भारत

30 प्रतिशत आकाश मिसाइल बुनियादी परीक्षण में फेल: कैग

वहीं लोकसभा में रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने सेना में 52 हज़ार सैनिकों की कमी बताई है.

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(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

चीन से सीमा पर गतिरोध बढ़ने के बाद से ही देश की युद्ध क्षमता को लेकर तमाम तरह के दावे सुने जा रहे हैं, पर देश की सैन्य क्षमता और हथियारों को लेकर कैग की रिपोर्ट इन दावों के उलट है.

28 जुलाई को संसद को सौंपी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक ज़मीन से हवा में मार करने वाली एक तिहाई आकाश मिसाइलें अपने बुनियादी परीक्षण में विफल रही हैं.

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जून 2013 से दिसंबर 2015 तक मिसाइल सिस्टम छह जगहों पर तैनात किए जाने थे, लेकिन मार्च 2017 तक एक भी मिसाइल सिस्टम स्थापित नहीं किया जा सका. 3,619 करोड़ रुपये की लागत से बनी इन मिसाइलों को तकनीकी मुश्किलों के कारण तैनात नहीं करने की बात सामने आई है.

2014 में वायुसेना ने क्वॉलिटी कंट्रोल के तहत 20 मिसाइलों का टेस्ट किया गया, जिसमें छह मिसाइलें असफल रहीं, यहां तक कि दो मिसाइल अपने लॉन्च पैड से भी उड़ान तक नहीं भर सकीं. साथ ही कुछ मिसाइलों में आवश्यक वेलॉसिटी का अभाव पाया गया.

आकाश का निर्माण सरकारी कंपनी भारत इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स द्वारा किया गया है और इसका 95 फीसदी भुगतान किया जा चुका है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक आकाश अपने लक्ष्य से पीछे छूट गया है, साथ ही इसकी गुणवत्ता भी कमज़ोर नज़र आई है.

कैग के अनुसार भुगतान के बावजूद एक भी मिसाइल सिस्‍टम निर्धारित 6 जगहों में से कहीं इंस्‍टॉल नहीं हुए हैं जबकि अनुबंध हुए सात साल हो चुके हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायुसेना ने इस पर कोई टिप्‍पणी करने से इनकार किया है.

सेना में है जवानों की कमी: रक्षा राज्यमंत्री

वहीं दूसरी ओर संसद में ही पेश एक दूसरी रिपोर्ट के अनुसार देश में सुरक्षा बलों की आवश्यक संख्या में भी कमी है.

एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार लोकसभा में एक लिखित प्रश्न का जवाब देते हुए रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने बताया कि भारतीय सेना की तीनों शाखाओं में कुल मिलाकर तकरीबन 52 हज़ार सैनिकों की कमी है.

रक्षा राज्यमंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ें के अनुसार भारतीय सेना में करीब 14 लाख जवान हैं. लेकिन सेना में 25,472 संयुक्त कमान और अन्य रैंक के अधिकारियों की कमी है. वहीं वायुसेना और नौसेना, दोनों में लगभग 13 हज़ार सैनिकों की कमी है. हालांकि भामरे ने यह भी साफ किया कि सेना की यह मौजूदा कमी सेना की कुल क्षमता का एक बहुत छोटा हिस्सा है.

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले आई एक कैग रिपोर्ट में सेना के पास ज़रूरी गोला-बारूद की कमी होने की बात भी सामने आई थी, जिस पर रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने आश्वासन दिया था कि सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.