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जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा बदला तो राज्य में किसी के हाथ में नहीं होगा तिरंगा: महबूबा मुफ़्ती

मुख्यमंत्री ने कहा, कश्मीर घाटी में एनआईए के छापे और अलगाववादी नेताओं की गिरफ्तारी कश्मीर समस्या का हल नहीं, अस्थायी उपाय है.

Mehbooba Mufti Reuters

जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती. (फोटो: रॉयटर्स)

नयी दिल्ली: जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर राज्य के लोगों को मिले विशेषाधिकारों में किसी तरह का बदलाव किया गया तो राज्य में तिरंगा को थामने वाला कोई नहीं रहेगा.

उन्होंने कहा कि एक तरफ हम संविधान के दायरे में कश्मीर मुद्दे का समाधान करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ हम इस पर हमला करते हैं.

उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा, ‘कौन यह कर रहा है. क्यों वे ऐसा कर रहे हैं (अनुच्छेद 35 ए को चुनौती दे रहे हैं). मुझे आपको बताने दें कि मेरी पार्टी और अन्य पार्टियां जो (तमाम जोख़िमों के बावजूद जम्मू कश्मीर में) राष्ट्रीय ध्वज हाथों में रखती हैं मुझे यह कहने में तनिक भी संदेह नहीं है कि अगर इसमें कोई बदलाव किया गया तो कोई भी राष्ट्रीय ध्वज को थामने वाला नहीं होगा.’

उन्होंने कहा, ‘मुझे साफ तौर पर कहने दें. यह सब करके (अनुच्छेद 35 ए को चुनौती देकर) आप अलगाववादियों को निशाना नहीं बना रहे हैं. बल्कि, आप उन शक्तियों को कमज़ोर कर रहे हैं जो भारतीय हैं, भारत पर विश्वास करते हैं, चुनावों में हिस्सा लेते हैं और जो जम्मू कश्मीर में सम्मान के साथ जीने के लिए लड़ते हैं. यह समस्याओं में से एक है.’

बता दें कि वर्ष 2014 में एक एनजीओ ने रिट याचिका दायर करके अनुच्छेद 35 ए को निरस्त करने की मांग की थी. मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है. अनुच्छेद 35 ए संविधान की धारा 370 के तरह जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करता है.

महबूबा ने कहा कि कश्मीर भारत की परिकल्पना है. उन्होंने कहा, बुनियादी सवाल है कि भारत का विचार कश्मीर के विचार को कितना समायोजित करने को तैयार है.

उन्होंने याद करते हुए कहा कि कैसे विभाजन के दौरान मुस्लिम बहुल राज्य होने के बावजूद कश्मीर ने दो राष्ट्रों के सिद्धांत और धर्म के आधार पर विभाजनकारी बंटवारे का उल्लंघन किया और भारत के साथ रहा.

उन्होंने कहा, भारत के संविधान में जम्मू कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान हैं. दुर्भाग्य से समय बीतने के साथ कहीं कुछ हुआ कि दोनों पक्षों ने बेईमानी शुरू कर दी.

उन्होंने केंद्र और राज्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि दोनों पक्ष हो सकता है अधिक लालची हो गए हों जिसका ख़ामियाजा पिछले 70 वर्षों में राज्य को भुगतना पड़ा.

कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत बहाल करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर में बंद हुई बातचीत के रास्तों को खोलने के लिए पड़ोसी देश से सकारात्मक योगदान की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के छापे और अलगाववादी नेताओं की गिरफ्तारी कश्मीर समस्या को सुलझाने का हल नहीं है, यह एक अस्थायी उपाय है.

सामाजिक समूह बीआरआईईएफ द्वारा आयोजित अंडरस्टेंडिंग कश्मीर के सत्र में महबूबा ने कहा, पीडीपी-भाजपा गठबंधन इस विश्वास और आशा पर है कि हम लोग पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जादुई समय को वापस लेकर आएंगे.

मुख्यमंत्री ने लाहौर घोषणा का हवाला देते हुए कहा, हमें कारगिल और संसद पर हुए हमले के बाद भी उसे ज़िंदा करने की ज़रूरत है. इस लाहौर घोषणा में पाकिस्तान ने भारत को आश्वस्त किया था कि वह भारत विरोधी गतिविधियों के लिए अपनी ज़मीन का उपयोग नहीं होने देगा.

उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के मन से आज़ादी का विचार हटाने के लिए उनके सामने कुछ अन्य चीज़ें पेश करने की ज़रूरत है और साल 2005 में कश्मीर के आंतरिक मुद्दों को निपटाने के लिए बनाए गए कार्यकारी समूह पर ध्यान देने की ज़रूरत है.

महबूबा ने कहा, कश्मीर पर कार्यकारी समूह की रिपोर्ट कूड़े के डिब्बे में डाल दी गई है. हम लोग इस बारे में कुछ भी नहीं कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री से जब अलगाववादी नेताओं पर हाल ही में हुई एनआईए की कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस तरह की चीज़ें अंतिम समाधान नहीं देती है.

उन्होंने कहा, एनआईए के साथ जो भी हुआ वह एक प्रशासनिक पैमाना है. इससे स्थिति पर नियंत्रण हो सकता है लेकिन यह वास्तविक समस्या का हल नहीं देता है.

महबूबा ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा, मैं महसूस करती हूं कि मोदीजी काफी लोकप्रिय हैं और उनमें आगे बढ़ने और इतिहास बनाने की क्षमता है. उनका नेतृत्व एक ऐसी चीज़ है जिसका उपयोग करने की ज़रूरत है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)