दुनिया

दुनिया में भ्रष्टाचार की सबसे अधिक मार ग़रीबों पर पड़ी है: संयुक्त राष्ट्र समिति

संयुक्त राष्ट्र की एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि महामारी के दौरान स्वास्थ्य देखभाल व सामाजिक कल्याण सेवाओं की गति बढ़ाने के लिए सरकारों ने सख़्ती कम की है, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र की एक समिति ने कहा है कि कर चोरी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के कारण सरकारों के अरबों डॉलर ज़ाया हो रहे हैं, जिनका इस्तेमाल विश्व में निर्धन लोगों के कल्याण के लिए हो सकता था.

‘अंतरराष्ट्रीय आर्थिक जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदारी’ पर एक उच्च स्तरीय समिति की बृहस्पतिवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हो सकता है कि सरकारें समस्याओं और इनके हल पर सहमत नहीं हों, पर वे कॉर्पोरेट कर चोरी के कारण करीब 500 अरब डॉलर का नुकसान उठा रहीं हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में डिजिटल और वैश्वीकृत दुनिया के अनुरूप बदलाव नहीं हुए हैं और महामारी के दौरान स्वास्थ्य देखभाल व सामाजिक कल्याण सेवाओं की गति बढ़ाने के लिए सरकारों ने सख़्ती कम की है, जिसका फ़ायदा अपराधी उठा रहे हैं.

समिति की सह अध्यक्ष और लिथुआनिया की पूर्व राष्ट्रपति दालिया ग्रेबाउसकाइते ने कहा, ‘भ्रष्टाचार और कर चोरी तेजी से फैल रहे हैं. बहुत से बैंकों की इसमें मिलीभगत है और पूर्व में बहुत-सी सरकारें इसमें लिप्त रही हैं. हम सबको खास तौर पर विश्व भर के निर्धन लोगों को लूटा जा रहा है.’

उन्होंने कहा, ‘कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने, लोगों को जीवित रखने और भोजन उपलब्ध कराने के संसाधन भ्रष्टाचार व अनुचित बर्ताव की बलि चढ़ रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि गरीबी, जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 महामारी सहित अन्य वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आर्थिक प्रणाली पर भरोसा होना बहुत आवश्यक है.

समिति के दूसरे सह अध्यक्ष नाइजर के प्रधानमंत्री इब्राहिम मयाकी ने कहा, ‘भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों से निपटने में हमारी नाकामी…कोविड-19 ने और उजागर कर दी है.’

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकारों को वित्तीय अपराधों व भ्रष्टाचार को रोकने के लिए और ज़्यादा कड़े क़दम उठाने होंगे.

इस समिति का लक्ष्य घोर गरीबी को समाप्त करने, पर्यावरण को बचाने और लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने के संयुक्त राष्ट्र के 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करना है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)