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पुलिस से मारपीट के आरोप में अर्णब गोस्वामी, उनकी पत्नी, बेटे और दो अन्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को 2018 में एक इंटीरियर डिज़ाइनर और उनकी मां की आत्महत्या मामले में बीते चार नवंबर को गिरफ़्तार किया गया था. उन्हें 18 नवंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

अर्णब गोस्वामी. (फोटो: पीटीआई)

अर्णब गोस्वामी. (फोटो: पीटीआई)

मुंबईः मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी, उनकी पत्नी, बेटे और दो अन्य पर कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों पर हमला करने के आरोप में बुधवार को मामला दर्ज किया है.

आरोप है कि जिस समय पुलिस अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार करने उनके घर पहुंची, उस समय उनकी पत्नी सम्यब्रता गोस्वामी और बेटे एवं दो अन्य ने पुलिस के काम में बाधा डालने का प्रयास भी किया था.

जब अर्णब को पुलिस वैन में ले जाया जा रहा था, उस समय उन्हें (अर्णब) यह कहते हुए सुना गया कि पुलिस ने उनके घर में उनसे मारपीट की.

बता दें कि अलीबाग पुलिस की एक टीम ने साल 2018 में 53 साल की एक इंटीरियर डिजाइनर और उनकी मां को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में बीते चार नवंबर को अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था.

पुलिस ने अर्णब, उनकी पत्नी, बेटे और दो अन्य पर कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने  को लेकर एफआईआर दर्ज की है.

अर्णब गोस्वामी और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 353 (लोक सेवक को उनके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला करना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), 506 (धमकी देना) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित अधिनियम के तहत मुंबई के एनएम जोशी मार्ग पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई.

गोस्वामी को गिरफ्तार करने वाली टीम का हिस्सा रहीं महिला पुलिस कॉन्स्टेबल एसजी तानवडे ने यह शिकायत दर्ज कराई थी.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, तानवडे के बयान में कहा गया कि गोस्वामी ने पुलिस को बताया, ‘मैं पत्रकार हूं. मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की जाए.’

शिकायत के मुताबिक, गोस्वामी, उनकी पत्नी सम्यब्रता, बेटा और दो लोगों ने पत्रकार को गिरफ्तार करते समय पुलिस के काम में बाधा पहुंचाने की कोशिश की.

शिकायत में कहा गया कि सम्यब्रता गोस्वामी ने गिरफ्तारी के उन कागजात को फाड़ दिया, जिन पर पुलिस उनके हस्ताक्षर लेना चाहती थी.

तानवडे ने अपने बयान में यह भी कहा कि आरोपियों ने गिरफ्तारी के समय वे सभी कदम उठाए, जिनसे अर्णब को पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जा सके, इसलिए उन्हें एफआईआर दर्ज कराने के लिए मजबूर होना पड़ा.

अलीबाग की एक अदालत ने बुधवार को अर्णब गोस्वामी को 18 नवंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

बता दें कि अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी 2018 में एक 53 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद नाइक की मौत के मामले से जुड़ी है.

गोस्वामी पर उन्हें कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है. 2018 में अलीबाग में अन्वय और कुमुद की मौत आत्महत्या से हुई थी, जिसके बाद मिले एक सुसाइड नोट में अन्वय ने कथित तौर पर अर्णब और दो अन्य लोगों पर उनके 5.40 करोड़ रुपये न देने का आरोप लगाया था, जिसके चलते वे गंभीर आर्थिक संकट में आ गए थे.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)