राजनीति

मीडिया में कांग्रेस के ख़िलाफ़ बोलने पर कई पार्टी नेताओं ने कपिल सिब्बल की आलोचना की

वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने एक साक्षात्कार में कहा था कि ऐसा लग रहा है कि अब लोग कांग्रेस को एक प्रभावी विकल्प नहीं मान रहे हैं. सिब्बल का यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आया है. इस चुनाव में महागठबंधन की घटक कांग्रेस सिर्फ़ 19 सीटों पर सिमट गई, जबकि उसने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था.

कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, विवेक तन्खा, कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद. (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, विवेक तन्खा, कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद एक बार फिर से पार्टी की कार्यप्रणाली की आलोचना करने वाले वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के खिलाफ कई वरिष्ठ नेता सामने आ गए हैं और मीडिया में पार्टी की आलोचना करने की निंदा की है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी के आंतरिक मुद्दे का जिक्र मीडिया में करने के लिए अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि सिब्बल को इस तरह से पार्टी के आंतरिक मुद्दे का जिक्र मीडिया में करने की कोई जरूरत नहीं थी और इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत होती हैं.

गहलोत ने मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर कई ट्वीट किए. उन्होंने लिखा है, ‘कपिल सिब्बल द्वारा पार्टी के आंतरिक मुद्दे का जिक्र मीडिया में करने की कोई जरूरत नहीं थी, इससे देश भर में पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत होती हैं.’

गहलोत ने लिखा है, ‘कांग्रेस ने 1969, 1977, 1989 और उसके बाद 1996 में अनेक संकट देखे, लेकिन अपनी विचारधारा, कार्यक्रमों व नीतियों और पार्टी नेतृत्व में मजबूत विश्वास के चलते हर बार हम और अधिक मजबूत होकर निकले हैं. हम हर संकट के बाद बेहतर हुए और 2004 में सोनिया गांधी के नेतृत्व में संप्रग सरकार भी बनी. इस बार भी हम संकट से निकल आएंगे.’

गहलोत की बातों से सहमति जताते हुए वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने कहा, ‘अशोक जी ने सही कहा. कपिल सिब्बल वरिष्ठ नेता हैं. उसे यह समझना चाहिए कि यदि पार्टी में किसी चीज की कमी है और वह सुझाव देना चाहते हैं, तो उन्हें पार्टी हाईकमान और अध्यक्ष से मिलना चाहिए. अगर वह मीडिया को बयान दे रहे हैं, तो यह केवल पार्टी के लिए नुकसानदायक होगा.’

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हमें पार्टी मंचों के बाहर कुछ भी चर्चा करनी चाहिए. हमें नहीं लगता कि हमें बाहर के लोगों के हाथों खेलना चाहिए. बहुत से गंभीर काम हैं, जिन्हें किया जाना है. मेरे जैसे लोगों को हमारे भविष्य के बारे में कोई चिंता नहीं है, क्योंकि हम अपनी पार्टी में सहज महसूस करते हैं.’

कांग्रेस की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने सिब्बल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह उनके साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ लड़ाई लड़ें.

अनिल कुमार ने ट्वीट किया, ‘सिब्बल जी, दिल्ली देश की राजधानी है. आप यहां से सांसद रहे, मंत्री रहे. पिछले कुछ समय से आप दिल्ली की राजनीति में सक्रिय नहीं हैं. आइए मिलकर दिल्ली में मोदी और केजरीवाल से लड़ते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘आप वरिष्ठ नेता हैं. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डीपीसीसी) में आप किसी भी समय आएं, हमें दिल्ली की लड़ाई के लिए गाइड करें. मैं चाहूंगा कि आप रोज अपना कुछ समय डीपीसीसी में बिताएं. आप जिस भी विभाग में, जिस भी पद पर काम करना चाहें, ये हमारा सौभाग्य होगा.’

दरअसल, सिब्बल ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए साक्षात्कार में कहा था कि ऐसा लगता है कि पार्टी नेतृत्व ने शायद हर चुनाव में पराजय को ही अपनी नियति मान ली है. उन्होंने कहा कि बिहार ही नहीं, उपचुनावों के नतीजों से भी ऐसा लग रहा है कि देश के लोग कांग्रेस पार्टी को प्रभावी विकल्प नहीं मान रहे हैं.

उन्होंने कहा था, ‘कांग्रेस पार्टी को उसके समक्ष आईं समस्याएं पता हैं और वह उसका समाधान भी जानती है, लेकिन वह समाधान को अपनाने से कतरा रहे हैं.’ सिब्बल ने कहा कि आत्मनिरीक्षण का समय अब खत्म हो गया है.

वहीं, तमिलनाडु से पार्टी के सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने सिब्बल की बातों से सहमति जताते हुए कहा था कि कांग्रेस के लिए यह आत्मविश्लेषण, चिंतन और विचार-विमर्श करने का समय है.

सिब्बल का यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आया है. इस चुनाव में महागठबंधन की घटक कांग्रेस सिर्फ 19 सीटों पर सिमट गई, जबकि उसने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था.

बता दें कि कपिल सिब्बल कांग्रेस पार्टी के उन 23 नेताओं में से एक हैं ,जिन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में बदलाव लाने, जवाबदेही तय करने, नियुक्त प्रक्रिया को मजबूत बनाने और हार का उचित आकलन करने की मांग की थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)