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भीमा-कोरेगांव: आठ लोगों के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाख़िल, स्टेन स्वामी न्यायिक हिरासत में भेजे गए

एनआईए ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं स्टेन स्वामी, गौतम नवलखा, आनंद तेलतुंबड़े समेत आठ लोगों के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाख़िल किया है, उनमें मिलिंद तेलतुंबड़े को छोड़कर सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं.

आनंद तेलतुम्बड़े और गौतम नवलखा. (फोटो साभार: फेसबुक/विकिपीडिया)

आनंद तेलतुम्बड़े और गौतम नवलखा. (फोटो साभार: फेसबुक/विकिपीडिया)

मुंबई: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव में भीड़ को कथित तौर पर हिंसा के लिए उकसाने के मामले में शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं गौतम नवलखा और 83 वर्षीय स्टेन स्वामी समेत आठ लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

स्वामी को बृहस्पतिवार शाम रांची से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया और फिर शुक्रवार को एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 23 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. हालांकि स्वामी का कहना है कि उनका भीमा-कोरेगांव मामले से कोई लेना-देना नहीं है.

अधिकारियों ने कहा कि वह संभवत: सबसे बुजुर्ग व्यक्ति हैं, जिनके खिलाफ यूएपीए यानी गैर-कानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है.

सरकार के खिलाफ कथित रूप से षड्यंत्र रचने के इस मामले में जिन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है, उनमें मिलिंद तेलतुंबड़े को छोड़कर सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं.

एनआईए की प्रवक्ता एवं पुलिस उप महानिरीक्षक सोनिया नारंग ने कहा कि आरोप-पत्र यहां एक अदालत के समक्ष दाखिल किया गया.

एनआईए ने अन्य जिन लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया गया है उनमें दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर एमटी हेनी बाबू, गोवा इंस्टिट्यूट ऑफ मैंनेजमेंट के प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े, कबीर कला मंच के तीन कार्यकर्ता- ज्योति जगताप, सागर गोरखे और रमेश गयचोर शामिल हैं.

यह मामला 1 जनवरी, 2018 को पुणे के निकट भीमा कोरेगांव की जंग की 200वीं वर्षगांठ के जश्न के बाद हिंसा भड़कने से संबंधित है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे.

उसके एक दिन पहले 31 दिसंबर 2017 को पुणे के ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद का सम्मेलन आयोजित किया गया था.

इसी साल अप्रैल में एनआईए ने आनंद तेलतुंबड़े को गिरफ्तार किया था और नवलखा ने आत्मसमर्पण कर दिया था. आठ आरोपियों के खिलाफ दाखिल एनआईए के आरोप पत्र में मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज का जिक्र नहीं है, जो 2018 से जेल में बंद हैं.

अगस्त 2018 को महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर पांच कार्यकर्ताओं- कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंजाल्विस को गिरफ़्तार किया था.

महाराष्ट्र पुलिस का आरोप है कि इस सम्मेलन के कुछ समर्थकों के माओवादी से संबंध हैं. इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस ने जून 2018 में एल्गार परिषद के कार्यक्रम से माओवादियों के कथित संबंधों की जांच करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को गिरफ्तार किया था.

स्टेन स्वामी के वकील शरीफ शेख ने कहा कि उनके मुवक्किल अदालत के समक्ष पेश हुए. उन्होंने कहा, ‘एनआईए ने उन्हें हिरासत में लेने की अपील नहीं की. वह बुजुर्ग हैं. वह दस्तावेजों का अध्ययन कर जमानत के लिए आवेदन करेंगे.’

स्वामी इस मामले में गिरफ्तार होने वाले 16वें व्यक्ति हैं. इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और आतंकवाद रोधी कानून यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

एनआईए के अधिकारियों ने दावा किया है कि स्टेन स्वामी भाकपा (माओवादी) की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं.

एनआईए ने आरोप लगाया कि वह समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए षडयंत्रकारियों- सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेन्द्र गाडलिंग, अरुण फरेरा, वर्णन गोंसाल्विस, हेनी बाबू, शोमा सेन, महेश राउत, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबड़े के संपर्क में रहे हैं.

एजेंसी ने आरोप लगाया कि स्वामी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक सहयोगी के जरिये फंड भी हासिल करते थे. इसके अलावा वह भाकपा (माओवादी) के एक संगठन प्रताड़ित कैदी एकजुटता समिति (पीपीएससी) के संयोजक भी थे.

अधिकारियों ने कहा कि उनके पास से भाकपा (माओवादी) से संबंधित साहित्य और प्रचार सामग्री तथा उसके कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए संचार से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं.

हालांकि स्वामी ने बृहस्पतिवार शाम अपनी गिरफ्तारी से पहले एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि एनआईए उनसे पूछताछ कर रही है. पांच दिन के दौरान उसने 15 घंटे पूछताछ की जा चुकी है.

उन्होंने कहा था, ‘मेरे खिलाफ एनआईए की मौजूदा जांच प्रकृति का भीमा कोरेगांव मामले से कुछ लेना-देना नहीं है. भीमा कोरेगांव में मेरे खिलाफ संदिग्ध के तौर पर मामला दर्ज किया गया और 28 अगस्त 2018 और 12 जून 2019 को दो बार मेरे घर पर छापेमारी की गई. ऐसा इसलिए किया गया ताकि किसी तरह से यह दर्शाया जा सके कि मैं चरमपंथी ताकतों से निजी तौर से जुड़ा हुआ हूं. मैंने कठोर शब्दों में इन आरोपों का खंडन किया है.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, एनआईए ने मुंबई के एक विशेष अदालत के समक्ष 10,000 से अधिक पेजों का पूरक आरोप-पत्र दायर किया है. जिसमें उसने दावा किया है कि इस मामले में विभिन्न संगठनों की भूमिका सामने आई थी, जिसमें कबीर कला मंच भी एक है. इस संगठन के कार्यकर्ता- ज्योति जगताप, सागर गोरखे और रमेश गयचोर प्रशिक्षित कैडर थे, जो एल्गार परिषद सभा का आयोजन किया था.

एनआईए ने दावा किया है कि प्रोफेसर हेनी बाबू माओवादी क्षेत्रों में विदेशी पत्रकारों के यात्राओं में सहयोग करते थे और जीएन साईबाबा की डिफेंस कमेटी से जुड़कर कैदियों की रिहाई का प्रयास करते थे. इसके अलावा अन्य प्रतिबंधित समूहों के साथ उनका संबंध था.

एजेंसी ने आरोप पत्र में दावा है किया कि आनंद तेलतुंबडे भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस प्रेरणा अभियान के प्रमुख संयोजकों में से एक थे और 31 दिसंबर, 2017 को एल्गार परिषद के सभा में मौजूद थे.

एजेंसी ने कहा है कि गौतम नवलखा पर सरकार के खिलाफ बुद्धिजीवियों को एकजुट करने का काम सौंपा गया था. साथ ही यह दावा किया गया कि वह कुछ तथ्य-खोज समितियों का हिस्सा थे और जांच के दौरान आईएसआई के साथ उसके संबंध भी सामने आए.

एनआईए ने इस साल 24 जनवरी को इस मामले की जांच अपने हाथों में ली है. पुणे पुलिस का आरोप है कि 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद समूह के सदस्यों ने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके अगले दिन हिंसा भड़क गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)