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बाबरी विध्वंस फैसला न्याय से दूर, इसके ख़िलाफ़ मुस्लिमों की ओर से अपील की जाएगी: एआईएमपीएलबी

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भाजपा नेताओं समेत 32 आरोपियों को बरी किए जाने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि विशेष सीबीआई अदालत का यह फैसला ग़लत है. अदालत ने सबूतों को नज़रअंदाज़ कर यह निर्णय दिया है. वहीं राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई रहे इक़बाल अंसारी ने इस फैसले का स्वागत किया है.

New Delhi: Sunni Waqf Board lawyer Zafaryab Jilani along with other advocates comes out of the Supreme Court after the Ayodhya case verdict, in New Delhi, Saturday, Nov. 9, 2019. (PTI Photo/Arun Sharma) (PTI11_9_2019_000065B) *** Local Caption ***

जफरयाब जिलानी. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के वरिष्ठ सदस्य एवं अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा बुधवार को सभी 32 अभियुक्तों को बरी किए जाने के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

विशेष सीबीआई अदालत के फैसले को ‘न्याय से दूर’ बताते हुए एआईएमपीएलबी ने सीबीआई से कानून को बनाए रखने के लिए इसे चुनौती देने का आग्रह किया.

जिलानी ने कहा, ‘विशेष सीबीआई अदालत का फैसला बिल्कुल गलत है. अदालत ने सबूतों को नजरअंदाज करते हुए यह निर्णय दिया है. मुस्लिम पक्ष इसे हाईकोर्ट में चुनौती देगा.’

उन्होंने कहा कि इस मामले में दर्जनों गवाहों के बयान हैं. आपराधिक मामलों में गवाहों के बयान सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. गवाहों में आईपीएस अफसर और पत्रकार भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने बयान में कहा था कि मामले में आरोपी बनाए गए लोग मंच पर बैठे थे और भड़काऊ भाषण दिए जा रहे थे. जब वहां गुम्बद गिरा तो खुशियां मनायी जा रही थीं, मिठाइयां बंट रही थीं और अदालत कह रही है कि कोई साजिश नहीं थी.

पूर्व अपर महाधिवक्ता ने कहा कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और अन्य अभियुक्तों के खिलाफ तो 153-ए और बी के सीधे सबूत हैं, फिर भी उन्हें बरी कर दिया गया. सीबीआई अदालत का यह निर्णय कानून के खिलाफ है.

यह पूछे जाने पर कि अभी तक यह मुकदमा सीबीआई लड़ती आई है, ऐसे में मुस्लिम पक्ष किस हैसियत से अपील करेगा तो जिलानी ने कहा, ‘सीबीआई को भी अपील करनी चाहिए, मगर दंड प्रक्रिया संहिता में पीड़ित और गवाह को भी अपील का अधिकार दिया गया है. हम तो पीड़ित हैं. हमारे कुछ लोग इसमें गवाह भी थे. मैं खुद भी गवाह था.’

उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से पीड़ित और गवाह दोनों ही इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे. इनमें पीड़ित के तौर हाजी महबूब और हाफिज अखलाक अपील करेंगे. बाकी कौन-कौन लोग होंगे, इस बारे में मशविरा करके फैसला लिया जाएगा. अगर राय बनी तो खुद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी पक्षकार बनेगा.

इस सवाल पर कि क्या इस मुद्दे पर बोर्ड की बैठक बुलाई जाएगी, जिलानी ने कहा कि बोर्ड तो पहले ही मामले की पैरवी कर रहा था, लिहाजा बैठक बुलाने की जरूरत नहीं होगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एआईएमपीएलबी की ओर इसके महासचिव सैयद मोहम्मद वली रहमानी की ओर से भी एक बयान जारी किया गया है. इसमें कहा गया है, ‘फैसला न तो सबूतों पर आधारित हैं और न ही कानून सम्मत है. न्याय की व्यवस्था कायम रखने के लिए हम सीबीआई से अनुरोध करते हैं कि वह इसे लेकर अपील दायर करे.’

बाबरी एक्शन कमेटी के सदस्य रहे जफरयाब जिलानी ने कहा, ‘बोर्ड उन लोगों को कानूनी सहायता दिलाता है, जो इससे प्रभावित रहे हैं. विध्वंस मामले में ऐसे कई लोगों है, जिनके घर इस घटना के बाद जला दिए गए थे. हम अपने वकीलों से सलाह लेंगे और यह निर्णय करेंगे कि क्या ऐसे लोग हैं, जिन्हें इस मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है. मुस्लिमों की तरफ से इस फैसले के खिलाफ एक अपील दाखिल की जाएगी.’

