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भाजपा का फ्री कोरोना वैक्सीन का वादा चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं: चुनाव आयोग

बिहार विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में भाजपा ने कहा है कि अगर उनकी सरकार आई तो हर बिहारवासी को कोरोना वायरस का फ्री टीका मिलेगा. इस पर राजद, कांग्रेस समेत  अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा पर महामारी के राजनीतिकरण और लोगों में बीमारी और डर बेचने का आरोप लगाया था.

बिहार चुनाव के लिए भाजपा का घोषणापत्र जारी करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व अन्य भाजपा नेता. (फोटो: पीटीआई)

बिहार चुनाव के लिए भाजपा का घोषणापत्र जारी करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व अन्य भाजपा नेता. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: बिहार चुनाव में लोगों को मुफ्त कोविड-19 वैक्सीन देने का भाजपा द्वारा घोषणापत्र में किया गया वादा चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते की गई इस घोषणा के बारे में दर्ज कराई गई एक शिकायत पर फैसला करते हुए चुनाव आयोग ने यह कहा है.

चुनाव आयोग ने भाजपा को यह क्लीन चिट आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले की शिकायत पर दी है.

गोखले ने आरोप लगाया था कि यह देखते हुए कि वैक्सीन नीति अभी तक तय नहीं की गई है, यह घोषणा केंद्र सरकार की शक्तियों का घोर उल्लंघन था और मतदाताओं को गुमराह करने का प्रयास किया गया था.

चुनाव आयोग ने यही रुख लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की न्याय योजना के दौरान दर्ज कराई गई शिकायत पर भी अपनाया था जिसके तहत कांग्रेस ने करीब 25 करोड़ लोगों को प्रति माह छह हजार रुपये की राशि देने की घोषणा की थी.

गोखले की शिकायत पर 28 अक्टूबर को दिए गए जवाब में आयोग ने चुनाव आचार संहिता के तीन प्रावधानों का उल्लेख किया था जिसमें कहा गया था कि चुनाव घोषणापत्र में संविधान के विपरित कुछ भी शामिल नहीं होना चाहिए, चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को भंग करने वाले या मतदाता पर अनुचित प्रभाव डालने वाले वादों से बचना चाहिए और वादों के पीछे तर्क को प्रतिबिंबित करना चाहिए.

जवाब में यह भी कहा गया कि घोषणापत्र हमेशा एक विशेष चुनाव के लिए जारी किए जाते हैं.

आयोग ने कहा, उपरोक्त के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता के किसी भी प्रावधान का कोई उल्लंघन तत्काल मामले में नहीं देखा गया है.

बता दें कि भाजपा की घोषणा ने बिहार में जारी चुनाव में राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया था और इसकी राजद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने महामारी का राजनीतिकरण करने और लोगों में बीमारी व भय बेचने का आरोप लगाया था.