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आगरा में चोटी काटने की अफ़वाह पर महिला की पीट-पीटकर हत्या

चोटी काटने की अफ़वाह में एक बुज़ुर्ग दलित महिला की चुड़ैल बताकर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. चार राज्यों में अब तक ऐसी घटनाओं के 75 से भी ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं.

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आगरा में मानदेवी को चुड़ैल बताकर ग्रामीणों ने पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी. (फाइल फोटो साभार: अमर उजाला)

दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में महिलाओं के चोटी काटने की अफवाह फैली है. इस अफवाह के तहत कहा जा रहा है कि अचानक कोई महिलाओं की चोटी यानी बाल काट रहा है. इन राज्यों की करीब 75 महिलाओं की ओर से कहा गया है कि उन्हें किसी ने रहस्यमय तरीके से बेहोश करके उनके बाल काट लिए. इसी अफवाह और अंधविश्वास के चलते आगरा में एक महिला को बाल काटने वाली चुड़ैल बताकर उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.

यह कौन कर रहा है, अब तक किसी को नहीं पता. इसके पीछे शरारती तत्व या कोई गैंग हो सकता है. अब तक इस तरह के 75 से अधिक मामले सामने आए हैं. पुलिस इसे अफवाह और अंधविश्वास बता रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि महिलाएं झूठ नहीं बोल रही हैं, उनके साथ ऐसा हुआ है और वे सदमे में हैं. पुलिस किसी वैज्ञानिक शरारत के एंगल से भी छानबीन कर रही है. जिनके साथ ऐसा हो रहा है, वे महिलाएं इसे जादू टोना से जोड़कर देख रही हैं.

समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार आगरा के गांव डौकी के मगठई में बुधवार को विधवा महिला को ग्रामीणों ने चोटी काटने की अफवाह में चुडै़ल बताकर, पीट-पीटकर उसकी निर्मम हत्या कर दी. पुलिस ने तहरीर पर दो लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है.

मंगलवार देर रात 62 वर्षीय मानदेवी रात को शौंच के लिए बाहर गईं थीं. अंधेरा होने के चलते वे रास्ता भटक गईं और बघेल समाज की बस्ती में पहुंच गईं, जहां चारपाई पर सो रही लड़की की नींद टूटी और अचानक सफेद साड़ी में एक महिला को सामने देख युवती ने शोर मचा दिया. बस्ती के लोगों ने महिला को चुडै़ल बताकर पीटना शुरू कर दिया.

महिला की इतनी बुरी तरह से पिटाई की गई कि वो मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई. हड़बड़ी में परिवार के लोग उसे आगरा के एक अस्पताल लेकर पहुंचे. यहां प्रारम्भिक इलाज के बाद महिला को घर भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

अमर उजाला की ख़बर के अनुसार, मानदेवी के बेटे गुलाब सिंह ने अपनी मां की मौत के बाद 100 नंबर पर फोन लगाया पर पुलिस नहीं पहुंची. जिसके बाद लोगों ने शव सड़क पर रखकर डौकी में जाम लगाया उसके बाद पुलिस घटना स्थल पर पुलिस पहुंची.

पुलिस ने दो भाइयों मनीष और सोनू बघेल के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज किया है. दलित और बघेल समाज के बीच जातीय तनाव की स्थिति बन गई है.

समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार डौकी थाना इंसपेक्टर डीपी शर्मा का कहना है कि घटना के संबंध में तहरीर मिली है. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. महिला विक्षिप्त थी. उसके सिर में डंडा लग गया जिससे उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई.

एनडीटीवी इंडिया के अनुसार परिवार वाले अब आरोपी लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की. हंगामे के बाद सीओ फतेहाबाद ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी.

अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक़ एडीजी अजय आनंद का कहना है कि चोटी काटने का मामला कोरी अफ़वाह और अंधविश्वास है. इन पर लोगों को ध्यान नहीं देना चाहिए और अगर इनकी आड़ में कोई क़ानून हाथ में लेता है तो पुलिस उस पर कड़ी कार्रवाई करेगी. पर ज़्यादातर पीड़ित महिलाएं इसके समाधान के लिए टोने -टोटके और झाड़-फ़ूंक पर विश्वास कर रही हैं.

चोटी कटने की घटनाओं की संख्या अब तक 75 से भी ज़्यादा पहुंच चुकी हैं. सबसे पहले राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा क्षेत्र और बेदू कला ऊनवड़ा में चोटी काटने की घटना सामने आयी थी. उसके बाद हरियाणा और अब उत्तर प्रदेश में भी समान तरह की वारदातों की ख़बरें आ रही हैं.

हरियाणा के फ़तेहाबाद से चोटी काटने का सिलसिला शुरू हुआ और धीरे धीरे पलवल, मेवात, फ़रीदाबाद और गुरूग्राम तक जा पहुंचा. अकेले हरियाणा में 41 वारदातों की ख़बर है.

इसी तरह से साल 2001 के मई महीने में मंकी मैन या कला बंदर देखे जाने की घटना सामने आयी थी. दिल्ली और नोएडा में तथाकथित दो लोगों की मौत हो गई थी. साल 2002 के जुलाई महीने में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एक विचित्र प्राणी के हमलों ने आतंक मचाया था. कहा जाता था कि यह प्राणी अपने पंजो से मुंह नोच लेता है इसीलिए उसका नाम मुंहनोचवा बताया जाता था.

न्यूज़ वेबसाइट बीबीसी के अनुसार उत्तर भारत में हरियाणा और राजस्थान में 50 से भी अधिक महिलाओं ने शिकायत की है किसी ने उन्हें बेहोश कर रहस्मयी तरीक़े से उनके बाल काट लिए हैं.

तर्कवादी सनाल एडामरूकू ने बीबीसी से कहा कि वो मानते हैं कि ये ‘मास हिस्टिरिया’ या ‘जन भ्रम’ का बेहतरीन उदाहरण है. उन्होंने कहा, ‘इसके पीछे कोई चमत्कार या अलौकिक शक्ति नहीं है. इन घटनाओं की रिपोर्ट करने वाली महिलाएं निश्चित तौर पर किसी आंतरिक मनोवैज्ञानिक द्वंद्व से जूझ रही होंगी. जब वो इस तरह की घटनाओं के बारे में सुनती हैं तो खुद पर ऐसा होते हुए सा अहसास करती हैं, ऐसा कभी कभी अवचेतनावस्था में भी होता है.’

वहीं अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक़ पुलिस ने मानव व्यवहर और संबंध संस्थान (इहबास) से महिलाओं की काउंसलिंग कराई और विशेषज्ञों के अनुसार महिलाएं झूठ नहीं बोल रही है और उन्होंने अपने बाल स्वयं नहीं काटे हैं.

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया की पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या किसी केमिकल या गैस से बाल काटना संभव है. मतलब किसी वैज्ञानिक शरारत की जांच के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचेगी. पुलिस लोगों को अंधविश्वास और अफ़वाहों से दूर रहने और सावधान रहने के लिए चेता रही है.