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बिहार: 71 सीटों पर वोटिंग के पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार समाप्त, कई मंत्री मैदान में

बिहार चुनाव राउंडअप: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को चुनाव के समय तरह-तरह के वादे करने और ठगने की आदत होती है. कांग्रेस ने किया महागठबंधन के डेढ़ सौ सीटें जीतने का दावा, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन औवैसी बोले, भाजपा नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ साज़िश रच रही है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

पटना/नई दिल्ली/औरंगाबाद/सकरा/ महुआ/मुजफ्फरपुर/शेखपुरा/कैमूर/लखनऊ: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 71 सीटों पर होने वाले मतदान के लिए सोमवार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार खत्म हो गया.

इस दौरान सभी राजनीतिक दलों ने मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए वोट करने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कम से कम तीन रैलियों को संबोधित किया.

वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी महागठबंधन के लिए वोट मांगने के लिए दो रैलियों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और एनडीए गठबंधन पर जमकर हमला बोला.

बिहार में एनडीए गठबंधन का नेतृत्व करने वाली जदयू और भाजपा लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं और भाजपा जदयू से अधिक सीटों पर अपनी जीत दर्ज करने के प्रयास में लगी हुई है.

प्रधानमंत्री मोदी के साथ भाजपा के स्टार प्रचारक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा लगातार अयोध्या में राम मंदिर, अनुच्छेद 370 का खात्मा और तीन तलाक के खिलाफ कानून जैसी केंद्र सरकार की अपनी उपलब्धियों को गिना रहे हैं और इन मुद्दों का विरोध करने के लिए विपक्ष की आलोचना कर रहे हैं.

69 वर्षीय मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार चौथी बार सत्ता में आने की तैयारी में लगे हैं. वह जोर शोर से चुनाव प्रचार में लगे हैं और इस दौरान उन्होंने वर्चुअल रैलियों के साथ दर्जनों जनसभाएं भी की हैं.

दो मौकों पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंच साझा कर प्रचार किया है. शांत स्वभाव के माने जाने वाले कुमार इस बार के चुनाव प्रचार में कई मौकों पर अपना आपा खोते हुए भी देख गए हैं. कई विपक्षी और वरिष्ठ नेताओं ने इसके लिए उनकी आलोचना भी की है.

महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव भी पूरे जोश के साथ एक दिन में कई सभाओं और रैलियों को संबोधित कर रहे हैं. जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए वे रैलियों के अलावा वीडियो संदेशों, सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी सहारा ले रहे हैं.

उनकी रैलियों में उमड़ रही भारी भीड़ उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदियों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है. राजनीतिक विश्लेषक इसे पूर्व मुख्यमंत्री के लिए जनता में अधिक रूझान के बजाय सत्ता विरोधी लहर को मान रहे हैं.

लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान इस चुनाव में अकेले लड़ रहे हैं और 20 अक्टूबर को पिता रामविलास पासवान के निधन के कारण उन्होंने देर से प्रचार शुरू किया.

पासवान जदयू के खिलाफ जोरशोर से प्रचार कर रहे हैं जबकि भाजपा के लिए उन्होंने नरम रूख अपनाया है और प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर वोट भी मांग रहे हैं.

राज्य में अब तक प्रचार करने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और स्मृति ईरानी, कांग्रेस नेता राज बब्बर और शत्रुघ्न सिन्हा, बसपा सुप्रीमो मायावती और एआईएमआईएण प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हैं.

माकपा नेता कन्हैया कुमार ने भी इस बार चुनाव प्रचार किया है और उन्होंने मुख्य रूप वाम दलों के प्रत्याशियों के लिए वोट मांगा है.

कुल मिलाकर पहले चरण में 1066 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, उनमें से 114 महिलाएं हैं. इस दौरान नीतीश कुमार के करीब आधा दर्जन मंत्रियों का भाग्य वोटिंग मशीनें में बंद हो जाएगा. इनमें कैबिनेट मंत्री कृष्णंदन वर्मा, प्रेम कुमार, जय कुमार सिंह, संतोष कुमार निराला, विजय सिन्हा और राम नारायण मंडल शामिल हैं.

