राजनीति

पलानीसामी बने तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री

सरकार गठन को लेकर तमिलनाडु में पिछले 10 दिनों से चल रहा गतिरोध खत्म हो गया है. शशिकला के विश्वस्त इदापडी के. पलानीसामी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है.

Edapadi K Palanisamy

राज्यपाल सी. विद्यासागर राव के साथ इदापडी के. पलानीसामी (बाएं). (फाइल फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद तकरीबन दो महीनों में राज्य को तीसरा मुख्यमंत्री मिला है. दिसंबर में जयललिता के निधन के बाद ओ. पन्नीरसेल्वम राज्य के मुख्यमंत्री बनाए गए थे.

पन्नीरसेल्वम का कार्यकाल अभी कुछ दिन का ही हुआ था कि पार्टी में जयललिता की करीबी वीके शशिकला को मुख्यमंत्री बनाने की कोशिशें तेज हो गईं. शशिकला को पांच फरवरी को पार्टी के विधायी दल की नेता चुना गया था लेकिन ओ. पन्नीरसेल्वम की बगावत उनकी राह का रोड़ा बन गई. हालांकि उनकी इस हसरत पर सुप्रीम कोर्ट ने पानी फेर दिया. आय से अधिक संपत्ति के 21 साल पुराने मामले में शशिकला को चार साल की सज़ा हो गई.

बहरहाल बृहस्पतिवार सुबह राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने अन्नाद्रमुक के विधायी दल के नेता पलानीसामी से कहा कि वह जल्द से जल्द अपने मंत्रिमंडल का गठन करें और 15 दिन के भीतर विधानसभा में विश्वास मत हासिल करें.

राज्यपाल का यह निमंत्रण पलानीसामी द्वारा 14 फरवरी को जमा कराए गए पत्र की स्वीकृति के रूप में आया है. उस पत्र में पलानीसामी ने कहा था कि उन्हें उस दिन विधायकों की एक बैठक में अन्नाद्रमुक के विधायी दल का नेता चुना गया है. उसी दिन राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी. 14 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला को दोषी करार दिए जाने के बाद से पलानीसामी और राज्यपाल के बीच की यह तीसरी मुलाकात थी.

बहरहाल, जैसे ही पलानीसामी के नए मुख्यमंत्री बनने की खबर आई, शशिकला के समर्थकों ने उसका स्वागत किया और राज्यपाल के फैसले की सराहना की. पिछले एक हफ्ते से चेन्नई से 80 किमी. दूर स्थित कूवाथुर रिजॉर्ट में रह रहे विधायकों ने मुस्कुराते हुए चिन्नम्मा (शशिकला) के नाम के नारे लगाए. ये वहीं विधायक हैं, जिनके कुशलक्षेम के बारे में पुलिस पूछ रही थी.

हालांकि राज्यपाल ने पिछले दो दिन में पन्नीरसेल्वम और पलानीसामी के नेतृत्व वाले दोनों ही प्रतिद्वंद्वी धड़ों के साथ बैठकें कर ली हैं, अब ऐसा प्रतीत होता है कि वह भावी मुख्यमंत्री को मिलने वाले विधायकों के समर्थन के चलते आए संवैधानिक जनादेश का पालन कर रहे हैं. पलानीसामी का दावा है कि उन्हें 124 विधायकों का समर्थन हासिल है.

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सोमवार को राव को सलाह दी थी कि वे शक्ति परीक्षण के लिए एक हफ्ते के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं.