड़े लोगों ने मिलकर यह फैसला किया है. अगर किसी तरह की शिकायत आती है तो हम फिर से बैठक करेंगे और इस पर आगे फैसला लेंगे.’