पहले चरण में जिन 71 सीटों पर मतदान होने जा रहे हैं उनमें नक्सल प्रभावित गया, रोहतास और औरंगाबाद सहित छह जिले शामिल हैं.

पहले चरण की 71 सीटों में प्रमुख पार्टियों में से राजद 42, जदयू 41, भाजपा 29, कांग्रेस 21 और लोजपा 41 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

बिहार में महागठबंधन जीतेगा 150 से अधिक सीटें, ‘घोटालों’ की होगी जांच: कांग्रेस

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के 150 से अधिक सीटें जीतने की उम्मीद जताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को कहा कि सरकार बनने के बाद प्रदेश में हुए सभी ‘घोटालों’ की जांच कराकर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा और विकास को बिहार की पहचान बनाया जाएगा.

इसके साथ ही सुरजेवाला ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ‘टायर्ड एवं रिटायर्ड’ नेतृत्व को बदलना चाहती है.

बिहार से संबंधित कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी का लक्ष्य बिहार में व्यवस्था परिवर्तन करना, राज्य के पहले मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिन्हा के दौर वाला शासन फिर वापस लाना और विकास को बिहार की पहचान बनाना है.

उन्होंने कहा, ‘बिहार, अब नीतीश कुमार एवं सुशील मोदी के ‘टायर्ड और रिटायर्ड’ नेतृत्व को बदलकर नयी ऊर्जा, नयी स्फूर्ति और नयी उमंग के साथ आगे बढ़ना चाहता है. बिहार चीख-चीखकर कह रहा है कि 15 साल के जुमलों और झूठे वादों से लोग थक चुके हैं. इसलिए महागठबंधन 150 से अधिक सीटें लेकर सरकार बनाएगा.’

चुनाव बाद महागठबंधन का स्वरूप बदलने और जरूरत पड़ने पर छोटे दलों की मदद लेने की संभावना से जुड़े सवाल पर सुरजेवाला ने कहा, ‘हमें 12 करोड़ बिहारवासियों पर विश्वास है, महागठबंधन दो तिहाई बहुमत की तरफ बढ़ रहा है और ऐसे में किसी और साथी की जरूरत नहीं होगी.’

यह पूछे जाने पर क्या महागठबंधन की सरकार कथित ‘सृजन घोटाले’ और भ्रष्टाचार के अन्य आरोपों की जांच कराएगी तो सुरजेवाला ने कहा, ‘घोटालों की जांच भी होगी और न्याय मिलेगा.’

यह पूछे जाने पर कि क्या मतदाता नीतीश के विकल्प के तौर पर तेजस्वी यादव में भरोसा जताएगा, कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘बिल्कुल! तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले कांग्रेस, राजद और वाम दलों के महागठबंधन की, जनता ने जाति और धर्म के बंधनों को तोड़कर मदद की है.’

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में सत्ता की दौड़ में राजग के आगे होने संबंधी सवाल पर सुरजेवाला ने कटाक्ष करते हुए दावा किया, ‘मोदी जी कभी भी टेलीविजन और चुनावी सर्वेक्षणों में पीछे नहीं दिखाई देते. याद कीजिए, छत्तीसगढ़ के चुनाव को, जब इन्हीं सर्वेक्षणों में कांग्रेस को 17 सीटें दिखाई जा रही थीं, लेकिन कांग्रेस को दो तिहाई सीटें मिलीं और भाजपा को 17-18 सीटें मिलीं. पिछले बिहार चुनाव में भी हमारे गठबंधन को पीछे दिखाया जा रहा था, लेकिन हमारे गठबंधन की बड़ी जीत हुई. इस बार भी बिहार, भाजपा को नकारेगा.’

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद और वाम दलों के साथ तालमेल करके मैदान में उतरी कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. राजद 144 और वाम दल 29 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं.

