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अडाणी समूह को एयरपोर्ट की लीज़ देने के ख़िलाफ़ केरल सरकार की याचिका हाईकोर्ट से ख़ारिज

केरल सरकार ने कहा है कि वह इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी. इसी साल 19 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने तिरुवनंतपुरम सहित तीन हवाई अड्डों को पट्टे पर अडाणी समूह को सौंपने को मंज़ूरी दे दी थी.

(फोटो साभार: swarajyamag.com)

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नई दिल्ली: केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दी, जिसमें केंद्र द्वारा अडाणी समूह को दी गई तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की लीज को स्थगित करने की मांग की गई थी. राज्य सरकार ने 21 अगस्त को ये याचिका दायर की थी.

इसके बाद केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को देने के केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था. सरकार ने मांग की थी कि हवाई अड्डे के प्रबंधन को राज्य सरकार के एक विशेष उद्देश्य वाहन (एसपीवी) को सौंप दिया जाना चाहिए.

याचिका खारिज होने पर केरल सरकार में मंत्री कडकम्पल्ली सुरेंद्रन ने एनडीटीवी से कहा, ‘राज्य सरकार सभी कानूनी विकल्पों के आधार पर आगे कदम उठाएगी और सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जाएगी. तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट को ‘बेचने’ का केंद्र सरकार का फैसला दिनदहाड़े लूट है.’

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते 19 अगस्त को जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डों को पट्टे पर अडाणी समूह को देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.

बता दें कि सरकार ने नवंबर, 2018 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) द्वारा परिचालित किए जाने वाले छह हवाईअड्डों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत चलाने की अनुमति दी थी. इसके लिए मंगाई गईं बोलियां बीते 25 फरवरी , 2019 को खोली गई थीं.

सभी छह- अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम, लखनऊ, मेंगलुरु, जयपुर और गुवाहाटी हवाईअड्डों के परिचालन के लिए अडाणी समूह ने सबसे ऊंची बोली लगाई थी और संचालन के अधिकार हासिल किए थे.

पिछले साल केंद्रीय कैबिनेट ने अहमदाबाद, लखनऊ और मंगलुरु हवाईअड्डों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत 50 सालों के लिए अडाणी समूह को देने के नागरिक विमानन मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी.

इसके विरोध में दायर केरल सरकार की याचिका को केरल हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी और कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह विचारयोग्य नहीं है.

उसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील दायर की थी. शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया और मेरिट के आधार पर फैसले के लिए मामले को फिर से उसके पास भेज दिया था.

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार विस्तृत सुनवाई के लिए मामले को स्थगित करते हुए 25 अगस्त को केरल उच्च न्यायालय ने एक बार फिर लीज की कार्यवाही को रोकने से इनकार कर दिया था.