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महाराष्ट्र: साहूकार के कथित उत्पीड़न के बाद क़र्ज़ में डूबे किसान ने आत्महत्या की

मामला महाराष्ट्र के बीड ज़िले का है. पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से मिले एक सुसाइड नोट में किसान ने साहूकार पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है, जिसके बाद साहूकार को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

औरंगाबाद: महाराष्ट्र के बीड जिले में कर्ज में डूबे एक किसान ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. आरोप है कि सूद समेत पूरी रकम चुकाने के लिए साहूकार द्वारा परेशान किए जाने और पीटे जाने के बाद उसने यह कदम उठाया. पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि ऋण देने वाले साहूकार युवराज बहिर को गिरफ्तार कर लिया गया है.

पुलिस उप-निरीक्षक सुरेश माली ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि बीड के गांव राजुरी (नवगान) में रविवार को किसान गंगाराम गावड़े (45) ने अपने घर के पास एक पेड़ से कथित रूप से फांसी लगा ली.

अधिकारी ने बताया कि गावड़े द्वारा कथित तौर पर लिखा गया एक सुसाइड नोट घटनास्थल पर पाया गया, जिसमें उन्होंने बहिर पर उनका उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था.

उन्होंने बताया कि गावड़े ने बहिर से 2,000 रुपये लिए थे, जो कथित तौर पर ब्याज सहित 28,000 रुपये का भुगतान करने के लिए कह रहा था और उन्हें धमकी भी दे रहा था.

अधिकारी ने बताया कि नौ अक्टूबर को साहूकार ने गावड़े को अपने फार्म में बुलाया, जहां उनके साथ कथित रूप से मारपीट की और उनका दोपहिया वाहन भी छीन लिया.

अधिकारी ने बताया कि आरोपी साहूकार को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 323 (चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

बता दें कि हाल ही में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक क़र्ज़ माफ़ी के बावजूद 2019 में महाराष्ट्र में सर्वाधिक किसानों ने आत्महत्या की थी.

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक पिछले कई सालों से राज्य में हर साल 3,500 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है.

साल 2016 में देश भर में कुल 11,379 किसानों ने आत्महत्या की थी और इसमें से 3,661 मामले महाराष्ट्र के थे. साल 2019 में महाराष्ट्र में कुल 3,927 किसानों ने आत्महत्या की.

साल 2014 में 4,000 और साल 2015 में 4,291 किसानों ने आत्महत्या की थी. सूखा, बाढ़, फसल बर्बाद, कर्ज में वृद्धि जैसी कई वजहे हैं, जिसके कारण किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)