राजनीति

मध्य प्रदेश: उपचुनावों से ऐन पहले कांग्रेस के एक और विधायक ने थामा भाजपा का हाथ

दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल लोधी ने रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता लेते हुए कहा कि वे छह महीने में भाजपा के विकास कार्यों से प्रभावित हुए हैं. मार्च से अब तक कांग्रेस के कुल 26 विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ राहुल लोधी. (फोटो साभार: ट्विटर/@BJP4MP)

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ राहुल लोधी. (फोटो साभार: ट्विटर/@BJP4MP)

मध्य प्रदेश में 3 नवंबर को 28 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव होने हैं लेकिन कांग्रेस के विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में आने का सिलसिला थम नहीं रहा है.

रविवार को दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल लोधी भी कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए.

वे 2018 में कांग्रेस से पहली बार विधायक बने थे. उन्होंने तब भाजपा के दिग्गज नेता और वित्त मंत्री जयंत मलैया को हराया था जो लगातार छह चुनाव इस सीट से जीत चुके थे.

राहुल लोधी के भाजपा में जाने के कयास तब से ही लगाए जा रहे थे जब उनके चचेरे भाई प्रद्युम्न सिंह लोधी, जो बड़ा मलहरा से कांग्रेस विधायक थे, जुलाई माह में भाजपा में चले गए थे.

हालांकि तब राहुल लोधी ने इन कयासों पर यह कहकर विराम लगा दिया था कि ‘प्रद्युम्न पहले भी भाजपा से जुड़े रहे थे लेकिन मैं कांग्रेस में था, हूं और रहूंगा. परिस्थितियां कैसे भी आ जाएं, मैं कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ूंगा.’

लेकिन अब भाजपा में शामिल होते वक्त उन्होंने कहा, ‘क्षेत्र के विकास और दमोह में मेडिकल कॉलेज लाने के लिए कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आया हूं. कमलनाथ की 15 महीने की सरकार में उनसे अनेक बार इस संबंध में चर्चा की थी, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया. छह महीने में भाजपा के विकास कार्यों से मैं प्रभावित हुआ हूं.’

द वायर ने राहुल लोधी से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.

वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से उन पर भाजपा के हाथों बिकने और सौदेबाजी के आरोप लगाए जा रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘मामा के झोले की काली कमाई में एक और विधायक गिरा.’

इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रवि सक्सेना कहते हैं, ‘उपचुनावों में भाजपा सभी 28 सीटें हार रही है. अपनी सरकार जाते देख वे विधानसभा में कांग्रेस का संख्या बल कम करने का षड्यंत्र करके लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं. एक विधायक के लिए 35-40 करोड़ रुपये बड़ी रकम होती है, जिसे देकर भाजपा हमारे विधायक खरीद रही है और जनतंत्र की जड़ें खोखली करके उसमें मट्ठा डाल रही है.’

बता दें कि राहुल लोधी के इस्तीफे के बाद प्रदेश विधानसभा में अब कांग्रेस की सीट संख्या 87 रह गई है जो 230 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए आवश्यक 116 से 29 कम है. जबकि भाजपा की वर्तमान सदस्य संख्या 107 है.

28 सीटों पर 3 नवंबर को उपचुनाव हैं जबकि राहुल लोधी की दमोह सीट पर उपचुनावों की तारीख तय होना बाकी है.

विधानसभी की वर्तमान स्थिति देखें, तो कांग्रेस को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापस आने के लिए सभी 29 सीटों पर जीत दर्ज करना जरूरी है. जिन 28 सीटों अगले हफ्ते 3 नवंबर को उपचुनाव है, उनमें से 25 विधायकों के इस्तीफे से ही खाली हुई थीं.

कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है, ‘कांग्रेस नेताओं को ऐसा कहते हुए शर्म नहीं आती. क्या पूरी कांग्रेस बिकाऊ है? इतने वर्षों तक जो आपके साथ रहे, आपके साथ काम किया, आपने टिकट दिया और आज आप सबके बिकाऊ कह रहे हैं. सच बात यह है कि जब आपकी सरकार थी तो आपने पूरे प्रदेश को बेच दिया था.’

बहरहाल, मार्च से अब तक यह पांचवा मौका है जब कांग्रेसी विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं. सबसे पहले मार्च में सिंधिया समर्थक छह मंत्रियों व 19 विधायकों समेत कांग्रेस के कुल 22 विधायक भाजपा में शामिल हुए थे.

फिर 12, 17 और 23 जुलाई को क्रमश: बड़ा मलहरा विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी, नेपानगर विधायक सुमित्रा कास्डेकर और मंधाता विधायक नारायण पटेल ने भी भाजपा का दामन थाम लिया.

इस तरह मार्च से अब तक कांग्रेस के कुल 26 विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं.

पहले भी जिन विधायकों ने पार्टी से किनारा किया था, उनके भी आरोप राहुल की तरह ही थे कि कमलनाथ सरकार में उनकी सुनवाई नहीं थी, जिससे प्रश्न उठता है कि आखिर क्यों कांग्रेस अपने विधायकों को संभालकर रख नहीं पा रही है?

इस पर रवि सक्सेना कांग्रेस संगठन की असमर्थता बयान करते हुए कहते हैं, ‘पार्टी संगठन या कोई भी इसमें कुछ कर नहीं सकता. जब आदमी की इच्छा और विचारधारा बिकाऊ हो जाती है तो निश्चित रूप से ऐसी ही परिस्थितियां सामने आती हैं. अगर हमारे पास भाजपा जितना पैसा हो और हम उनके विधायकों को खरीदने का प्रयास करें तो उनके भी विधायक इस्तीफा देकर घर बैठ जाएंगे.’

बहरहाल, एक के बाद एक कांग्रेस विधायकों का पार्टी छोड़कर जाना कहीं न कहीं नेतृत्व की खामियों की ओर इशारा करता है.

इस संबंध में द वायर  की एक रिपोर्ट में कांग्रेस के ही नेताओं ने प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर कमलनाथ की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे.

साथ ही कमलनाथ के उस बयान की भी आलोचना की गई थी, जहां वे कहते नजर आए थे कि ‘पार्टी छोड़कर जाने वाले विधायकों की मुझे कोई चिंता नहीं है.’

बहरहाल, जुलाई माह में कमलनाथ ने अपने बाकी बचे विधायकों को पार्टी न छोड़ने की शपथ दिलाई थी, लेकिन राहुल लोधी का जाना बताता है कि कांग्रेस के लिए अपने विधायकों को रोके रखना मुश्किल हो रहा है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)