राजनीति

अर्णब के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने वाले शिवसेना विधायक के यहां ईडी के छापे

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों के ख़िलाफ़ टिप्पणी के लिए रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया था. सरनाईक ने अभिनेत्री कंगना रनौत के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई के लिए भी विधानसभा में एक प्रस्ताव लाए जाने की मांग की थी.

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक. (फोटो: फेसबुक/@sarnaikpratap)

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक. (फोटो: फेसबुक/@sarnaikpratap)

मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मंगलवार को शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक और उनके बेटे के आवास और दफ्तर सहित ठाणे और मुंबई में 10 स्थानों पर छापेमारी की.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ठाणे के ओवाला-मजीवाडा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के शिवसेना विधायक सरनाईक ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के अन्य मंत्रियों के खिलाफ टिप्पणी के लिए रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया था.

इसके साथ ही 56 वर्षीय सरनाईक ने पत्र लिखकर गोस्वामी के खिलाफ दर्ज आर्किटेक्ट अन्वय नाइक को आत्महत्या के लिए कथित रूप से उकसाने के 2018 के एक मामले को फिर से खोलने की मांग की थी. इस मामले में रायगढ़ पुलिस ने गोस्वामी को गिरफ्तार किया था. हालांकि, गोस्वामी इस समय जमानत पर हैं.

सरनाईक ने अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र विधानसभा में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव लाए जाने की भी मांग की थी.

हालांकि जांच एजेंसी ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग केस के विवरण का खुलासा नहीं किया है. ईडी ने कहा था कि राहुल नंदा द्वारा स्थापित एक सिक्योरिटी फर्म टॉप्स ग्रुप के प्रमोटर्स और उससे संबंधित सदस्यों जिसमें कुछ नेता शामिल हैं, के यहां छापेमारी की गई है.

इसके बाद एजेंसी ने सरनाईक के बेटे विहंग सरनाईक को हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए दक्षिणी मुंबई के बलार्ड एस्टेट स्थित अपने दफ्तर ले गई.

नंदा और सरनाईक के खिलाफ ईडी का मामला मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर पर आधारित है, जिसे दर्ज करने का निर्देश एक मजिस्ट्रेट अदालत ने दिया था. यह एफआईआर टॉप्स ग्रुप के दो वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा दर्ज शिकायत पर आधारित है, कंपनी ने जिनकी सेवाएं धन के गबन के मामले में बीते 10 अक्टूबर को समाप्त कर दी थीं.

पुलिस में दर्ज कराई गई अपनी शिकायत में दोनों पूर्व कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि नंदा ने एक ऑफशोर ट्रस्ट को पैसे दिए और 2007 में ब्रिटेन में एक फर्म के अधिग्रहण में टॉप्स ग्रुप द्वारा अनियमितताओं का भी आरोप लगाया.

नंदा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि टॉप्स ग्रुप ने सितंबर में कंपनी से धन की हेराफेरी करने के लिए दोनों कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं.

उन्होंने कहा, ‘मैं 14 साल पहले लंदन में बस गया था और भारत में टॉप्स ग्रुप का प्रबंधन पेशेवरों द्वारा किया जा रहा है. मैं केवल कंपनी का शेयरधारक हूं. 2019 में मुझे पता चला कि कंपनी भुगतानों में चूक कर रही है, इसलिए मैं भारत आया और बोर्ड ने एक फोरेंसिक ऑडिट शुरू की, जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश अय्यर और निदेशक (वित्त) अमर पंघाल द्वारा धन का गबन किया गया था. उनके रोजगार को समाप्त कर दिया गया और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. अब उन्होंने मेरे खिलाफ ईडी में शिकायत दर्ज कराई है.’

वहीं, नंदा ने सरनाईक के साथ व्यापार सौदे से इनकार किया है. नंदा ने कहा, ‘मैं 25 साल से प्रताप सरनाईक को जानता हूं और उन्होंने मेरी कंपनी में एक रुपया भी निवेश नहीं किया है.’

