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असम: पुलिस पेपर लीक के आरोपी दीबान डेका ने किया आत्मसमर्पण, भाजपा ने पार्टी से निष्कासित किया

असम पुलिस में उपनिरीक्षकों के 597 पदों की लिखित परीक्षा का प्रश्न पत्र बीते 20 सितंबर को लीक हो गया था. इस मामले में भाजपा नेता दीबान डेका आरोपी हैं. मुख्य आरोपी पूर्व डीआईजी पीके दत्ता की अभी भी पुलिस को तलाश है.

दीबान डेका. (फोटो साभार: फेसबुक)

दीबान डेका. (फोटो साभार: फेसबुक)

गुवाहाटी: असम पुलिस भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक भाजपा नेता दीबान डेका ने राज्य के बारपेटा जिले में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. उन्हें हिरासत में ले लिया गया और पार्टी ने बृहस्पतिवार को उन्हें निष्कासित कर दिया.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि डेका और पूर्व डीआईजी पीके दत्ता घोटाले के सामने आने के बाद से ही फरार थे. उन्होंने बुधवार रात (30 सितंबर) पथचारकुच्ची इलाके में आत्मसमर्पण कर दिया, इसके तुरंत बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया.

अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के लिए उन्हें गुवाहाटी लाया गया है. डेका को कामरूप के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें गुवाहाटी नगर पुलिस की अपराध शाखा की हिरासत में पांच दिनों के लिए भेज दिया गया.

भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी की राज्य इकाई ने गिरफ्तारी के बाद तत्काल प्रभाव से उन्हें निष्कासित कर दिया.

डेका ने फेसबुक पर खुद की पहचान भाजपा किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में बताई है और उन्होंने 2011 का असम विधानसभा चुनाव भाजपा उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था और वह 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ने की भी उम्मीद कर रहे थे.

बता दें कि असम पुलिस में उपनिरीक्षकों के 597 पदों की लिखित परीक्षा का प्रश्न पत्र 20 सितंबर को लीक हो गया था और परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट के अंदर ही इसे रद्द कर दिया गया था. राज्य भर में 154 केंद्रों पर करीब 66 हजार उम्मीदवार परीक्षा में बैठे थे.

उनकी गिरफ्तारी के साथ ही अभी तक इस मामले में 25 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

इससे पहले पुलिस ने डेका और दत्ता दोनों के खिलाफ ‘लुक आउट नोटिस’ जारी कर उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने के लिए एक-एक लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी.

भाजपा नेता डेका का नाम इस संबंध में दर्ज प्राथमिक एफआईआर में नहीं था. पिछले हफ्ते सीआईडी मुख्यालय में उनसे पूछताछ की गई थी. हालांकि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया और उसके बाद से वे गायब थे.

पेपर लीक होने के बाद इसकी ‘नैतिक जिम्मेदारी’ लेते हुए असम राज्य स्तर पुलिस भर्ती बोर्ड (एसएलपीआरबी) के अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने 27 सितंबर को इस्तीफा दे दिया था.

उसके बाद मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने डीजीपी भास्कर ज्योति महंत को बोर्ड का नया अध्यक्ष नियुक्त किया और 20 नवंबर से पहले तक लिखित परीक्षा फिर से आयोजित करने का निर्देश दिया था.

पूर्व डीआईजी का अब भी पता नहीं चल पाया है. उनके भारत-नेपाल सीमा के पास कहीं होने का संदेह है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)