चुनावी रैलियों में कोविड-19 नियमों की उड़ रही हैं धज्जियां

बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के अपने चरम पर पहुंचने के बीच चुनाव आयोग की कोविड- 19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी को अनसुनी करते हुए चुनावी रैलियों में भारी तादाद में लोग सामाजिक दूरी का पालन नहीं करते हुए बिना मास्क पहने इकट्ठा हो रहे हैं.

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, बिहार के भाजपा प्रभारी देवेंद्र फडणवीस, पूर्व केंद्रीय मंत्री और छपरा के सांसद राजीव प्रताप रूडी, गया के सांसद विजय मांझी, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और राज्य के पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता कोविड- 19 से पीड़ित हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुक्रवार को डेहरी, गया एवं भागलपुर में और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हिसुआ एवं कहलगांव में जनसभाओं के दौरान कोविड- 19 को लेकर प्रोटोकॉल को बनाए रखा गया था, लेकिन अन्य रैलियों में अति उत्साहित भीड़ द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है.

चुनाव आयोग ने 21 अक्टूबर को बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और जिला प्रशासन को कोविड- 19 को लेकर आपदा प्रबंधन अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत उचित और प्रासंगिक दंडात्मक प्रावधानों को लागू करने का निर्देश दिया था.

इस तरह की जनसभाओं के उदाहरण आयोग के ध्यान में आए हैं, जहां सामाजिक दूरी का उल्लंघन करते बिना मास्क पहने हुए बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठी हुई है और राजनीतिक नेता अथवा रैली के आयोजक दिशानिर्देशों की पूरी अवहेलना कर सभा को संबोधित कर रहे हैं.

ऐसे मामलों में निर्देशों का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों और आयोजकों को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और भादंसं की संबंधित धाराओं के तहत दो साल तक के कारावास का सामना करना पड़ सकता है.

सैकड़ों लोग अभी भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्षी महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव सहित शीर्ष नेताओं की रैलियों में शिरकत करते हैं और बिना मास्क पहने रैलियों में स्थान पाने के लिए एक-दूसरे को धक्का देते नजर आते हैं.

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘लोगों से मास्क नहीं होने के बारे में पूछने पर वे बताते हैं कि मास्क अपने घर पर भूल गए अथवा अपनी जेब में होने और बहुत गर्मी होने की वजह से नहीं पहनने की दलील पेश करते हैं.’

अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय कुमार सिंह ने कहा कि रैली स्थलों पर तैनात दंडाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे कोविड-19 मानदंडों को सख्ती से लागू करें, जिसमें मास्क पहनना और सामाजिक दूरी बनाए रखना शामिल है.

उन्होंने कहा, ‘हम चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर सामाजिक दूरी के मापदंड का उल्लंघन करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा.’

उन्होंने कहा कि कोविड- 19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन सटीक संख्या साझा करने में असमर्थता व्यक्त की.

चुनावी रैलियों को कवर करने वाले ‘पीटीआई-भाषा’ के पत्रकारों ने भी पाया कि नेताओं ने मास्क पहन रखा था और एक-दूसरे से उचित शारीरिक दूरी बनाए रखी थी, लेकिन लोग हेलीकॉप्टरों के रैली मैदान में उतरने पर नेताओं के करीब पहुंचने के लिए एक-दूसरे से टकराते दिखे.

भागलपुर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मंगलवार को सनोखा में तेजस्वी यादव की जनसभा में मंच पर बहुत भीड़ दिखी. तेजस्वी यादव जिंदाबाद के नारे लगाते हुए उनके एक समर्थक ने कहा, ‘अभी हमें नीतीश कुमार को हराना है. हम बाद में कोरोना को हरा सकते हैं.’

ऐसा ही कुछ स्थिति भोजपुरी गायक-अभिनेता और उत्तर पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद मनोज तिवारी की कहलगांव के शारदा स्कूल परिसर की रैली में हुआ था.

