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बार्क ने न्यूज़ चैनलों की रेटिंग को क़रीब तीन सप्ताह के लिए निलंबित किया

बीते आठ अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने टेलीविजन रेटिंग पॉइंट (टीआरपी) से छेड़छाड़ करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया था. मुंबई के पुलिस आयुक्त ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी सहित तीन चैनलों ने टीआरपी के साथ हेराफेरी की है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक समूह से कहा कि मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज मामले में वह बॉम्बे हाईकोर्ट जाए.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

मुंबई/नई दिल्ली: ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने कथित रूप से फर्जी टीआरपी घोटाले के बाद गुरुवार को न्यूज चैनलों की रेटिंग को अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की.

इस कवायद में हिंदी, अंग्रेजी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं के सामान्य समाचार चैनल और बिजनेस समाचार चैनल शामिल हैं. हालांकि बार्क सरकारी और भाषायी समाचारों के साप्ताहिक दर्शकों के अनुमान को जारी करता रहेगा.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि काउंसिल ‘सांख्यिकीय मजबूती’ में सुधार के लिए माप के वर्तमान मानकों की समीक्षा करने और उन्हें बेहतर बनाने का इरादा रखती है, और इस कवायद के चलते साप्ताहिक रेटिंग 12 सप्ताह (तकरीबन तीन महीने) तक ‘स्थगित’ रहेगी.

इससे पहले मुंबई पुलिस ने कथित टीआरपी घोटाले में कम से कम पांच लोगों को गिरफ्तार किया था. मुंबई पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में घोटाले का भंडाफोड़ किया. मुंबई के पुलिस आयुक्त ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी सहित तीन चैनलों ने टीआरपी के साथ हेराफेरी की है.

गिरफ्तार किए गए लोगों में समाचार चैनलों के कर्मचारी भी शामिल हैं, जबकि पुलिस इस संबंध में अर्णब गोस्वामी के नेतृत्व वाले रिपब्लिक टीवी के अधिकारियों से भी पूछताछ कर रही है.

रिपब्लिक टीवी ने कुछ भी गलत करने से इनकार किया है.

बार्क द्वारा दिए जाने वाले दर्शकों के अनुमानों से विज्ञापन का खर्च प्रभावित होता है. मुंबई पुलिस का आरोप है कि जिन घरों में मॉनिटर लगाए गए थे, उन्हें प्रभावित करके रेटिंग में हेराफेरी की जा रही थी.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर बार्क बोर्ड ने प्रस्ताव दिया है कि माप के मौजूदा मानकों और डेटा जमा करने के तरीकों को बेहतर बनाने की जरूरत है.

इसके साथ ही काउंसिल ने कहा कि मॉनिटरिंग वाले घरों में किसी तरह की घुसपैठ के प्रयासों को नाकाम करने के लिए ये कवायद की जा रही है.

बयान में कहा गया, ‘इस कवायद के दौरान सभी समाचार चैनलों के लिए बार्क की साप्ताहिक व्यक्तिगत रेटिंग का प्रकाशन बंद रहेगा.’

बार्क ने कहा कि यह कवायद आठ से 12 सप्ताह तक चलेगी और इसमें सत्यापन तथा परीक्षण शामिल है.

बार्क के चेयरमैन पुनीत गोयनका ने कहा, ‘उद्योग और काउंसिल के लिए अपने कड़े प्रोटोकॉल की समीक्षा करने और इन्हें आगे और मजबूत बनाने के लिए कुछ दिन के लिए निलंबन जरूरी है.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बार्क इंडिया के सीईओ सुनील लुल्ला ने कहा, बार्क में हम सच्चाई और ईमानदारी से बताते हैं कि भारत क्या देख रहा है. हम पूरी जिम्मेदारी के साथ यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे दर्शक का अनुमान (रेटिंग) उनके उद्देश्य के अनुरूप सही बने रहें.

मालूम हो कि बीते आठ अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने ‘टेलीविजन रेटिंग पॉइंट’ (टीआरपी) से छेड़छाड़ करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया था. मुंबई के पुलिस आयुक्त ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी सहित तीन चैनलों ने टीआरपी के साथ हेराफेरी की है.

पुलिस के अनुसार, यह गोरखधंधा उस समय सामने आया जब टीआरपी का आकलन करने वाले संगठन बार्क ने हंसा रिसर्च समूह के माध्यम से इस बारे में एक शिकायत दर्ज कराई.

