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त्रिपुरा-मिज़ोरम सीमा पर मंदिर निर्माण को लेकर विवाद, धारा 144 लागू

त्रिपुरा-मिज़ोरम सीमा पर जम्पुई हिल्स स्थित फुलडुंगसेई गांव में बन रहे शिव मंदिर को लेकर विवाद हुआ है. त्रिपुरा सरकार का दावा है कि यह गांव उत्तरी त्रिपुरा ज़िले में है, जबकि मिज़ोरम सरकार का कहना है कि यह गांव उसके मामित ज़िले की सीमा में है.

(फोटो साभार: wikimapia.org)

(फोटो साभार: wikimapia.org)

गरतलाः मिजोरम सरकार ने त्रिपुरा-मिजोरम सीमा पर जम्पुई हिल्स पर स्थित फुलडुंगसेई गांव में शिव मंदिर बनाने की एक सामाजिक संगठन की कथित कोशिशों के बाद वहां सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है.

हालांकि, त्रिपुरा सरकार का दावा है कि यह गांव उत्तरी त्रिपुरा जिले में है, जबकि मिजोरम सरकार का कहना है कि यह गांव उसके मामित जिले की सीमा में है.

मिजोरम के मामित जिला दंडाधिकारी लालरोजामा का कहना है कि सोंगरोमा नामक सामाजिक संगठन जिले की सीमा में स्थित थाईदाव तलांग में 19 और 20 अक्टूबर को मंदिर का निर्माण करना चाहता है, इसलिए बीते 16 अक्टूबर से ही  यहां निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है.

मिजोरम सरकार का कहना है कि राज्य सरकार की अनुमति के बिना इसकी योजना बनाई गई है और इससे क्षेत्र में शांति भंग हो सकती है.

वहीं, उत्तर त्रिपुरा जिला दंडाधिकारी नागेश कुमार और पुलिस अधीक्षक भानूपाड़ा चक्रवर्ती के नेतृत्व में एक दल ने शनिवार को गांव का दौरा किया.

त्रिपुरा सरकार के अधिकारियों ने बताया कि फुलडुंगसेई गांव त्रिपुरा के प्रशासनिक नियंत्रण में आता है और उसने मिजोरम सरकार के समक्ष यह मामला उठाया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिपुरा सरकार ने शनिवार को मिजोरम सरकार को पत्र लिखकर कहा कि इन आदेशों को वापस लिया जाना चाहिए.

मिजोरम सरकार के उपसचिव डेविड एच ललथंगलियाना को लिखे पत्र में त्रिपुरा सरकार के अतिरिक्त सचिव एके भट्टाचार्य ने कहा कि निषेधात्मक आदेश अत्यधिक आपत्तिजनक है क्योंकि बेटलिंगचिप जिसे थाइडावर यलांग (जम्पुई हिल्स की सबसे ऊंची चोटी) भी कहा जाता है, वह त्रिपुरा सरकार के नियंत्रण के तहत आता है.

उन्होंने मामित जिला मजिस्ट्रेट से जल्द से जल्द इन प्रतिबंधात्मक आदेश को वापस लेने का आग्रह किया है.

बता दें कि इस गांव को लेकर त्रिपुरा और मिजोरम के बीच विवाद अगस्त महीने में उस समय शुरू हुआ था, जब कुछ ऐसे लोगों के बारे में पता चला जिनके नाम दोनों राज्यों की मतदाता सूची में शामिल थे और ये लोग दोनों राज्यों की जनकल्याण योजनाओं का लाभ उठा रहे थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)