भाजपा प्रत्याशी पवन कुमार यादव ने बताया कि कई लोगों ने मास्क पहन रखे थे लेकिन सर्किल बना दिए जाने के बावजूद भारी भीड़ के कारण सामाजिक दूरियां बरकरार नहीं रखी जा सकीं.

नीतीश कुमार हर दिन 4-5 रैलियों को संबोधित कर रहे हैं. गोपालगंज जिले के भोरे में नीतीश कुमार की रैली में शामिल एक व्यक्ति ने कहा, ‘कोरोना राज्य को जंगलराज में बदल देने वाले लालू प्रसाद और उनके दल के लोगों पर हमला करेगा.’

मधेपुरा के बिहारीगंज के एसबीजे हाई स्कूल में एक महागठबंधन रैली में अराजकता दिखी, जहां समाजवादी दिग्गज शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं.

ऐसे से कुछ उदाहरण सामने आए हैं, जहां कोविड-19 मानदंडों के उल्लंघन के लिए ऐसी रैलियों के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.

गया जिला प्रशासन ने 11 अक्टूबर को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की एक रैली के आयोजकों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की, जहां सामाजिक दूरी के मानदंडों का कथित रूप से उल्लंघन किया गया था.

अंचल अधिकारी राजीव रंजन की शिकायत पर उक्त प्राथमिकी दर्ज की गई थी. गोपालगंज में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साला साधु यादव के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई थी. वह बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

बिहार में सत्ताधारी राजग में शामिल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा कि उनकी पार्टी रैलियों से पहले लोगों के बीच सैनिटाइजर और मास्क वितरित कर रही थी और साथ ही उनसे सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील कर रही है लेकिन कभी-कभी लोग सब कुछ भूल जाते हैं और मंच पर आने के लिए कुछ धक्का देने और शोर शराबा मचाने की कोशिश करते हैं.

बिहार में 25 अक्टूबर तक कोरोना वायरस संक्रमण के मामले 2.12 लाख से अधिक थे और ठीक होने की दर 94.69 प्रतिशत थी.

कुछ लोगों की भ्रमित करने और ठगने की आदत होती है: नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राजद सहित विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को चुनाव के समय तरह-तरह के वादे करने और ठगने की आदत होती है, लेकिन उन्हें काम से कोई मतलब नहीं होता है, जबकि उन्होंने जो कहा, वह करके दिखाया है और वह आगे भी काम करेंगे.

नीतीश कुमार ने यह बयान वैशाली के महुआ क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए दिया. साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने महुआ सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी.

हालांकि, इस बार तेज प्रताप यादव अपनी पुरानी महुआ सीट छोड़कर समस्तीपुर की हसनपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. महुआ सीट से राज्य के पूर्व मंत्री इलियास हुसैन की बेटी आसमां परवीन जद (यू) उम्मीदवार हैं.

नीतीश ने महुआ में रैली को संबोधित करते हुए तेज प्रताप यादव का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोगों की आदत कुछ न कुछ बोलते रहने, लोगों को ठगने और भ्रमित करने की होती है.

उन्होंने कहा, ‘ऐसे लोग चुनाव के समय भ्रम फैलाने और समाज में विवाद पैदा करने का काम करते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमने सभी क्षेत्र और समाज के हर तबके के लोगों के विकास के लिए काम किया है. कोई ऐसा नहीं कह सकता कि मेरे समाज के लोगों का खयाल नहीं रखा गया. हमने जो कहा, वह कर के दिखाया है तथा आगे और भी काम करेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘हम सिर्फ चुनाव के समय ही नहीं आते बल्कि लगातार क्षेत्र में आते रहे हैं, चारों तरफ आते रहे हैं. हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि क्या काम हुआ है और क्या दिक्कत है.’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमारे जीवन में काम के अलावा और कुछ नहीं है.’

लालू प्रसाद पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए पति, पत्नी, बेटा-बेटी ही परिवार है जबकि उनके लिए पूरा बिहार परिवार है.

राजद के शासनकाल का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले न पढ़ाई की व्यवस्था थी, न इलाज का इंतजाम था और न लोगों के आने-जाने की सुविधा थी और शाम के बाद लोगों की घर से निकलने की हिम्मत नहीं होती थी.