इस मामले में कुछ लोगों को गिरफ्तार करने के एक दिन बाद नौ अक्टूबर को पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया के मुख्य वित्त अधिकारी शिव सुब्रमण्यम सुंदरम, वितरण विभाग के प्रमुख घनश्याम सिंह, दो विज्ञापन एजेंसियों और बॉक्स सिनेमा और फक्त मराठी के अकाउंटेंट को तलब किया था.

हालांकि, सिर्फ विज्ञापन एजेंसियों के अधिकारी- मैडिसन के प्रमुख सैम बलसारा और आईपीजी मीडिया ब्रांड्स के सीईओ शशि सिन्हा ही पूछताछ के लिए पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे. उनसे आठ से अधिक घंटों तक पूछताछ की गई थी.

वहीं, रिपब्लिक के सीएफओ शिव सुब्रमण्यम सुंदरम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जल्द सुनवाई की मांग की और मुंबई पुलिस के समन को भी चुनौती दी.

मुंबई पुलिस ने इस मामले में विशाल भंडारी, बोम्पल्ली राव, बॉक्स सिनेमा के मालिक नारायण शर्मा और फक्त मराठी चैनल के मालिक शिरीष शेट्टी को गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

गौरतलब है कि टीआरपी से यह पता चलता है कि कौन-सा टीवी कार्यक्रम सबसे ज्यादा देखा गया. इससे दर्शकों की पसंद और किसी चैनल की लोकप्रियता का भी पता चलता है.

गोपनीय तरीके से कुछ घरों में टीवी चैनल के दर्शकों के आधार पर टीआरपी की गणना की जाती थी. देश में ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च कॉउंसिल (बार्क) टीवी चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग जारी करता है.

सुप्रीम कोर्ट ने टीआरपी घोटाले में रिपब्लिक टीवी से कहा, बॉम्बे हाईकोर्ट जाएं

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अर्णब गोस्वामी के रिपब्लिक मीडिया समूह से कहा कि टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स (टीआरपी) में हेराफेरी करने के आरोप में मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज मामले में वह बॉम्बे हाईकोर्ट जाए. शीर्ष अदालत ने कहा, ‘हमें उच्च न्यायालयों में भरोसा रखना चाहिए.’

जस्टिस धनंजय वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी हाईकोर्ट काम करता रहा है और मीडिया समूह को वहां जाना चाहिए.

इस मीडिया हाउस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इस मामले में चल रही जांच को लेकर आशंका व्यक्त की.

इस पर पीठ ने कहा, ‘आपके मुवक्किल का वर्ली (मुंबई) में कार्यालय है? आप बॉम्बे हाईकोर्ट में जा सकते हैं. हाईकोर्ट द्वारा मामले को सुने बगैर ही इस तरह से याचिका पर विचार करने से भी संदेश जाता है. हाईकोर्ट महामारी के दौरान भी काम कर रहा है.’

साल्वे ने इस पर हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस ले ली.

मुंबई पुलिस ने टीआरपी घोटाले में एक मामला दर्ज किया है और उसने रिपब्लिक टीवी के मुख्य वित्त अधिकारी एस. सुन्दरम को जांच के लिए तलब किया है.

शीर्ष अदालत में यह याचिका रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के स्वामित्व वाली आर्ग आउटलायर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने दायर की थी और इसमें पुलिस द्वारा जारी सम्मन निरस्त करने का अनुरोध किया गया था.

इससे पहले, मुंबई पुलिस ने शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दाखिल करके रिपब्लिक मीडिया समूह की याचिका खारिज करने का अनुरोध किया था.

मुंबई पुलिस ने दलील दी थी कि याचिकाकर्ता कथित टीआरपी रेटिंग्स के साथ हेराफेरी की जांच निरस्त कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(ए) का सहारा नहीं ले सकते हैं.

पुलिस का कहना था कि कानून के तहत किसी भी अपराध की जांच के मामले में इस अनुच्छेद की आड़ नहीं ली जा सकती है.

पुलिस का कहना था कि उसके द्वारा दर्ज प्राथमिकी में अगर कोई मामला बनता है तो उस पर इस समय फैसला नहीं किया जा सकता है.

पुलिस के अनुसार, इस मामले में जांच अभी जारी है और ऐसी कोई विशेष परिस्थिति पैदा नहीं हुई है कि इस न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इसमें हस्तक्षेप करना पड़े.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)