बोर्ड की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘साल 1994 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने इस विध्वंस को राष्ट्रीय शर्म बताया था और कहा था कि इस घटना ने न्याय व्यवस्था और संवैधानिक प्रक्रिया में विश्वास को हिलाकर रख दिया.’

बयान में आगे कहा गया है कि मस्जिद के विध्वंस के बाद देश में सांप्रदायिक हिंसा की एक नई लहर पैदा हुई और आज हम सब देख सकते हैं कि हम कहा खड़े हैं.

बयान के अनुसार, ‘अब हम इस विध्वंस के लिए किसी की जवाबदेही तय किए बिना दिया गया फैसला देख रहे हैं. इस घटना पर हम अपने देशवासियों को याद दिलाते हैं कि भारतीय मुस्लिम आबादी संविधान और लोकतंत्र के साथ खड़ी हुई थी, जब 6 दिसंबर 1992 को न्यायपालिका सहित देश ने उन्हें विफल कर दिया था.’

आगे कहा गया है, ‘इसके बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद की जमीन इनाम में दे दी, तब भी देशभर के मुसलमानों ने धैर्य का प्रदर्शन किया और आज फिर न्यायपालिका ने उसी तरह के रवैये को बरकरार रखा है.’

बोर्ड के बयान के मुताबिक, ‘मुस्लिम, अल्पसंख्यक और हिंदुओं का एक बड़ा हिस्सा शर्मिंदा है और आज की दशा के लिए खेद महसूस करता है. भारतीय मुसलमानों ने उन संस्थानों पर भरोसा किया और उन्हें संरक्षित रखा, जिन्हें 1947 में बनाया गया था. इन घटनाओं ने लोकतंत्र के मंदिरों और संस्थानों पर किए गए विश्वास को हिला दिया है.’

गौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में बुधवार को बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया.

आरोपियों में वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के अलावा विनय कटियार और साध्वी ऋतंभरा शामिल थे.

विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एसके यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, यह एक आकस्मिक घटना थी. उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले, बल्कि आरोपियों ने उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी.

बाबरी मामले में मुद्दई रहे इकबाल अंसारी ने फैसले का स्वागत किया

उधर, राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी ने विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले में विशेष सीबीआई अदालत के बुधवार के फैसले का स्वागत करते हुए मुसलमानों से अपील की कि वह उच्चतम न्यायालय के निर्णय की तरह विशेष अदालत के फैसले का भी सम्मान करें.

अंसारी ने टेलीफोन पर समाचार एजेंसी भाषा से बातचीत में विशेष सीबीआई अदालत के फैसले के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘अच्छी बात है, सबको बरी कर दिया गया. वैसे जो कुछ भी होना था वह पिछले साल नौ नवंबर को चुका है. यह मुकदमा भी उसी दिन खत्म हो जाना चाहिए था.’

बुधवार को उन्होंने कहा, ‘यह मुकदमा सीबीआई का है. आज अदालत ने इस पर फैसला कर दिया. हम मुसलमानों से अपील करते हैं कि वह इस मामले को आगे लेकर न जाएं. जैसे नौ नवंबर के फैसले का सम्मान किया था, वैसे ही इसका भी करें.’

अंसारी ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि हमारे देश में हिंदू-मुसलमान का विवाद न रहे. जो लोग देश को तोड़ना चाहते हैं, वे ही विवाद बनाए रखने की कोशिश करते हैं. अयोध्या में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई में कोई मतभेद नहीं है. यही माहौल पूरे देश में होना चाहिए.’

सीबीआई को फैसले के खिलाफ अपील करनी चाहिए: ओवैसी

विशेष सीबीआई अदालत के फैसले पर क्षोभ जाहिर करते हुए एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को इसे अप्रिय करार दिया और कहा कि केंद्रीय एजेंसी को इसके खिलाफ अपील करनी चाहिए.

ओवैसी ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया करते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘फैसले से हिंदुत्व और उसके अनुयायियों की सामूहिक अंतरात्मा और विचारधारा को संतुष्टि मिलती है.’

उन्होंने पूछा, ‘क्या छह दिसंबर को किसी जादू से मस्जिद ढह गई? वहां लोगों को इकट्ठा होने के लिए किसने बुलाया? किसने सुनिश्चित किया कि वे वहां घुसें?’

ओवैसी ने कहा कि सीबीआई को फैसले के खिलाफ अपील करनी चाहिए ‘ताकि उसकी स्वतंत्रता बची रहे.’

सीबीआई अदालत के फैसले को अप्रिय करार देते हुए उन्होंने कहा कि वह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से इसके खिलाफ अपील करने का आग्रह करते हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)