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ऑडिटर ने कहा, डीएचएफएल में 12,705 करोड़ रुपये के लेन-देन में गड़बड़ी

इस रिपोर्ट के आधार पर एनसएलटी की मुंबई पीठ के समक्ष 40 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दायर किया गया है, जिसमें डीएफएचएल के प्रमोटर कपिल और धीरज वधावन भी शामिल हैं.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

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नई दिल्ली: कर्ज में फंसी आवास ऋण देने वाली कंपनी डीएचएफएल में वित्त वर्ष 2016-17 से 2018-19 के दौरान 12,705.53 करोड़ रुपये के गलत तरीके से लेन-देन किए गए. लेन-देन से जुड़े ऑडिटर ग्रांट थॉर्नटन ने यह जानकारी दी.

ऑडिटर की रिपोर्ट के अनुसार, यह गड़बडी ‘स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी’ (एसआरए) की उन दो परियोजनाओं के लिए कर्ज वितरण से संबद्ध है, जिनका जिम्मा पूर्व में कंपनी ने लिया था.

दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के नियुक्त किए गए प्रशासक ने इस साल की शुरुआत में कंपनी के मामलों की जांच करने के लिए ग्रांट थॉर्नटन से सहायता ली थी.

पिछले साल राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने ऋण शोधन अक्षमता के तहत कंपनी के मामले को स्वीकार किया था.

एनसीएलटी ने इंडियन ओवरसीज बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक और सीईओ आर. सुब्रमण्यम कुमार को कंपनी का प्रशासक नियुक्त किया.

डीएचएफएल द्वारा बीते सोमवार को शेयर बाजार के साथ साझा की गई सूचना में कहा गया कि प्रशासक के साथ साझा की गई ऑडिटर की रिपोर्ट के अनुसार उक्त सौदौं के कारण कंपनी पर 12,705.53 करोड़ रुपये का असर पड़ा है. इसमें 10,979.50 करोड़ रुपये मूल राशि तथा 1,726.03 करोड़ रुपये ब्याज है. 30 नवंबर 2019 की स्थिति के अनुसार यह राशि बकाया थी.

एनसीएलटी के पास जमा आवेदन में ब्याज समेत पूरी राशि का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार संबंधित लेन-देन 2016-17 से 2018-19 के दौरान हुआ.

रिपोर्ट के आधार पर एनसएलटी की मुंबई पीठ के समक्ष 40 प्रतिवादियों के खिलाफ मामला दायर किया गया है. इसमें कपिल वधावन, धीरज वधावन, दर्शन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, सिगतिया कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड और कुछ अन्य इकाइयां शामिल हैं.

डीएचएफएल के प्रशासक द्वारा यह दूसरी शिकायत दर्ज कराई गई है. इससे पहले बीते दो सितंबर को वित्त वर्ष 2006-07 से 2018-19 के दौरान 17,394 करोड़ रुपये के कथित तौर पर गलत तरीके से लेन-देन को लेकर मामला दायर किया गया था.

30 जून, 2019 की स्थिति के अनुसार यह राशि कंपनी के बही-खाते में बकाये के रूप में है. इसके अलावा 3,348 करोड़ रुपये का नुकसान कुछ इकाइयों को दिए गए कर्ज पर कम ब्याज लगाने के कारण अनुमानित किया गया है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल डीएचएफएल मामले को दिवाला कार्यवाही के लिए भेजा था.

जुलाई 2019 की स्थिति के अनुसार संकट में फंसी कंपनी के ऊपर बैंकों, राष्ट्रीय आवास बोर्ड, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड धारकों के 83,873 करोड़ रुपये बकाये थे.

इसमें से 74,054 करोड़ रुपये सुरक्षित जबकि 9,818 करोड़ रुपये असुरक्षित कर्ज की श्रेणी में थे. ज्यादातर बैंकों ने डीएचएफएल के खातों को एनपीए घोषित कर दिया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)