शिकायत में 2007 में ब्रिटेन स्थित द शील्ड गार्डिंग कंपनी लिमिटेड के अधिग्रहण में टॉप्स ग्रुप द्वारा 140 करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. ब्रिटेन की फर्म ने 2016 में दिवालिया होने के लिए अर्जी दी थी. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नंदा ने मॉरीशस के एक ट्रस्ट को कथित तौर पर पैसे दिए जिसके सरनाईक के साथ करीबी रिश्ते हैं.

नंदा ने ईडी को बताया है कि टॉप्स ग्रुप के 66 प्रतिशत शेयरों को स्थानांतरित करने के लिए शीर्ष कानूनी फर्म खेतान एंड कंपनी और निशित देसाई एंड एसोसिएट्स के साथ सलाह के बाद मॉरीशस ट्रस्ट कानून के अनुसार बनाया गया था. नंदा ने कहा, ‘ट्रस्ट को कभी कोई फंड ट्रांसफर नहीं किया गया था. हमने मॉरीशस में एक बैंक खाता खोला था लेकिन इस खाते का उपयोग कभी नहीं किया गया.’

ईडी की छापेमारी मुझे चुप नहीं करा सकती: सरनाईक

शिवसेना के विधायक प्रताप सरनाईक ने उनके परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद मंगलवार को कहा कि इस प्रकार के कदम उन्हें चुप नहीं करा सकते और वह मुंबई एवं महाराष्ट्र के लिए ‘फांसी पर भी लटकने’ को तैयार हैं.

सरनाईक ने कहा कि ईडी के एक दल ने उनके कार्यालय एवं घर में तलाशी ली और दस्तावेज जब्त कर लिए. उन्होंने कहा कि वह करीब 30 साल से निर्माण और होटल कारोबार कर रहे हैं और नियमित रूप से कर दे रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘मेरे स्टाफ और बेटे ने ईडी के लोगों को जानकारी दी, लेकिन वे संतुष्ट नहीं थे.’

भाजपा और केंद्र पर भड़के महाराष्ट्र विकास अघाड़ी नेता

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक पर ईडी छापे मारने पर महाराष्ट्र में सत्ताधारी महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के नेताओं ने भाजपा और केंद्र सरकार की आलोचना की.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को भाजपा पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि शिवसेना नीत महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के एक साल बीत जाने के बाद जब उसे यह एहसास हो गया कि राज्य में उसके लिए सरकार गठन दूर की कौड़ी है, तब वह सत्ता का दुरुपयोग करने लगी है. उन्होंने कहा जिस तरह अघाड़ी सरकार को आम लोगों का समर्थन मिल रहा है, उससे विपक्षी खेमे में निराशा छा गयी है.

शिवसेना ने मंगलवार को कहा कि पार्टी विधायक प्रताप सरनाईक के एक ‘टेलीविजन चैनल’ के खिलाफ और आर्किटेक्ट अन्वय नाइक की आत्महत्या के मामले में कड़ा रुख अपनाने के कारण ईडी ने ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्तियों पर छापेमारी की.

शिवसेना सांसद संजय राउत ने भाजपा का नाम लिए बगैर कहा कि भले ही वह एजेंसियों के जरिये कितना भी डर फैलाए या दबाव बनाए, उसे (भाजपा) अगले 25 साल तक महाराष्ट्र में सत्ता में आने का ख्वाब देखना बंद कर देना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र सरकार या उसके नेता किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे.’

प्रताप सरनाईक ने शाम को राउत से मुलाकात की थी. राउत ने कहा कि सरनाईक ने उन्हें बताया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है, उनके खिलाफ ईडी ने किस मामले में कार्रवाई की है.

 

राउत ने कहा कि यदि ईडी पार्टी के हर विधायक, सांसद या नेता के आवास के बाहर भी अपना कार्यालय खोल लेती है, तो भी शिवसेना नहीं डरेगी. उन्होंने कहा कि ईडी जिस पार्टी के आदेश के तहत काम कर रही है, वह उसके 100 लोगों के कारोबारों और उनके धनशोधन के तरीकों के बारे में सूची सौंप सकते हैं.

राउत ने कहा कि यदि केंद्रीय जांच एजेंसियां, न्यायपालिका एवं कानून सत्तासीन लोगों के ‘दास या नौकर’ की तरह व्यवहार करते हैं, तब भी शिवसेना को कोई परवाह नहीं है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)