उन्होंने कहा कि पहले कितनी अपराध की घटनाएं होती थीं, कितने नरसंहार, हत्या की घटनाएं होती थीं, डाक्टरों एवं व्यापारियों को भागना पड़ा था. बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमने अपराध की घटनाओं को नियंत्रित करने का काम किया है. हमने कानून का राज कायम किया.’

विरोध में नारे लगा रहे युवकों पर बिफरे नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को एक चुनावी सभा के दौरान विरोध में नारेबाजी कर रहे युवकों से कहा कि वे अपने माता-पिता से जाकर ‘राजद शासनकाल’ के बारे में पूछ लें. उन्होंने युवकों से कहा कि उनकी मां सही-सही बात बताएंगी.

मुजफ्फरपुर के कांटी में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान नीतीश कुमार की सभा में कुछ लोगों ने मुर्दाबाद के नारे लगाये. इस पर नीतीश ने नारेबाजी कर रहे लोगों से कहा, “क्यों मुर्दाबाद कह रहे हो, जिसको जिंदाबाद कह रहे हो उसको सुनने के लिए जाओ.’

उन्होंने कहा, ‘हम समाज को एक करने में लगे हुए हैं और वह लोग लगे हुए कि समाज को फिर बांट दो. फिर झगड़ा का माहौल पैदा कर दो.’

नीतीश ने नारेबाजी करने वाले युवकों से कहा, ‘आप लोगों को यहां कोई कुछ नहीं करेगा. 10 लोग हो और यहां हजारों लोग हैं. कोई तुमको कुछ नहीं करेंगे. कुछ करेंगे तो उनको लाभ मिलेगा.’

जदयू प्रमुख ने प्रदेश की पिछली राजद सरकार के शासन काल की ओर इशारा करते हुए नारेबाजी करने वालों से पूछा, ‘ क्या हाल था. अपने माता-पिता से जाकर पूछ लो कि शाम होने के बाद घर से बाहर निकल पाते थे. स्कूल में पढ़ाई होती थी. कोई इलाज होता था. जरा जान लो. पूछ लो घर के अंदर और पिता ठीक नहीं बताएगा लेकिन अपनी माता से पूछोगे वह सही बात बतला देगी.’

उन्होंने राजद प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और उनकी पत्नी एवं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम लिए बिना उनकी ओर इशारा करते हुए कहा, ‘क्या करते थे जी. पति (लालू) अंदर (चारा घोटाला मामले में जेल) गए तो पत्नी (राबडी) को गद्दी (मुख्यमंत्री पद) पर बिठा दिया. महिलाओं के उत्थान के लिए कोई काम हुआ. गरीब बच्चे प्राथमिक विद्यालय भी नहीं जा पाते थे.’

नीतीश ने उन युवकों से कहा कि कुछ लोग भ्रम में डालकर वोट लेना चाहते हैं लेकिन लोग होशियार रहें.

कांग्रेस जितनी नफरत करेगी उतना ही लोग मोदी का समर्थन करेंगे: नड्डा

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना किए जाने को लेकर सोमवार को कांग्रेस पर करारा हमला किया और कहा कि विपक्षी दल और उसके नेता जितना ‘झूठ’ बोलेंगे और मोदी से ‘नफरत’ करेंगे, उतना ही और अधिक लोग उनका समर्थन करेंगे.

नड्डा ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी द्वारा विभिन्न मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी की निंदा किए जाने को लेकर प्रहार किया

नड्डा ने कहा, ‘निराशा और बेशर्मी का गठजोड़ काफी खतरनाक होता है. कांग्रेस के पास ये दोनों ही है. जहां पार्टी में बेटा घृणा, क्रोध, झूठ और आक्रामकता की राजनीति का जीवंत प्रदर्शन करता है तो वहीं माता दिखावे की शालीनता का प्रदर्शन और लोकतंत्र पर खोखली बयानबाजी कर इसका पूरक बनती है.’

