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छत्तीसगढ़: पत्रकार पर हमले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की

छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले का मामला. पत्रकार कमल शुक्ला ने कांग्रेस नेताओं पर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था. मामले को लेकर कांकेर थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है.

पत्रकार कमल शुक्ला (फोटो: ट्विटर/तामेश्वर सिंह)

पत्रकार कमल शुक्ला (फोटो: ट्विटर/तामेश्वर सिंह)

रायपुर: छत्तीसगढ़ के कांकेर स्थित पत्रकार कमल शुक्ला, जीवांदा हलधर और सतीश यादव पर बस्तर स्थित एक पुलिस स्टेशन में हमले के 16 दिनों बाद बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ने शनिवार को पुलिस स्टेशन प्रभारी को निलंबित कर दिया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आईजी ने राज्य सरकार के दिशानिर्देश पर उसी पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर के नेतृत्व में तीन सदस्यों की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है.

यह कदम छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गठित एक छह सदस्यीय पत्रकार समिति द्वारा शनिवार को सौंपी गई रिपोर्ट के बाद उठाया गया.

अपनी रिपोर्ट में समिति ने कहा कि कर्फ्यू के बावजूद कांकेर पुलिस स्टेशन के बाहर भीड़ ने पत्रकारों पर हमला किया गया और केवल एक आरोपी पर कार्रवाई करने के कांग्रेस के फैसले ने अच्छा संदेश नहीं दिया. समिति ने कमल शुक्ला और सतीश यादव द्वारा दायर आरोपों को भी एफआईआर में शामिल करने की सिफारिश की है.

हालांकि, कमल शुक्ला ने यह दावा करते हुए रिपोर्ट की आलोचना की है कि उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया.

उन्होंने कहा, ‘उन्होंने सतीश यादव से फोन पर बात की और कोविड-19 का हवाला देते हुए हमसे नहीं मिले. अगर उनकी रिपोर्ट पर सरकार कार्रवाई कर रही है तो एक अन्य एसआईटी क्यों? उनके द्वारा की गई कार्रवाई बहुत देर से और बहुत कम है.’

राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, ‘मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर कांकेर थाना प्रभारी मोरध्वज देशमुख को बस्तर आईजी सुंदरराज ने निलंबित कर दिया है. पत्रकारों की समिति की तथ्यात्मक रिपोर्ट के बाद इस घटना की जांच के लिए बस्तर आईजी द्वारा एक एसआईटी का गठन किया गया है. सीएम ने आईजी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.’

बता दें कि बीते 26 सितंबर को भूमकाल समाचार के संपादक कमल शुक्ला पर कांकेर के कोतवाली पुलिस स्टेशन के बाहर कथित तौर पर हमला कर दिया गया था. आरोप है कि यह हमला कुछ कांग्रेस नेताओं के इशारे पर कराया गया, जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

आरोपियों में कांकेर वार्ड पार्षद शादाब खान, पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह ठाकुर, पत्रकार गणेश तिवारी और स्थानीय कांग्रेस विधायक के सहयोगी अब्दुल गफ्फार मेमन शामिल हैं.

इस मामले में मेमन को गिरफ्तार कर लिया गया है. मेमन ने भी शिकायत दर्ज कराई है कि शुक्ला ने कांकेर पुलिस स्टेशन में उन पर हमला किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी.

पिछले आठ दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शुक्ला तबीयत बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती हैं. वे अवैध बालू खनन के खिलाफ रिपोर्टिंग कर रहे थे. उनका आरोप है कि जिले में ऐसी गतिविधियों में कुछ कांग्रेस नेता शामिल हैं. वह कांकेर में जिला और स्थानीय नागरिक निकाय में अनियमितता पर भी रिपोर्ट कर रहे थे.

तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान शुक्ला ने सरकार द्वारा सताए गए पत्रकारों की सुरक्षा के लिए एक समिति ‘पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति’ बनाई थी.

राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एक समिति के अलावा कांग्रेस पार्टी ने मामले की जांच के लिए 1 अक्टूबर को एक अन्य समिति बनाई थी.

हालांकि, अगले दिन जिला अधिकारी और कोतवाली पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शुक्ला पत्रकारों के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय तक जाने के लिए रैली निकालने लगे लेकिन उन्हें रोक दिया गया. इसके अगले दिन वे भूख हड़ताल पर बैठ गए.

इस बीच पूरे भारत के 25 पत्रकारों ने सीएम भूपेश बघेल को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेट जांच की मांग की है. उन्होंने प्रोटेक्शन ऑफ मीडियापर्सन एक्ट की भी मांग की जिसका राज्य में सत्ता में आने से पहले कांग्रेस द्वारा वादा किया गया था.

वहीं, शुक्ला ने हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए रविवार को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.