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अख़लाक़ हत्याकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो आरोपियों को दी ज़मानत

उत्तर प्रदेश में दादरी के बिसाहड़ा गांव में 28 सितंबर, 2015 को हुए मोहम्मद अख़लाक़ की भीड़ ने बीफ़ खाने के संदेह में पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

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मोहम्मद अख़लाक़. (फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश में दादरी के बिसाहड़ा गांव में 28 सितंबर, 2015 को हुए मोहम्मद अख़लाक़ की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मुख्य आरोपी विशाल राणा और हरिओम को ज़मानत दे दी है.

विशाल भाजपा नेता सुरेश राणा के बेटे हैं. इस हत्याकांड में कुल 18 गिरफ्तारियां हुई थीं.

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 18 आरोपियों में तीन नाबालिग थे, जिन्हें ज़मानत मिल चुकी है. एक अन्य आरोपी रवि सिसोदिया उर्फ़ रॉबिन की जेल में ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. ज़मानत पाने वाला हरिओम एक अन्य आरोपी श्रीओम के सगे भाई हैं.

22 वर्षीय विशाल राणा की ज़मानत की पुष्टि उनके पिता सुरेश राणा ने की है. मामले में अभी भी तीन आरोपी रूपेंद्र, विवेक और श्रीओम जेल में हैं.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, विशाल ने अप्रैल महीने में ज़मानत की अर्ज़ी अदालत में दायर की थी. उनके वकील राम सरन नागर ने बताया कि विशाल के बाहर आने में कुछ दिन और लगेंगे. अदालत का आदेश अभी स्थानीय जेल प्रशासन को मिलेगा, उसके बाद ही वह घर आ सकेंगे.

घर में कथित तौर पर बीफ़ रखे जाने की अफवाह पर बिसाहड़ा गांव में भीड़ ने साल 2015 में 52 वर्षीय मोहम्मद अख़लाक़ की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

घटना में अख़लाक़ के बेटे दानिश भी बुरी तरह घायल हो गए थे. अख़लाक़ के दूसरे बेटे सरताज वायु सेना में कॉर्पोरल पद पर कार्यरत हैं.

जांच के दौरान पुलिस ने अख़लाक के घर के फ्रिज से मांस को अपने कब्ज़े में ले लिया था. शुरुआती जांच में पता चला कि वो मांस मटन है, लेकिन मथुरा फॉरेसिंक लैब में हुई एक और जांच में पता चला कि वो मांस गाय या गोवंश प्रजाति का है.

दूसरी रिपोर्ट के आधार पर अख़लाक़ के परिवार पर पुलिस ने मुक़दमा दर्ज किया था. गांव वालों ने आरोप लगाया है कि अख़लाक़ और उनके भाई को गांववालों ने बछड़े को काटते हुए देखा था.