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संसदीय समिति की पूछताछ के हफ़्ते भर बाद फेसबुक इंडिया की अधिकारी आंखी दास का इस्तीफ़ा

अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अगस्त में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि आंखी दास ने एक भाजपा नेता के ख़िलाफ़ फेसबुक के हेट स्पीच नियमों को लागू करने का विरोध किया था. हालांकि उनके इस्तीफ़े के इस विवाद से जुड़े होने की पुष्टि नहीं हुई है.

आंखी दास. (फोटो साभार: लिंक्डइन)

आंखी दास. (फोटो साभार: लिंक्डइन)

नई दिल्लीः फेसबुक इंडिया की शीर्ष अधिकारी आंखी दास ने इस्तीफा दे दिया है. वह सोशल मीडिया मंच पर नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों पर रोक लगाने के मामले में कथित तौर पर पक्षपात बरतने को लेकर विवादों में थी.

वह लगभग एक दशक से कंपनी से जुड़ी हुई थीं और भारत में फेसबुक की दक्षिण और मध्य एशिया प्रभार की पॉलिसी निदेशक थीं.

बता दें कि इससे पहले आंखी दास संसदीय समिति के समक्ष पूछताछ के लिए पेश भी हुई थीं. आंखी पर आरोप लगाया गया था कि वे फेसबुक की कंटेंट मॉडरेशन पॉलिसी में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा का पक्ष लेते हुए हस्तक्षेप कर रही हैं.

आंखी दास का यह इस्तीफा कंपनी और उनसे सरकार की तरफ से पूछताछ के एक सप्ताह बाद आया है.

दरअसल कई मीडिया रिपोर्ट्स में आंखी पर यह आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने भारत में फेसबुक के हेट स्पीच नियमों को उचित रूप से लागू नहीं किया और उन्होंने भाजपा के एक नेता के खिलाफ फेसबुक के हेट स्पीच नियमों का लागू करने का विरोध किया था क्योंकि उन्हें डर था कि इससे भाजपा के साथ कंपनी के संबंध बिगड़ सकते हैं.

दास पर ये आरोप लगे थे कि उन्होंने भाजपा और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों के नफरत फैलाने वाले बयानों पर रोक लगाने से जुड़े नियमों को लागू करने का कथित रूप से विरोध किया था.

उन पर ये भी आरोप लगे थे कि उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों के फेसबुक ग्रुप पर कई साल तक भाजपा के समर्थन में संदेश पोस्ट किये.

हालांकि, फेसबुक ने इन आरोपों से इनकार किया लेकिन यह स्वीकार किया है कि आंखी दास ने तेलंगाना से भाजपा विधायक टी. राजा सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने पर पार्टी के साथ रिश्तों में खटास आने को लेकर चिंता जताई थी.

बता दें कि तेलंगाना विधानसभा में भाजपा के एकमात्र विधायक टी. राजा सिंह ने फेसबुक पर सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ टिप्पणी की थी.

हालांकि, आंखी के इस्तीफे के बाद अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या उनका इस्तीफा हेट स्पीच विवाद से जुड़ा हुआ है या नहीं.

एक बयान में फेसबुक इंडिया के प्रमुख अजीत मोहन ने कहा कि आंखी दास जनसेवा में अपनी रुचि की वजह से फेसबुक को अलविदा कह रही हैं.

मोहन ने कहा, ‘आंखी भारत में हमारे शुरुआती कर्मचारियों में से एक थीं और उन्होंने पिछले नौ सालों में कंपनी और इसकी सेवाओं के विकास में अहम भूमिका निभाई है. वह बीते दो सालों से मेरी नेतृत्व टीम का हिस्सा रहीं, जिसमें उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई. हम उनकी सेवा के लिए आभारी हैं और उनके भविष्य को लेकर शुभकामनाएं देते हैं.’

चालीस से अधिक मानवाधिकार संगठनों और इंटरनेट पर नजर रखने वाले संगठनों ने फेसबुक से दास को तब तक छुट्टी पर भेजने को कहा था, जब तक कंपनी अपने भारतीय परिचालन के ऑडिट का काम पूरा नहीं कर लेती.

दास 2011 में फेसबुक से जुड़ी थीं. फेसबुक ने उनके इस्तीफे को विवादस्पद मामले से नहीं जोड़ा है लेकिन कहा है कि कंपनी में मंगलवार उनका आखिरी दिन था.

गौरतलब है कि 14 अगस्त को वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में फेसबुक की दक्षिण और मध्य एशिया प्रभार की पॉलिसी निदेशक आंखी दास ने भाजपा नेता टी. राजा सिंह के खिलाफ फेसबुक के हेट स्पीच नियमों को लागू करने का विरोध किया था क्योंकि उन्हें डर था कि इससे कंपनी के संबंध भाजपा से बिगड़ सकते हैं.

टी. राजा सिंह तेलंगाना विधानसभा में भाजपा के एकमात्र विधायक हैं और वह अपने सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ बयानों के लिए जाने जाते हैं.

अमेरिकी अख़बार की इस रिपोर्ट में फेसबुक के कुछ पूर्व और कुछ वर्तमान कर्मचारियों के हवाले से कहा गया था कि आंखी दास ने अपने स्टाफ को बताया कि मोदी के नेताओं द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर उन्हें दंडित करने से भारत में कंपनी की कारोबारी संभावनाओं को नुकसान पहुंच सकता है.

रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत में फेसबुक की शीर्ष अधिकारी ने भाजपा नेता के अलावा अन्य हिंदू राष्ट्रवादी लोगों और समूहों की नफरत भरी पोस्ट को लेकर उन पर फेसबुक के हेट स्पीच नियम लगाए जाने का विरोध किया था.

रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने के एक दिन पहले दास ने लिखा था, ‘हमने उनके सोशल मीडिया अभियान की हवा निकाल दी और बाकी निश्चित रूप से इतिहास है.’

उन्होंने यह भी लिखा कि नरेंद्र मोदी मजबूत नेता हैं, जिन्होंने पूर्व सत्तारूढ़ दल के किले को ध्वस्त कर दिया.

वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आंखी दास ने 2012 के विधानसभा चुनावों के लिये भाजपा को सोशल मीडिया अभियान के लिये प्रशिक्षित किया था.

इस रिपोर्ट के आने के बाद से कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रिपोर्ट को लेकर भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर फेसबुक तथा वॉट्सऐप का इस्तेमाल करते हुए मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए फर्जी खबरें फैलाने का आरोप लगाया था.

कांग्रेस ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर इस रिपोर्ट के संबंध में जांच करने को भी कहा था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)