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दिल्ली दंगा: उमर ख़ालिद और शरजील इमाम के ख़िलाफ़ यूएपीए मामले में चार्जशीट दाख़िल

पुलिस ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर ख़ालिद को 14 सितंबर और छात्र शरजील इमाम को 25 अगस्त को यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया था.

शरजील इमाम और उमर खालिद. (फोटो साभार: फेसबुक/द वायर)

शरजील इमाम और उमर खालिद. (फोटो साभार: फेसबुक/द वायर)

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने फरवरी में शहर के उत्तरी-पूर्वी हिस्से में हुई सांप्रदायिक हिंसा के ‘षड्यंत्र’ से संबंधित मामले में रविवार को जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और छात्र शरजील इमाम के खिलाफ यहां एक अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दिया है.

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने खालिद, इमाम और एक अन्य आरोपी फैजान खान के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज इस मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष चार्जशीट दाखिल किया.

उन पर दंगा करने, गैर-कानूनी तरीके से एकत्रित होने, आपराधिक साजिश, हत्या, धर्म, भाषा, जाति इत्यादि के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देने और भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. इन अपराधों के तहत अधिकतम मृत्युदंड की सजा दी जा सकती है.

930 पन्नों के इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट को यूएपीए की धारा 13 (गैर-कानूनी गतिविधियां), 16 (आतंकवादी गतिविधि), 17 (आतंकवादी गतिविधि के लिये चंदा जुटाना) और 18 (षड्यंत्र) के तहत दायर किया गया है. इसके अलावा उन्हें आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ धारा 109 (उकसाना), 114 (अपराध के समय उकसाने वाले की मौजूदगी), 147 और 148 (दंगा) के तहत आरोपित किया गया है.

सूत्रों ने कहा कि तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 341, 353, 395, 419, 419, 427, 435, 436, 452, 454, 468, 471 और 34 भी लगाई गई है. इसके अलावा उनके खिलाफ शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के अधिनियम के तहत यह आरोप पत्र दायर किया गया है.

फैजान खान को जहां दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है. वहीं, उमर खालिद और शरजील इमाम फिलहाल इस मामले में न्यायिक हिरासत में हैं.

शुक्रवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने विशेष अभियोजक के अनुरोध के बाद दोनों की न्यायिक हिरासत 23 नवंबर तक बढ़ा दिया था.

इस दौरान जज ने खालिद से पूछा था कि क्या उन्हें तिहाड़ जेल में किसी तरह की दिक्कत भी हो रही है, जैसा कि पूर्व में उन्होंने जिक्र किया था. इस पर खालिद ने कहा, ‘मेरी आजादी पर रोक लगाने और दुर्भावनापूर्ण जांच के अलावा, मुझे और किसी चीज से दिक्कत नहीं है.’ खालिद ने पूर्व में आरोप लगाया था कि उन्हें न्यायिक हिरासत के दौरान अपने सेल से बाहर निकलने या किसी से मिलने नहीं दिया जाता.

बता दें कि मुख्य चार्जशीट सितंबर में पिंजरा तोड़ की सदस्यों तथा जेएनयू की छात्राओं देवांगना कलीता और नताशा नरवाल, जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा फातिमा के खिलाफ दायर किया गया था.

अन्य आरोपी जिनका चार्जशीट में नाम है, उनमें कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां, जामिया समन्वय समिति के सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर और शिफाउर्रहमान, आम आदमी पार्टी के निलंबित विधायक ताहिर हुसैन, कार्यकर्ता खालिद सैफी, शादाब अहमद, तसलीम अहमद, सलीम, अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान और अतहर खान शामिल हैं.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता कानून में संशोधनों के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी को सांप्रदायिक झड़पें शुरू हुई थीं, जिसमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 200 लोग घायल हो गए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)