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भारत के रॉ प्रमुख के साथ नेपाल के प्रधानमंत्री की ‘गोपनीय मुलाकात’ को लेकर विवाद

नेपाल के विपक्ष और प्रधानमंत्री केपी ओली की पार्टी के नेताओं ने गुपचुप तरीके से हुई इस बैठक को राष्ट्रीय हितों के विपरीत बताया है. नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्रियों और अन्य नेताओं ने इस मुलाकात को अनुचित और आपत्तिजनक क़रार देते हुए ओली की आलोचना की है.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली. (फोटो: रॉयटर्स)

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) प्रमुख सामंत कुमार गोयल ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से शिष्टाचार भेंट की है.

उन्होंने कहा कि भारत, नेपाल के साथ मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में बाधा नहीं आने देगा और बातचीत के माध्यम से सभी लंबित मुद्दों को हल किया जाएगा. हालांकि इस मुलाकात को लेकर नेपाल में विवाद हो गया है और ओली को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इसे ‘अनुचित’ और ‘आपत्तिजनक’ करार देते हुए पूर्व प्रधानमंत्रियों- पुष्प कमल दहल प्रचंड, जो सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकाली अध्यक्ष भी हैं, झालानाथ खनल और माधव कुमार नेपाल तथा पूर्व उप प्रधानमंत्री भीम बहादुर रावल और नारायण काजी श्रेष्ठ ने एक अलग बैठक की और कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के जरिये ओली की आलोचना की.

नेपाल के नेताओं ने मांग की है कि रॉ प्रमुख के साथ हुई उनके प्रधानमंत्री की मुलाकात के विवरणों को साझा किया जाए. रिपोर्ट के मुताबिक रॉ प्रमुख ने ओली के साथ बुधवार (21 अक्टूबर) आधी रात को दो घंटे से अधिक समय की बैठक की थी.

गोयल और उनकी टीम विशेष विमान से काठमांडू के लिए गए थे. यह भी कहा गया है कि उन्होंने विपक्ष के नेता शेर बहादुर देउबा, पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई और मधेस के नेता महंत ठाकुर से भी मुलाकात की थी.

रिपोर्ट के अनुसार, खास बात ये है कि ये मीटिंग ऐसे समय पर हुई है, जब नेपाल में काफी राजनीतिक उथल-पुथल चल रहा है और भारत एवं नेपाल अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि पिछले कुछ महीनों में काफी बिगड़ गए हैं. अगले महीने भारत के सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाणे का भी दौरा यहां होने वाले है.

नेपाल के नेताओं ने ‘गुपचुप तरीके से हुई इस बैठक’ को राष्ट्रीय हितों के विपरीत बताया है.

इस बीच नेपाल प्रधानमंत्री के प्रेस एडवाइजर सूर्य थापा ने कहा गोयल ने ओली के साथ सिर्फ ‘शिष्टाचार भेंट’ की थी. उन्होंने कहा कि गोयल ने भारत-नेपाल के रिश्ते को सुधारने पर जोर दिया और बातचीत के जरिये मामलों को हल करने की बात की. हालांकि थापा ने इससे अतिरिक्त कोई और बात नहीं की.

पूर्व विदेश मंत्री और एनसीपी के केंद्रीय सदस्य नारायण काजी श्रेष्ठ ने गोयल की यात्रा की प्रकृति को जानना चाहा. उन्होंने पूछा कि क्या यह व्यक्तिगत मीटिंग थी या आधिकारिक. उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ चर्चा के एजेंडे की भी मांग की है.

प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार सूर्य थापा ने बताया कि गोयल ने प्रधानमंत्री ओली से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की. थापा ने बताया कि बैठक के दौरान गोयल ने कहा, ‘भारत नेपाल के साथ मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में रुकावट नहीं आने देगा और बातचीत के माध्यम से सभी लंबित मुद्दों को हल किया जाएगा.’

मालूम हो कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा बीते आठ मई को उत्तराखंड के धारचूला के साथ लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध में तनाव आ गया था.

नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन का विरोध करते हुए दावा किया था कि यह उसके क्षेत्र से गुजरती है. इसके कुछ दिन बाद नेपाल एक नया नक्शा लेकर आया जिसमें कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को उसने अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया.

भारत ने भी नवंबर 2019 में एक नया नक्शा प्रकाशित किया था, जिसमें इन क्षेत्रों को उसके क्षेत्र के रूप में दिखाया गया था. नेपाल द्वारा नक्शा जारी किए जाने के बाद भारत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘एकतरफा कार्रवाई’ बताया था और काठमांडू को आगाह किया था कि इस तरह की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)