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दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत ख़राब’, प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी बढ़कर 36 फीसदी हुई

दिल्ली में शुक्रवार सुबह 9:30 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 380 दर्ज किया गया. बृहस्पतिवार को 24 घंटे का औसत सूचकांक 395 रहा था. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली ‘सफ़र’ ने कहा कि सतह पर हवा की गति बढ़ने से शनिवार तक हालात में सुधार की उम्मीद है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता शुक्रवार सुबह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही. प्रदूषण संबंधी अनुमान जताने वाली सरकारी एजेंसी ने कहा कि हवा की अनुकूल गति के कारण वायु गुणवत्ता में थोड़ा सुधार होने की उम्मीद है.

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बृहस्पतिवार को कुछ समय के लिए ‘गंभीर’ स्तर पर रहा और इसके बाद यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी मे पहुंच गया.

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली ‘सफर’ के अनुसार, दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 के संकेंद्रण में पराली जलाने का योगदान बृहस्पतिवार को इस मौसम में सर्वाधिक 36 प्रतिशत था.

दिल्ली में शुक्रवार सुबह 9:30 बजे एक्यूआई 380 दर्ज किया गया. बृहस्पतिवार को 24 घंटे का औसत एक्यूआई 395 रहा. यह बुधवार को 297, मंगलवार को 312, सोमवार को 353 और रविवार को 349 था.

शादीपुर (417), पटपड़गंज (406), बवाना (447) और मुंडका (427) समेत कई निगरानी स्टेशनों पर एक्यूआई ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया.

उल्लेखनीय है कि 0 और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे पीएम 10 का स्तर 424 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो इस मौसम में सर्वाधिक है. भारत में 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से नीचे के पीएम 10 का स्तर सुरक्षित माना जाता है.

पीएम 2.5 का स्तर 231 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मापा गया. भारत में 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पीएम 2.5 के स्तर को सुरक्षित माना जाता है.

नासा से प्राप्त उपग्रह चित्रों में पंजाब के अधिकांश और हरियाणा के कुछ हिस्सों में पराली इत्यादि जलाने की घटनाओं की पुष्टि हुई.

सफर के अनुसार, पीएम 2.5 संक्रेंद्रण में पराली जलाने का योगदान दिल्ली में 36 प्रतशित रहा. यह बुधवार को 18 प्रतिशत, मंगलवार को 23 प्रतिशत, सोमवार को 16 प्रतिशत, रविवार को 19 प्रतिशत और शनिवार को नौ प्रतिशत रहा.

सफर ने कहा कि सतह पर हवा की गति बढ़ने से शनिवार तक हालात में सुधार की उम्मीद है. हवा की गति धीमी होने और कम तापमान के कारण प्रदूषण कारक तत्व एकत्रित हो जाते हैं और हवा की रफ्तार तेज होने से वे बिखर जाते हैं.

दिल्ली के वायु प्रदूषण में पराली जलाए जाने की हिस्सेदारी बढ़कर 36 प्रतिशत हुई: सफर

दिल्ली के ‘पीएम 2.5’ प्रदूषण में पराली जलाये जाने से निकलने वाले प्रदूषकों की हिस्सेदारी बृहस्पतिवार को बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई, जो इस मौसम में सर्वाधिक है. केंद्र सरकार की वायु गुणवत्ता निगरानी एजेंसी ने यह जानकारी दी.

‘पीएम 2.5’ वायु में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास के कण हैं.

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानी एजेंसी ‘सफर’ के मुताबिक, पड़ोसी राज्यों में खेतों में पराली जलाए जाने की 2,912 घटनाएं बुधवार को दर्ज की गईं, जो इस मौसम में सर्वाधिक हैं.

सफर ने कहा, ‘दिल्ली में पीएम 2.5 के 36 प्रतिशत सकेंद्रण के लिए पराली जलाए जाने की घटनाएं जिम्मेदार हैं.’ यह संकेंद्रण बुधवार को 18, मंगलवार को 23 और सोमवार को 16, रविवार को 19 और शनिवार को नौ प्रतिशत था.

सफर ने कहा कि स्थानीय स्तर पर पैदा हुए प्रदूषकों और पराली जलाए जाने वाले क्षेत्रों से आने वाली उत्तर पछुआ हवाओं के चलते आए बाहरी प्रदूषक पीएम 2.5 के स्तर में वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं.

मौसम विभाग के मुताबिक, बृहस्पतिवार को वायु गति की दिशा उत्तर की ओर थी और अधिकतम वायु गति आठ किमी प्रति घंटा थी. न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 26 वर्षों में अक्टूबर महीने में सबसे कम था.