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दिल्ली हाईकोर्ट ने ताहिर हुसैन को पार्षद पद के लिए अयोग्य ठहराने के फ़ैसले पर रोक लगाई

दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में गिरफ़्तार ताहिर हुसैन को पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने कथित तौर पर बिना सूचना के लगातार निगम की तीन बैठकों में शामिल न होने के कारण पार्षद के तौर पर अयोग्य ठहराया दिया था. अदालत ने इस फ़ैसले को मनमाना और ग़ैर क़ानूनी बताया है.

ताहिर हुसैन. (फोटो: द वायर/वीडियोग्रैब)

ताहिर हुसैन. (फोटो: द वायर/वीडियोग्रैब)

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने ताहिर हुसैन को नगर पालिका निकाय के पार्षद के रूप में आयोग्य ठहराने के पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) के फैसले पर शुक्रवार को रोक लगा दी.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार अदालत ने ईडीएमसी के फैसले को मनमाना, गैर क़ानूनी और न्याय के सिद्धांत के उलट बताया है.

जस्टिस नजमी वजीरी ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) के फैसले के खिलाफ ताहिर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.

अदालत ने इसके साथ ही निगम को नोटिस जारी किया. निगम को इस नोटिस का जवाब अगले साल मार्च तक देना है. निगम की ओर से उसके स्थाई वकील गौरांग कंठ उपस्थित थे.

ताहिर हुसैन को उत्तर-पूर्व दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया है और वे ऐसे दस मामलों में आरोपी हैं.

हुसैन की ओर से पेश हुए वकील रिज़वान ने अदालत के ईडीएमसी के फैसले पर रोक लगाने की पुष्टि की. पूर्व आप पार्षद की ओर से उनकी पत्नी ने याचिका दायर की थी.

ईडीएमसी ने ताहिर को कथित तौर पर बिना सूचना के निगम की लगातार तीन बैठक में शामिल नहीं होने के कारण पार्षद के तौर पर अयोग्य ठहराया दिया था.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, रिजवान ने कहा कि उनके मुवक्किल लगातार तीन महीनों तक बैठक से खुद गैर मौजूद नहीं रहे थे क्योंकि लगातार तीन महीनों तक बैठक हुई ही नहीं.

वकील ने अदालत को बताया, ‘बैठकें जनवरी और फरवरी में हुई थीं और इसके बाद जून और जुलाई में हुई थीं. उनकी सीट खाली करने का प्रस्ताव 20 अगस्त को लाया गया था और उस प्रस्ताव पर 26 अगस्त को फैसला लिया गया था. हालांकि इस दौरान याचिकाकर्ता को न तो कोई सूचना दी गई और न ही कोई उचित अवसर दिया.’

याचिका में कहा गया कि एक मामले में 5 मार्च तक हुसैन न्यायिक हिरासत में थे और अपरिहार्य परिस्थितियों के लिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.

इस दौरान ईडीएमसी मेयर निर्मल जैन ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम का हवाला दिया था और कहा कि यदि कोई पार्षद लगातार तीन बार निगम की बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी अनुमति के बिना उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है.

अगस्त में उन्होंने कहा था, ‘ताहिर हुसैन ने पिछले 3-4 महीनों में सदन की किसी भी बैठक में भाग नहीं लिया. उनकी अनुपस्थिति के कारणों के बारे में उन्होंने मुझे या निगम को सूचित नहीं किया. इसलिए, हमने इस आधार पर उनकी सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया है कि उन्होंने निगम को सूचित किए बिना लगातार कम से कम तीन बैठकों को छोड़ दिया है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)