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अर्थव्यवस्था तकनीकी रूप से मंदी में, दूसरी तिमाही की जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट

आने वाले समय में बेहतर उपभोक्ता मांग से इसमें और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. अगर दो तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में गिरावट रहे तो उस अर्थव्यवस्था को मंदी में कहा जाता है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्लीः भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में उम्मीद से बेहतर रहा है. ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 7.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि इससे बड़े संकुचन का अनुमान लगाया जा रहा था.

आने वाले समय में बेहतर उपभोक्ता मांग से इसमें और सुधार की उम्मीद जतायी जा रही है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी.

हालांकि जुलाई-सितंबर तिमाही में गिरावट के साथ भारत तकनीकी रूप से मंदी में आ गया है, लेकिन अनुमान के विपरीत बेहतर सुधार से चालू वित्त वर्ष के समाप्त होने से पहले अर्थव्यवस्था के बेहतर स्थिति में आने की उम्मीद है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी रूप से माना जाता है कि अगर दो तिमाहियों में अर्थव्यवस्था निगेटिव (गिरावट) रहे तो उस अर्थव्यवस्था को मंदी में कहा जाता है. भारतीय अर्थव्यवस्था पहली बार मंदी के दौर में प्रवेश कर गई है.

वित्त वर्ष 2019-20 की इसी तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. कोरोना वायरस महामारी फैलने से रोकने के लिए लागू सख्त सार्वजनिक पाबंदियों के बीच चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही अप्रैल-जून में अर्थव्यवस्था में 23.9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आयी थी.

कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिए ‘लॉकडाउन’ लगाया जाना था जिससे आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो गयी थी. जून से ‘लॉकडाउन’ से छूट दिए जाने के बाद से अर्थव्यवस्था में तेजी देखी जा रही है.

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के शुक्रवार को जारी आंकड़े के अनुसार जुलाई-सितंबर तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इससे पूर्व तिमाही में इसमें 39 प्रतिशत की गिरावट आई थी.

कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर बना हुआ है और इसमें दूसरी तिमाही में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई. वहीं व्यापार और सेवा क्षेत्र में 15.6 प्रतिशत की गिरावट आई जो अनुमानों की तुलना में कम है.

सार्वजनिक व्यय में इस दौरान 12 प्रतिशत की कमी आई. दूसरी तिमाही में बिजली सेक्टर में 4.4 फीसदी की तेजी दर्ज हुई है.

उल्लेखनीय है कि चीन की आर्थिक वृद्धि दर जुलाई-सितंबर तिमाही में 4.9 प्रतिशत रही. वहीं अप्रैल-जून तिमाही में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.

 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा था कि अर्थव्यवस्था में उम्मीद से तेज रिकवरी आई है, लेकिन त्योहारी सीजन के बाद मांग में स्थिरता पर नजर बनाए रखने की जरूरत है. ‘लॉकडाउन’ के बाद से पुनरूद्धार उम्मीद के विपरीत तेज है और चौथी तिमाही में वृद्धि दर सकारात्मक रह सकती है.

अर्थव्यवस्था में सुधार की खबर आरबीआई की अगले सप्ताह पेश होने वाली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले आई है.

कई रेटिंग एजेंसियों ने दूसरी तिमाही में जीडीपी में 10 से 11 फीसदी तक की गिरावट का अनुमान जताया था. आरबीआई ने वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी में 8.6 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था.

वहीं, मूडीज ने जीडीपी में 10.6 फीसदी, केयर रेटिंग ने 9.9 फीसदी, क्रिसिल ने 12 फीसदी, इक्रा ने 9.5 फीसदी और एसबीआई रिसर्च ने 10.7 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया था.

अक्टूबर में आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 2.5 प्रतिशत गिरा

बुनियादी क्षेत्रों आठ प्रमुख उद्योगों का उत्पादन इस बार अक्टूबर महीने में एक साल पहले की तुलना में 2.5 प्रतिशत घट गया. यह लगातार आठवां महीना है, जब इन क्षेत्रों का उत्पादन कम हुआ हो. शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में इसकी जानकारी मिली.

उत्पादन में गिरावट का मुख्य कारण खनिज तेल, गैस, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद और इस्पात उद्योग के उत्पादन में कमी आना है.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2019 में इन आठ क्षेत्रों के उत्पादन में 5.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी.

आलोच्य माह के दौरान कोयला, उर्वरक, सीमेंट और बिजली क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की गई. हालांकि कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पादों और इस्पात में गिरावट रही.

इस साल अप्रैल से अक्टूबर के दौरान इन क्षेत्रों के उत्पादन में 13 प्रतिशत की गिरावट आई है. साल भर पहले की समान अवधि में इनके उत्पादन में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)