भाजपा अध्यक्ष की ये टिप्पणी सोनिया गांधी द्वारा एक अंग्रेजी अखबार में लिखे लेख के मद्देनजर आई है. इस लेख में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी राज में लोकतंत्र को खोखला किया जा रहा है.

इसके जवाब में नड्डा ने विपक्षी नेताओं को आपातकाल की याद दिलाई और कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पर कांग्रेस कभी भी दूसरों पर दबाव नहीं बना सकती.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का आवाज दबाने का दशकों से इतिहास रहा है. इसे हमने आपातकाल के दौरान भी देखा. इसके बाद राजीव गांधी की कांग्रेस सरकार ने भी प्रेस की आजादी को कमजोर करने का प्रयास किया.’

उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्र मीडिया सदैव ही कांग्रेस को चुभता है.

नड्डा ने महाराष्ट्र में शिव सेना-नीत गठबंधन सरकार को कांग्रेस के ‘आशीर्वाद’ से चलने वाली सरकार बताया और कहा, ‘क्रूर राज्य शक्ति के इस्तेमाल की प्रयोगशाला को देखना चाहता है, तो वह कांग्रेस के आशीर्वाद से चलने वाली महाराष्ट्र सरकार को देखे जहां विपक्ष को परेशान किया जा रहा है और बोलने की आजादी पर अंकुश लगाया जा रहा है. राज्य चलाना छोड़कर महाराष्ट्र सरकार सब कुछ कर रही है.’

उन्होंने कहा, ‘जितना ही कांग्रेस झूठ बोलेगी और जितनी ही इनकी नफरत बढ़ेगी, उतना ही और अधिक लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहेंगे और उनका समर्थन करेंगे.’

नड्डा ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी पलटवार किया. गांधी ने पंजाब में किसानों द्वारा विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री का पुतला जलाए जाने संबंधी मीडिया की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्वीट किया था कि यह पंजाब में प्रधानमंत्री के प्रति लोगों का गुस्सा दर्शाता है.

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब में विजयादशमी के दिन प्रधानमंत्री का पुतला जलाया जाने की घटना कांग्रेस ‘प्रायोजित’ थी. उन्होंने कांग्रेस नेता पर ‘निकृष्ट और समाज को बांटने वाली राजनीति’ करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘पंजाब में जो कुछ भी हो रहा है वह राहुल गांधी के इशारों पर किया जा रहा है. पंजाब में प्रधानमंत्री का पुतला जलाने का शर्मनाक ड्रामा राहुल गांधी द्वारा निर्देशित है लेकिन यह अनपेक्षित नहीं है.’

नड्डा ने नेहरू-गांधी परिवार पर कभी भी प्रधानमंत्री कार्यालय की इज्जत न करने का भी आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस से यही उम्मीद की जा सकती है. नेहरू-गांधी खानदान ने कभी भी प्रधानमंत्री पद और प्रधानमंत्री के कार्यालय की गरिमा का सम्मान नहीं किया है. 2004-2014 के बीच भी ऐसा ही देखने को मिला था जब कांग्रेस की यूपीए सरकार के शासनकाल में प्रधानमंत्री पद को संस्थागत तरीके से कमजोर किया गया था.’

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने लोजपा नेता चिराग पासवान पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के वक्त कुछ लोग षड्यंत्र करके राजग में सेंध लगाना चाहते हैं लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंध एकजुट है लेकिन हमें सेंध लगाने वालों से भी सावधान रहना है.

नड्डा ने औरंगाबाद में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘कुछ लोग चुनाव में षड्यंत्र करते हैं, वो चाहते हैं कि हमारे बीच सेंध लगे. वे एक तरफ तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भला बुरा कहते हैं और दूसरी तरफ मोदीजी(प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) की तारीफ करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘हमें याद रखना कि एनडीए एक है. भाजपा, जदयू, वीआईपी और हम पार्टी… यही राजग है. ऐसे में हमें सेंध लगाने वालों से भी सावधान रहना है.’

