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सुप्रीम कोर्ट ने श्रमिकों के काम के घंटे बढ़ाने वाले गुजरात सरकार के आदेश को ख़ारिज किया

गुजरात सरकार द्वारा 17 अप्रैल 2020 को जारी उस अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मज़दूरों के कई अधिकारों को रद्द कर दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि महामारी का हवाला देकर मज़दूरों के सम्मान और उनके अधिकारों के लिए बने क़ानूनों को ख़त्म नहीं किया जा सकता.

(फोटो: पीटीआई)

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गुजरात सरकार की उस अधिसूचना को खारिज कर दिया जिसके तहत राज्य सरकार ने कोरोना संकट के नाम पर कारखानों को फैक्ट्री एक्ट, 1948 के तहत निर्धारित प्रतिदिन काम कराने के घंटे, छुट्टी देने, भुगतान करने इत्यादि प्रावधानों से छूट दे दी थी.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, केएम जोसेफ और इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कहा कि महामारी का हवाला देकर मजदूरों के सम्मान एवं उनके अधिकारों के लिए बने कानूनों को खत्म नहीं किया जा सकता है.

लाइव लॉ के मुताबिक, इस संबंध में कोर्ट ने कहा कि फैक्ट्री’ज एक्ट की धारा पांच की परिभाषा के तहत महामारी कोई ‘पब्लिक इमरजेंसी’ नहीं है कि इससे देश की सुरक्षा को खतरा हो.

बीते 23 सितंबर को कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. याचिकाकर्ता ने गुजरात सरकार द्वारा 17 अप्रैल 2020 को जारी किए गए उस अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसके तहत मजदूरों के कई अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था.

राज्य द्वारा अधिनियम की धारा 5 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए एक अधिसूचना पारित की गई थी, जो केवल सार्वजनिक आपातकाल के लिए छूट की अनुमति देती है.

राज्य सरकार ने ओवरटाइम के लिए दोहरे वेतन के भुगतान की शर्त को भी खत्म कर दिया था और ओवरटाइम का भी भुगतान सामान्य समय की दर से करना था.

यह आदेश अप्रैल से 19 जुलाई 2020 के बीच लागू किया जाना था. इसे गुजरात मजदूर सभा (अहमदाबाद) एवं ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (मुंबई) ने कोर्ट में चुनौती दी थी.

याचिकाकर्ताओं ने कहा, ‘ये बेहद चौंकाने वाला है कि जब कोविड-19 के कारण आराम करने और एकदम स्वस्थ रहने की सलाह दी जा रही है, ऐसे में सरकार काम के घंटे बढ़ा रही है. इस नई अधिसूचना के तहत श्रमिकों से ज्यादा काम कराया जाएगा और कानून के अनुसान उन्हें भुगतान भी नहीं किया जाएगा, जिसके कारण उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य खराब ही होगा.’

उन्होंने कहा कि कानून के तहत इस तरह की छूट सिर्फ ‘बड़े आपातकाल’ के समय देने के लिए कहा गया है, जब भारत या इसका कोई भाग खतरे में हो. साथ ही, इस तरह की छूट सिर्फ चुनिंदा कंपनियों को दी सकती है और वो भी सिर्फ एक निश्चित समयसीमा के लिए.