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हिंदू राव में हड़ताल: दिल्ली सरकार ने कोरोना मरीज़ों को अपने अस्पतालों में भर्ती करने को कहा

उत्तर दिल्ली नगर निगम द्वारा संचालित हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को बीते जून महीने से वेतन नहीं मिला है. शुक्रवार को उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर 48 घंटे में उनका वेतन जारी नहीं किया गया तो कोरोना वार्ड में ड्यूटी नहीं करेंगे.

हिंदूराव अस्पताल के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ पिछले कई महीनों से वेतन को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. (फोटो साभार: एएनआई)

हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ पिछले कई महीनों से वेतन को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. (फोटो साभार: एएनआई)

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने शनिवार को उत्तर दिल्ली नगर निगम द्वारा संचालित हिंदू राव अस्पताल के सभी कोविड-19 मरीजों को अपने अस्पतालों में शिफ्ट करने का आदेश दिया.

दिल्ली सरकार ने यह आदेश बीते तीन महीने से वेतन न मिलने को लेकर हिंदू राव अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों की कई दिनों से चल रही ‘सांकेतिक अनिश्चितकालीन हड़ताल’ के मद्देनजर दिया है.

संवाददाताओं से बातचीत करते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि इस समय हिंदू राव अस्पताल में 20 मरीज (कोविड संक्रमित) भर्ती हैं.

उन्होंने कहा, ‘आज हमने कोविड-19 मरीजों को हिंदू राव अस्पताल से हमारे अपने अस्पतालों में शिफ्ट करने का आदेश दिया. उनके पास विकल्प होगा कि या तो लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल में शिफ्ट हों या अपने घर के नजदीक किसी अन्य सरकारी अस्पताल में भर्ती हों.’

शनिवार को एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘कोविड फ्रंटलाइन वर्कर्स (डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ) के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है. एमसीडी दिल्ली सरकार को और दिल्ली सरकार एमसीडी को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रही है. इस राजनीतिक फुटबॉल की वजह से हमें परेशान होना पड़ रहा है.’

उल्लेखनीय है कि हिंदू राव दिल्ली नगर निगम का सबसे बड़ा अस्पताल है जिसकी बिस्तरों की क्षमता 900 है और इस समय यह कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए समर्पित है. पहले अस्पताल के कई स्वास्थ्यकर्मी भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं.

हिंदू राव अस्पताल भाजपा नीत उत्तरी दिल्ली नगर निगम के न्यायाधिकार क्षेत्र में आता है.

जैन ने कहा, ‘भाजपा इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है. वे विभिन्न करों से कमाते हैं और अगर अपने अस्पतालों को चला नहीं सकते तो उन्हें (उत्तर दिल्ली नगर निगम को) इन्हें दिल्ली सरकार को सौंप देना चाहिए.’

वेतन की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से लगातार चल रहे प्रदर्शन के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने प्रशासन को बीते शुक्रवार को कहा था कि अगले 48 घंटे में अगर उनका वेतन नहीं जारी किया गया तो वे कोविड वार्ड में अपनी सेवाएं बंद कर देंगे.

रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अभिमन्यु सरदाना ने कहा था कि हम हड़ताल पर मजबूर हुए हैं, क्योंकि चार माह (जून) से वेतन न मिलने की वजह घर चलाना मुश्किल हो गया है. प्रशासन 48 घंटे में वेतन जारी करें नहीं तो वेतन न मिलने तक यह हड़ताल जारी रहेगी.

बीते सितंबर महीने में हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों ने एक ऑनलाइन कैंपेन शुरू किया है, जिसके तहत वे लंबित वेतन जारी करने की मांग कर रहे थे.

बता दें कि जून में हुई सुनवाई में कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के वेतन का भुगतान नहीं किए जाने के मामलों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि देश महामारी के खिलाफ युद्ध में अंसतुष्ट सैनिकों को बर्दाश्त नहीं कर सकता.

अदालत ने सरकार से इन कोरोना वॉरियर्स के लिए धनराशि जुटाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने को कहा था.

बीते जुलाई महीने में भी हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों ने अदालत के दखल के बावजूद पिछले तीन महीने से वेतन न मिलने को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखा था.

द वायर  द्वारा अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि नॉर्थ एमसीडी के तहत आने वाले दो अस्पतालों- कस्तूरबा और हिंदू राव के 350 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टरों ने तीन से चार महीने तक का वेतन न मिलने की बात कहते हुए सामूहिक इस्तीफा देने की धमकी दी थी.

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने नॉर्थ एमसीडी को उसके तहत आने वाले कस्तूरबा गांधी और हिंदू राव समेत छह अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों को मार्च का वेतन 19 जून तक देने का निर्देश दिया था. इसके बाद उन्हें दो महीने का वेतन मिला था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)