गौरतलब है कि बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने के बाद भी चिराग, भाजपा के प्रति नरम रुख अख्तियार किए हुए हैं, लेकिन नीतीश कुमार पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे. हाल ही में चिराग ने स्वयं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘हनुमान’ बताया था.

नीतीश को थका हुआ बताने पर जदयू और भाजपा ने तेजस्वी पर किया पलटवार

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थक चुके हैं और अब वह बिहार को संभाल पाने में सक्षम नहीं हैं, जिस पर प्रदेश में सत्तारूढ़ राजग में शामिल जद (यू) और भाजपा के नेताओं ने पलटवार करते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

तेजस्वी (31) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (69) की उम्र का संभवत: जिक्र करते हुए कहा कि वह थक चुके हैं जिस कारण वह कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाते हैं, चाहे वह कोरोना वायरस महामारी हो या मुजफ्फरपुर में ‘एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम’ (एईएस) का प्रकोप हो.

तेजस्वी की इस टिप्पणी पर सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त करते हुए इसे ‘निरर्थक’ करार दिया है.

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा, “नीतीश कुमार कई युवाओं की तुलना में अधिक ऊर्जावान हैं. वह दिन में 14-15 घंटे काम करते हैं, जो कई युवा नहीं कर पाएंगे. उनके थक चुके होने की टिप्पणी किसी भी तर्क से परे है.’

नीतीश के विश्वासपात्र माने जाने वाले बिहार के जलसंसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मुख्यमंत्री कम से कम उनकी तरह 9वीं फेल नहीं हैं. वह (राजद नेता) सिर्फ व्यर्थ टिप्पणी कर रहे हैं.’

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी तेजस्वी की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि राजग के नेता हमेशा राज्य और देश के विकास के लिए ऊर्जा के साथ काम करते रहे हैं.

तेजस्वी की इसी तरह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने हाल ही में कहा था, “वह कहते हैं कि मैं थका हुआ हूं, उन्हें पहले जवाब देना चाहिए कि जब बिहार में कोरोना वायरस (संक्रमण) फैला तो वह कहां थे.’

गौरतलब है कि मार्च महीने से तेजस्वी बिहार में अनुपस्थित थे. करीब दो महीने बाद मई के मध्य में दिल्ली से वह पटना लौटे थे.

मोदी भाजपा का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं: असदुद्दीन औवैसी

एआईएमआईएम प्रमुख एवं लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ‘सीएए’ और ‘एनआरसी’ को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू) और मुख्य विपक्षी दल राजद पर प्रहार किया.

ओवैसी ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को लेकर जद(यू) और राजद पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर जहां राजद अपनी जुबां बंद रखे हुए है वहीं नीतीश कुमार लोगों के समक्ष गलत बयानी कर रहे हैं.

हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने कहा सीएए और एनआरसी सिर्फ मुसलमानों तथा दलितों के लिए समस्या नहीं है, बल्कि इससे देश की 50 प्रतिशत आबादी प्रभावित होगी.

उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 20 लाख लोगों ने एनआरसी सूची से खुद को बाहर पाया, जिसमें मुसलमान मात्र पांच लाख हैं जबकि 15 लाख हिंदू हैं.

ओवैसी ने कहा कि सरकार को इन मुद्दों के बजाय शिक्षा, रोजगार तथा स्वास्थ्य को तरजीह देनी चाहिए.

सभा को संबोधित करते हुए रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद तथा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, दोनों पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि इन दोनों नेताओं ने कुल 30 वर्षों के अपने शासन में बिहार को पीछे धकेलने का काम किया.

ओवैसी की पार्टी और मायावती की पार्टी बसपा सहित अन्य दलों के मोर्चा के बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रालोसपा प्रमुख कुशवाहा ने लोगों से अपने लिए पांच साल मांगा तथा भरोसा दिलाया कि बिहार में वे उजियारा लाएंगे.

एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन औवैसी ने इससे पहले शनिवार को दावा किया था कि नीतीश कुमार के खिलाफ भाजपा साजिश रच रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के विधायक को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं.

असदुद्दीन ओवैसी ने यहां चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘भाजपा पूरी कोशिश कर रही है और नीतीश कुमार को रिटायरमेंट होम में डालने वाली है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं नौजवानों से अपील करना चाहता हूं कि वे बिहार की जनता तक यह बात पहुंचा दें कि नरेंद्र मोदी भाजपा के एमएलए को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं.’ आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) के नेता ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार नाकाम साबित हुए हैं और अब वे कुछ नहीं कर सकते.

ओवैसी ने पूर्वी लद्दाख से लगी सीमा पर चीन के साथ गतिरोध को लेकर प्रधानमंत्री से सवाल किया कि चीन को उस इलाके से कब भगाया जायेगा.

उन्होंने कहा, ‘हम उन सभी बहादुर सिपाहियों को सलाम करते हैं जिन्होंने देश की एक एक इंच जमीन की हिफाजत करते हुए कुर्बानी दी लेकिन जिस मां ने अपने बेटे को खोया वह पूछ रही है कि हमारे बेटे की जान का बदला चीन से लिया या नहीं.’

औवैसी ने कहा कि बिहार की जनता राजद गठबंधन के 15 साल के शासन में पिसी, फिर मोदी और नीतीश के शासन काल में बेरोजगार बना दिया गया और गरीबी इनका मुकद्दर बना दिया गया है.

उन्होंने कहा कि आपसे वादा करता हूं, उपेंद्र कुशवाहा को मुख्यमंत्री बनाइए, बिहार की जनता से इंसाफ होगा.

गौरतलब है कि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और एमआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार चुनाव में छह दलों का नया मोर्चा बनाया है. इस मोर्चा का नाम ‘ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट’ रखा गया है.

फ्रंट की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा को बनाया गया है. इस फ्रंट के अन्य दलों में मायावती की बहुजन समाज पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, समाजवादी जनता पार्टी डेमोक्रेटिक और जनतांत्रिक सोशलिस्ट पार्टी शामिल हैं.

विरोधियों के हथकंडों से मायावती ने किया सावधान

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्‍यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती ने सोमवार को बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर वहां के लोगों को विरोधियों के सभी प्रकार के हथकंडों और षडयंत्रों से सावधान किया है.

मायावती ने सोमवार को ट्वीट किया, ‘ बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान की तैयारी आज चुनाव प्रचार की समाप्ति के साथ ही शुरू. अत: सभी से अपील है कि वे विरोधियों के सभी प्रकार कि हथकंडों और षडयंत्रों से सावधानी बरतते हुए बसपा और आरएलएसपी आदि गठबंधन को ही अपना वोट देकर सफल बनाएं.’

उल्‍लेखनीय है कि बिहार विधानसभा चुनाव में बसपा ने राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) समेत कई दलों से गठबंधन करके तीसरा मोर्चा बनाया है. राजनीतिक विश्‍लेषकों का मानना है कि बिहार के कुछ खास क्षेत्रों में पिछड़ी जाति में रालोसपा का प्रभाव है, जबकि दलितों में बसपा की पकड़ का दावा किया जाता है.

रालोसपा के उत्तर प्रदेश अध्‍यक्ष अमित कुशवाहा ने बताया, ‘बिहार में हमारी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बसपा को गठबंधन में 80 सीटें दी हैं. वहां पहले चरण में बसपा के 26 उम्‍मीदवार चुनाव मैदान में हैं.’ बिहार चुनाव में गया का प्रभार संभाल रहे अमित का कहना है, ‘बिहार में सरकार बनाने में सबसे महत्‍वपूर्ण भूमिका रालोसपा-बसपा गठबंधन की होगी.’

मालूम हो कि विधानसभा की 243 सीटों के लिए तीन चरणों में 28 अक्टूबर, तीन नवंबर और सात नवंबर को मतदान होगा और मतगणना 10 नवंबर को होगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)