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असम में बंद होंगे सरकारी मदरसे और संस्कृत विद्यालय: हिमंता बिस्वा शर्मा

असम के शिक्षा मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा का कहना है कि राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा और सरकार द्वारा संचालित सभी मदरसों को उच्च विद्यालयों में तब्दील कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए नवंबर में अधिसूचना जारी की जाएगी.

असम के मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा (फोटो साभार: फेसबुक/@himantabiswasarma)

असम के मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा (फोटो साभार: फेसबुक/@himantabiswasarma)

गुवाहाटीः असम के शिक्षा मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा का कहना है कि राज्य में सरकार द्वारा संचालित सभी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों को बंद किया जाएगा. इस संबंध में अधिसूचना नवंबर में जारी की जाएगी.

शिक्षा मंत्री ने गुवाहाटी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा और सरकार द्वारा संचालित सभी मदरसों को उच्च विद्यालयों में तब्दील किया जाएगा. मौजूदा छात्रों को नियमित छात्रों के तौर पर नए सिरे से दाखिले लिए जाएंगे.’

उन्होंने कहा, ‘अंतिम वर्ष के छात्रों को उत्तीर्ण होकर वहां से निकलने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन इन स्कूलों में अगले साल जनवरी में प्रवेश लेने वाले सभी छात्रों को नियमित छात्रों की तरह पढ़ाई करनी होगी.’

उन्होंने कहा कि मदरसे देश की आजादी से पूर्व के काल में खोले गए थे और ये मुस्लिम लीग की विरासत हैं.

समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, शर्मा ने कहा, ‘हम जल्द ही इस संदर्भ में आवश्यक रेगुलेशन शुरू करेंगे. राज्य सरकार ने मदरसों पर किए गए शोध के आधार पर यह फैसला लिया है. असम में सरकारी मदरसों को या तो नियमित स्कूलों में तब्दील किया जाएगा या उन्हें बंद किया जाएगा. अगले महीने सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद इन मदरसों के शिक्षकों का नियमित स्कूलों में तबादला किया जाएगा.’

उन्होंने कहा, एकरूपता लाने के लिए सरकारी खर्च पर कुरान को पढ़ाए जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

उन्होंने कहा कि मदरसे में पढ़ रहे अधिकतर बच्चे डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहते हैं और वे इस बात से वाकिफ नहीं है कि मदरसा नियमित स्कूल नहीं है.

मंत्री ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों को कुमार भास्करवर्मा संस्कृत विश्वविद्यालय को सौंपकर शिक्षण एवं अध्ययन केंद्रों में तब्दील किया जाएगा, जहां भारतीय संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रवाद का अध्ययन कराया जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘यह कदम इसलिए उठाया गया है, ताकि इन छात्रों को भी असम माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सेबा) के तहत नियमित शिक्षा मिल सके.’

मदरसों और संस्कृत विद्यालयों से पढ़ाई करने वाले छात्रों को नियमित विद्यालयों के समान वेटेज दिया जाएगा.

उनसे जब पूछा गया कि क्या यह फैसला अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लिया गया है?

इस पर उन्होंने कहा, ‘यह चुनावी मुद्दा कैसे हो सकता है. हम केवल सरकार द्वारा संचालित मदरसों को बंद कर रहे हैं, न कि निजी मदरसों को.’

उन्होंने कहा कि असम में सरकार द्वारा संचालित 610 मदरसे हैं, जिन पर सरकार के सालाना 260 करोड़ रुपये खर्च होते हैं.

असम में लगभग 1,000 मान्यता प्राप्त संस्कृत विद्यालय हैं, जिनमें से लगभग 100 सरकारी सहायता प्राप्त हैं और राज्य सरकार इन संस्कृत पाठशालाओं पर वार्षिक तौर पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)