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कोटखाई रेप-हत्या: तीन साल में दो बार मामला सुलझा, अब नए सिरे से जांच की मांग

जुलाई 2017 में शिमला के कोटखाई में स्कूल से लौट रही एक नाबालिग छात्रा की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. पहले एसआईटी और फिर सीबीआई ने मामले को सुलझाने का दावा किया था. अब पीड़ित परिवार जांच में विसंगतियों का आरोप लगाते हुए दोबारा जांच शुरू करने की मांग के साथ हाईकोर्ट पहुंचा है.

16 साल की लड़की का बलात्कार कर हत्या करने के बाद लोगों को गुस्सा भड़क गया था. लोगों ने कई दिनों तक राजधानी शिमला में प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया था. (फोटो: पीटीआई)

16 साल की लड़की का बलात्कार कर हत्या करने के बाद लोगों को गुस्सा भड़क गया था और उन्होंने कई दिनों तक राजधानी शिमला में प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया था. (फाइस फोटो: पीटीआई)

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में 2017 में 16 साल की नाबालिग छात्रा से बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई थी. अब पीड़िता की मां ने सुप्रीम कोर्ट से आपराधिक रिट याचिका वापस लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रुख कर मामले की दोबारा जांच की मांग की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित पक्ष से कहा था कि याचिकाकर्ताओं को सभी शिकायतों के निवारण के लिए संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर करनी चाहिए, जिसके बाद परिवार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है.

इस मामले में पीड़ित परिवार को कानूनी मदद दे रहे शिमला के संगठन मदद सेवा ट्रस्ट के मुताबिक, यह मानकर कि अपराध में एक से अधिक लोग शामिल थे, पीड़ित परिवार ने जांच में कुछ विसंगतियों का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है.

अब तक का घटनाक्रम

चार जुलाई 2017 को शिमला के कोटखाई में कक्षा दसवीं में पढ़ने वाली 16 साल की छात्रा स्कूल से घर लौट रही थी लेकिन कभी घर नहीं पहुंची.

उसका भाई और स्कूल में पढ़ने वाले अन्य साथी, जो आमतौर पर स्कूल से घर लौटते समय उसके साथ रहते थे, वे स्कूल में खेल टूर्नामेंट होने की वजह से उस दिन उसके साथ नहीं थे.

इस वजह से छात्रा ने अकेले ही घर लौटने का फैसला किया था. लेकिन वह घर नहीं पहुंची. दो दिन बाद उसका शव जंगल में एक खाई से बरामद हुआ.

उसके कपड़े, शराब की एक खाली बोतल और कुछ अन्य सामान उसके शव के आसपास बिखरा पड़ा था. ऑटोप्सी में पता चला कि उसका बलात्कार करने के बाद गला घोंटकर हत्या की गई थी. इस घटना के बाद शिमला, कोटखाई समेत कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ.

पहली गिरफ्तारी

एक हफ्ते बाद आईजी जहूर एच. जैदी की अगुवाई में राज्य पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बलात्कार और हत्या के आरोप में इलाके के छह लोगों को गिरफ्तार किया.

आरोपियों में से एक सूरज सिंह (29) जो पेशे से मजदूर था, की कोटखाई पुलिस थाने में पूछताछ के दौरान 18-19 जुलाई की दरम्यानी रात मौत हो गई.

पुलिस का आरोप था कि उसके एक सहयोगी ने उसकी हत्या की. आरोपी की हिरासत में हुई मौत से विरोध प्रदर्शन और तेज हुआ और अनुचित जांच की अटकलों ने अगले दिन कोटखाई और ठियोग में विरोध के सुर को तेज कर दिया.

इसका नतीजा यह हुआ कि एक उग्र भीड़ ने कोठखाई पुलिस थाने को जलाकर खाक कर दिया और पुलिस वाहनों को नष्ट कर दिया गया.

उसी दिन हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए.

एसआईटी प्रमुख गिरफ्तार

आरोपी सूरज की हिरासत में हुई मौत की जांच का सीबीआई को सौंपने के कुछ दिनों बाद अगस्त 2017 में आईजी जैदी सहित आठ पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया.

उनके खिलाफ मामले को चंडीगढ़ में सीबीआई की अदालत में शिफ्ट किया गया, जहां वर्तमान में नौ लोगों के खिलाफ मामला चल रहा है.

कुछ पुलिस अधिकारियों को पिछले साल सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी, उन्हें राज्य पुलिस में बहाल कर दिया गया.

इस साल की शुरुआत में हालांकि हिमाचल प्रदेश की एसपी ने अदालत को बताया था कि जैदी ने उन पर अपना बयान बदलने के लिए दबाव डाला था.

इसके बाद अदालत ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी और वह अब सलाखों के पीछे हैं. इस बीच इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं और गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं.

जांच 2.0

सीबीआई को जांच में पता चला कि पहले गिरफ्तार किए गए लोगों का डीएनए घटनास्थल से लिए गए सैंपल्स के डीएनए और पीड़िता के शव से लिए गए डीएनए से मेल नहीं खाता.

आरोपियों के गुजरात के फॉरेंसिक लैब में पॉलीग्राफ, नार्को और ब्रेन मैपिंग जैसे टेस्ट भी कराए गए.  सीबीआई के मुताबिक इस घटना में छह लोगों के शामिल होने को साबित नहीं किया जा सका था और आखिरकार बचे हुए पांच आरोपियों को मामले से बरी कर दिया गया.

 

जांचकर्ताओं ने सिरे से दोबारा सबूत जुटाने और इलाके के लोगों, पीड़िता के स्कूल के शिक्षकों, छात्रों, परिवार के सदस्यों, बस ड्राइवरों, मजदूरों और घटनास्थल के आसपास के अन्य लोगों से पूछताछ करनी शुरू की.

इस प्रक्रिया के दौरान डीएनए एनालिसिस के लिए 250 लोगों के खून के नमूने इकट्ठा किए गए.

घटनास्थल से मिले वीर्य के वाईएसटीआर एनालिसिस जैसे उन्नत फॉरेंसिक तकनीक का इस्तेमाल कर और सूत्रों की खबर पर कार्रवाई कर सीबीआई अधिकारियों को एक लकड़हारे का पता चला, जो अपराध के बाद इलाके से चला गया था.

कांगड़ा में उसके परिवार का पता लगाया गया और उसकी मां का डीएनए लिया गया , जिससे यह पता लगाया गया कि उनका बेटा ही अपराधी था.

लेकिन संदिग्ध अनिल कुमार उर्फ नीलू ‘चरनी’ का कोई अत-पता नहीं था और पहले ही एक मामले में उसे अपराधी घोषित किया जा चुका था.

उसे महीनों बाद अप्रैल 2018 में सीडीआर सर्विलांस के बाद शिमला के हाटकोटी में एक बाग से गिरफ्तार किया गया. सीबीआई के मुताबिक, उसका डीएनए घटनास्थल से मिले डीएनए से मेल खाता था.

चार्जशीट, ट्रायल

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, अपराध के दिन नीलू ने शराब पी थी और स्कूल से घर लौट रही पीड़िता से वह सुनसान जगह पर टकरा गया. पहले उसका पीड़िता से विवाद हुआ, जिसके बाद उसने नाबालिग को दबोच लिया और उसे रास्ते से सटे जंगल में ले गया, जहां उसका बलात्कार किया और फिर गला घोंटकर हत्या कर दी गई.

इसके बाद वह वहां से चला गया लेकिन 800 मीटर दूर एक घर से शराब खरीदने के बाद फिर लौटा. घटनास्थल से जाने के दौरान वह शराब की खाली बोतल को वहीं छोड़ गया, सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, जिनकी शिनाख्त उसे बेचने वाले ने  की.

चार्जशीट में कहा गया है कि घटना के पहले और बाद में इलाके के कई लोगों ने उसे देखा और घटना के दिन उसे शराब बेचने वाले शख्स ने उसे पहचान लिया.

गवाहों में एक विधवा महिला भी थी, जिसका आरोपी ने नाबालिग छात्रा की हत्या के एक-दो दिन बाद कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया था.

चार्जशीट के सानुसार, उसने कथित तौर पर किसी के कपड़े चुराने की भी कोशिश की थी और कुछ दिनों बाद इलाके से रवाना होने से पहले एक अन्य महिला से भी छेड़छाड़ की थी.

नीलू के खिलाफ मुकदमे में अंतिम बहस चल रही है, जहां अभियोजन पक्ष के 55 गवाहों ने शिमला में सीबीआई अदालत के समक्ष कैमरा के सामने गवाही दी है.